पटनाः बिहार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का प्रथम चरण हिंसा की छोटी-मोटी घटनाओं के बीच सम्पन्न हुआ. कहीं से भी कोई बड़ी हिंसा की खबर नहीं आई. बिहार के चप्पे-चप्पे पर फैले News 22 scope के रिपोर्टरों सुबह से ही इस मतदान पर अपनी नजरें बनाये रखी. पेश है इस चुनाव की कुछ झलकियां-
कैमूरः रामजानकी विद्यालय, सकरी का मतदान केन्द्र पर भारी कुव्यवस्था देखने को मिली, सरकारी दावों में तो यह आदर्श मतदान केंद्र था, लेकिन नजारा परेशान करने वाला था. मतदान केन्द्र पर न तो पेयजल की व्यवस्था थी और न ही बारिश से बचाव के उपाय. मतदान केंद्र के अंदर काफी अंधेरा था, इसके कारण कमजोर रोशनी वालों को परेशानी का सामना करना पड़ा.

कुदरा प्रखंड के 174 बूथों में कई मतदान केन्द्रों पर बायोमैट्रिक सिस्टम फेल हो गया, बाद में मतदान को बगैर बायोमेट्रिक के ही शुरु किया गया.
औरंगाबादः औरंगाबाद सदर प्रखंड में इब्राहिमपुर पंचायत के उन्थु गांव में मतदान केंद्र संख्या-48, 49 और 50 के पास वर्चस्व को लेकर दो उम्मीदवारों के समर्थकों के बीच भीड़ंत हो गई. दोनों पक्षों में जमकर मारपीट हुई. मौके पर मौजूद पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर दोनों पक्षों को काबू किया, इस दौरान पुलिस की लाठी खाकर एक व्यक्ति बेहोश हो गया, ग्रामीणों ने समझा कि पुलिस की लाठी से उसकी मौत हो गई. इसके कारण ग्रामीण पुलिस बल से उलझ पड़े. उग्र ग्रामीणों ने जमकर पत्थरबाजी की, कुछ पुलिसकर्मियों को चोट भी आई. स्थिति तनावपूर्ण, लेकिन नियंत्रण में है. फिलहाल उन्थु गांव पुलिस छावनी में तब्बील हो चुका है. जबकि औरंगाबाद, एसडीपीओ गौतम शरण ओमी ने पुलिस लाठीचार्ज से इंकार किया है.
रोहतासः जिलाधिकारी धर्मेंद्र कुमार और एसपी आशीष भारती विभिन्न पंचायतों में जाकर मतदान केंद्रों का निरीक्षण किया और मतदाताओं से मतदान करने की अपील की, जिलाधिकारी धर्मेंद्र कुमार ने सीधा मतदाताओं से पूछा कि कहीं से कोई दवाब या धमकी तो नहीं दी जा रही. डीएम धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि कुछ मतदान केन्द्रों पर ईवीएम खराबी की शिकायत आई थी, लेकिन उसे तुरंत ठीक कर दिया गया, सर्वर की समस्या के कारण अगर बायोमेट्रिक में दिक्कत हुई.
जहानाबादः प्रथम चरण के चुनाव के दौरान मतदाताओं में जमकर उत्साह देखा गया. गांव की सरकार को बनाने को लेकर लोगों की लंबी कतारें लगी रही.

वंशी सूरजपुर सोनभद्र प्रखंड 61.25% लोगों ने पंचायत चुनाव में अपनी भागीदारी निभाई। इस चुनाव में मतदान के दौरान कई रंग देखने को मिले. गांव की सरकार बनाने की भागीदारी में 99 वर्ष की बुढ़िया बलौदा पंचायत के सेनारी मध्य विद्यालय में बने मतदान केंद्र पर वोट देने पहुंची थी. दरअसल यह वहीं सेनारी गांव है जहां 1999 में नक्सलियों द्वारा 33 लोगों की गला रेत कर निर्मम हत्या कर दी गई थी. लेकिन अब परस्थित बदल चुकी है. अब लोकतंत्र में हर किसी की आस्था साफ दिख रही है तभी तो 99 वर्ष की बसंती देवी भी मतदान को लेकर अपने अधिकार के प्रति संवेदनशील दिख रही थी.


















