साइबेरियन पक्षियों ने जिले के हिरणपुर थाना परिसर स्थित पेड़ पर अपना आशियाना बनाया

संजय

पाकुड़: पाकुड़ मे हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर साइबेरियन पक्षियों ने जिले के हिरणपुर थाना परिसर स्थित पेड़ पर अपना आशियाना बनाया है.

हर साल की तरह इस साल भी साइबेरियन पक्षियों के आने का शिलशिला शुरू हो गया है. हज़ारो की संख्या में साइबेरियन पक्षी यहाँ पहुचे और हर साल पहुचते है.

पाकुड़ में हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर साइबेरियन पक्षियों ने जिले के हिरणपुर थाना परिसर स्थित पेड़ पर अपना आशियाना बनाया है.

इन पक्षियों का आना अप्रैल – मई महीने से ही शुरू हो गया है.हिरणपुर थाना परिसर में इन दिनों सैकड़ों की संख्या में साइबेरियन पक्षी पेड़ पर अपना आशियाना बनाकर रह रहे हैं.पक्षी खुद के बनाए घोंसले में ही रहते हैं.

भोजन के लिए नदी किनारे स्थित घोंघा, छोटी-छोटी मछली समेत अन्य चीजों को खाकर दिनचर्या चलाते हैं.वहीं जानकारों की मानें, तो हर साल ये पक्षी अपना बसेरा थाना परिसर में बनाते हैं.हर साल अप्रैल माह से इन साइबेरियन पक्षियों का आना शुरू हो जाता है और नवंबर ,दिसंबर महीने यह यह साइबेरियन प्रस्थान करते है.

आदमी तो आदमी पक्षी भी इन परिसर में सुकून और सुरक्षित महसूस करते है रहकर.और अपना रन बसेरा बनाकर रह रहे है.

कहा गया की जब यह पक्षियों के आगमन होता है तो लोग अंदाजा लगा लेते है की अब मानसून आने वाला है. और मानसून काफी अच्छा होगा.

हिरणपुर थाना परिसर में काफी संख्या में बड़े बड़े पेड़ है.जो काफी पुराना भी है.और इन्ही पेडो पर साइबेरियन पक्षी रहते है और चहल कर्मी करते है.हज़ारो की संख्या में साइबेरियन हरेक साल यहाँ पहुचते है.

जो चर्चा का विषय बना रहता है.साइबेरियन पक्षी साइबेरिया इलाके से सैकड़ों किलोमीटर की उड़ान भरकर यहां पहुंचते हैं.

आंधी तूफान और तेज हवाओं से कई पक्षी जान से भी हाथ धो बैठते हैं.वहीं हर साल भयानक ठंड से खुद को बचाते हुए ये पक्षी भारत की ओर रुख करते हैं.साइबेरियन पक्षी एक ऐसा पक्षी होता है, जो हवा में भी उड़ता है और पानी में भी तैरता है.जिसका रंग सफेद होता है.चोंच और पैर नारंगी रंग के होते हैं.

साइबेरिया बहुत ही ठंडी जगह है, ऐसे में नवंबर से लेकर मार्च तक तापमान शून्य से बहुत नीचे चला जाता है.इस वजह से इन पक्षियों का जिंदा रहना मुश्किल हो जाता है.बताया जाता हा की इनके देशो में अधिक ठण्ड होने की वजह से वहा पानी जम जाता है इससे पहले ही यह पक्षिया लम्बी यात्रा पर निकल पड़ते है.

और ऐसी जगह पहुचते है जहा खाने पिने के साथ साथ मौसम भी अनुकूल हो और प्रजनन के लिए परिस्थितयां भी अनुकूल हो.

हजारों किलोमीटर का सफर तय कर ये पक्षी भारत के अलग-अलग इलाकों में चले आते हैं.जिसका मनमोहक नजारा पाकुड़ जिले के हिरणपुर थाना परिसर में भी देखने को मिल रहा है.बताया जाता है कि यहां वे प्रजनन भी करते हैं.

नवंबर से दिसंबर होते हुए ये पक्षी पुनः यहां से उड़ान भरकर अपने गंतव्य की ओर निकल पड़ते हैं.

 

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