रांचीः प्रोजेक्ट भवन मंत्रालय में मुख्यमंत्री हेमंत सोरोन ने 47 असिस्टेंट इंजीनियरों को नियुक्ति पत्र सौंपा. नियुक्ति पत्र पाने वाले अभ्यर्थी असिस्टेंट इंजीनियर की सीधी भर्ती प्रतियोगिता परीक्षा में पास हुए हैं. कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि आज इस नियुक्ति पत्र वितरण में 2 विभागों की अहम भूमिका है. अभ्यर्थी वर्षों से नौकरी का सपना देख रहे थे और प्रयास कर रहे थे. उनका सपना पूरा हुआ है. आमजनों की यह सोच होती है कि हमें सरकारी नौकरी मिले. जिसको लेकर अलग-अलग प्रतियोगिता परीक्षा में भाग लेते है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 100 की संख्या में अभ्यर्थी एकत्रित हुए है. यह पहला अवसर नहीं है कि इस सभागार में कई नियुक्तियां दी गई है. यह सिलसिला बहुत कम समय में हुआ है. बीडीओ, सीओ, डीएसपी, शिक्षकों की भी बहाली हुई है. पहली बार राज्य में कृषि पदाधिकारी की नियुक्ति हुई. पंचायत सेवक की भी नियुक्ति हुई है. इतनी नियुक्ति सरकार ने दी की सभागार भी छोटा हो गया था. सरकार ने खेलगांव में नियुक्ति देने का काम किया.
जब सत्ता में हमारी सरकार आई तो कोरोना था और इस राज्य को आवश्कता थी. कई कार्य नहीं हुए थे. जब हम लोगों ने सत्ता संभाला तो कोरोना जैसे चुनौती हमारे सामने आई. एक के बाद एक चुनौती हमारे सामने आई. और कई चीजों में कमी थी, चाहे संसाधन के विषय में हो या व्यवस्था के विषय में. राज्य बनने के बाद पहली बार जेपीएससी की नियमावली बनी. हमारा स्पष्ट उद्देश्य था की झारखंडी बच्चों को रोजगार देना है. सिर्फ सरकारी नहीं प्राइवेट में भी हमने रोजगार देने का काम किया है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 75% नियक्ति यहां के बच्चों की होगी और इसको धरातल में उतरने के लिए कई जगह कैंप लगा के नियुक्ति पत्र बाटने का काम किया. यहां के बच्चे कोई एलएनटी, इंफोसिस, टाटा में जा रहा है और ये मन को सुकून देने वाला कार्यक्रम पूरे राज्य के लिए खुशी का माहौल सा बनता है. राज्य में कई ऐसी सरकारी संस्थाएं है जो लगभग प्राइवेट संस्था के रूप में हो रही है. आज हर चीज प्राइवेट हो रहा है, लेकिन जिस देश के 80% लोग खेती बारी से जुड़े है उनके बारे के कौन सोचेगा. हमारा राज्य पिछड़ा राज्य में आता है ये बोलने में बहुत बुरा लगता है.
उन्होंने कहा कि झारखंड एक अलग राज्य के नाम से जाना जाता है. एक सर्वे में आया है की हम वित्त प्रबंधन में गुजरात से आगे हो गए हैं. झारखंड पहला राज्य है जहां दलित और पिछड़े बच्चे विदेश में पढ़ने जा रहे है. हमलोग के कार्यकाल में 50 बच्चों को विदेश में पढ़ने भेजा गया. हमारा प्रयास है कि पढ़े लिखे बच्चे के लिए मार्गप्रसास्त करना. जो कम पढ़े है उनके लिए भी ये शुरूआत है. अभी कई शिक्षकों की नियुक्ति भी होने वाली है. निरंतर कार्य चल रहा है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि नगर विकास विभाग में पहली बार नियुक्ति हो रही है. देश के विकसित राज्य के तरफ इस राज्य को लेकर जाना है और आपकी भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है. झारखंड अत्यंत पिछड़ा राज्य है और यहां गरीबी अभिशाप है.
सरकार के पास नोट छापने की मशीन नहीं है. हमें इस लिए स्वर्जन पेंशन योजना लागू करना पड़ा. क्योंकि हम कई गांव में भ्रमण करते है. वहां की स्थिति देखते है और आश्वस्त करते है कि किसी का शोषण न हो. इसलिए हमलोगों ने यह लागू किया.
उन्होंने कहा कि इस राज्य के कर्मचारी के पुरानी पेंशन की मांग लंबे समय से चली आ रही थी. जिसके लिए 2 दिन पहले दिल्ली में कर्मचारियों का सम्मेलन किया गया था. लेकिन मीडिया में इस खबर को दिखाया नहीं गया. लेकिन उस सम्मेलन से उनकी बात देश के लोगों तक पहुंची. यहां सरकार बनने के बाद पहली बार ऐसा हुआ की पुरानी पेंशन योजना लागू हुई. इस राज्य में पोटेंशियल की कमी नहीं है. हुनर की कमी नहीं है. बस प्रयास की आवश्यकता है.
रिपोर्टः करिश्मा सिन्हा


















