Jharkhand Teacher Appointment: झारखंड में 1042 असिस्टेंट प्रोफेसरों को नियुक्ति पत्र बांटने के दौरान एक अनोखा मामला सामने आया। नियुक्ति प्रक्रिया में देरी की वजह से, कुछ उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र तब मिले जब वे रिटायरमेंट की उम्र पूरी कर चुके थे या रिटायरमेंट के बहुत करीब थे। इस मामले ने नियुक्ति प्रक्रिया के समय पर न होने पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रिटायरमेंट के बाद मिला नियुक्ति पत्र
पलामू के नियम अंसारी को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के हाथों असिस्टेंट प्रोफेसर का नियुक्ति पत्र मिला। हालांकि, 60 साल की उम्र पूरी करने के बाद वे 31 मई को रिटायर हो गए थे। यानी उन्हें नियुक्ति पत्र लगभग एक महीने बाद मिला। उनका कहना है कि अगर नियुक्ति प्रक्रिया समय पर पूरी हो जाती, तो उन्हें रेगुलर सर्विस देने का मौका मिलता।
सरकार से सर्विस बढ़ाने की मांग
नियम अंसारी ने राज्य सरकार से सर्विस बढ़ाने या कोई वैकल्पिक समाधान निकालने की मांग की है। उनका कहना है कि नियुक्ति प्रक्रिया में देरी उनकी वजह से नहीं हुई थी, इसलिए उन्हें अपने चयन का लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने सरकार से उचित फैसला लेने की अपील की है।
अगले ही दिन रिटायर हो जाएंगे दूसरे शिक्षक
जामताड़ा के नंदलाल रवानी का मामला भी चर्चा में है। उन्हें 29 जून को नियुक्ति पत्र मिला, जबकि 30 जून को वे 60 साल के हो गए। ऐसे में, नियुक्ति मिलने के अगले ही दिन वे रिटायर हो गए। इस वजह से उनकी रेगुलर सर्विस का मौका लगभग खत्म हो गया।
सालों के इंतजार के बाद मिली नियुक्ति
नंदलाल रवानी ने बताया कि उन्होंने साल 2016 में झारखंड टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (JTET) पास किया था। इसके बाद, भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के लिए सालों तक इंतजार करना पड़ा। असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया साल 2023 में शुरू हुई, लेकिन प्रशासनिक और कानूनी कारणों से नियुक्ति में लगातार देरी होती रही। अब, नियुक्ति पत्र मिलने के बावजूद, उन्हें सेवा करने का पर्याप्त मौका नहीं मिला। यह मामला इस बात को भी उजागर करता है कि नियुक्ति प्रक्रियाओं में देरी का उम्मीदवारों पर क्या असर पड़ता है। अब सबकी नज़रें संबंधित उम्मीदवारों की मांगों और सरकार के संभावित फैसले पर टिकी हैं।
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