भारतीय महिला हॉकी टीम ओलंपिक के स्वर्ण और रजत पदक की दौड़ से भले ही बाहर हो गई हो लेकिन उसने भारतीय हॉकी को गोल्डन स्टिक का भरोसा जरूर दिला दिया है। सेमीफाइनल में उसे अर्जेंटिना ने 2-1 से हरा दिया लेकिन अर्जेंटिना की टीम को जिस अंदाज में भारतीय टीम ने मैदान पर खिलाया, उससे ये साफ है कि भारतीय हॉकी ने अपना जलवा दिखा दिया है। अब उसके छा जाने की कमी भर है।
भारतीय टीम ने महज डेढ़ मिनट के अंदर स्कोर बोर्ड को व्यस्त कर दिया। बढ़त गुरजीत कौर ने दिलाई। इसके बाद भी बीच मैदान पर खेल पर अपनी पकड़ को बार बार साबित करती रही भारतीय टीम। एक टीम जो पहली बार सेमीफाइनल में पहुंची हो उस पर एक स्वाभाविक दबाव होता है मगर भारतीय टीम पर ऐसा कोई दबाव महसूस नहीं हुआ। अर्जेंटिना की टीम ने इस बीच मिले पेनल्टी कॉर्नर का फायदा उठाया और भारत पर बढ़त बना ली।
अर्जेंटिना की बढ़त के बाद के मैच को भारतीय हॉकी के नाम किया जा सकता है। तेजी, लय, आक्रमण और सुरक्षा सब पर जैसे स्पष्ट छाप भारतीय हॉकी शैली की थी। दिक्कत ये थी कि भारतीय टीम को गोल के लिए विपक्षी टीम के अलावा समय के साथ भी लड़ना था। आम तौर पर ऐसे मौकों पर भारतीय टीम को बेबस देखने के आदी रहे भारतीय दर्शकों के लिए टीम का तेवर बिल्कुल नया था। हां, ये जरूर है कि भारतीय शैली में फील्ड गोल के मौके अधिक मिलते हैं। पूरे मैच में वो मिले भी लेकिन अभी उसे और साधने की जरूरत है। संघर्ष का आलम ये रहा कि 17 सेकंड पहले भी भारत ने रेफरल की अपील की और अगर वो फैसला भारत के हक में होता तो परिणाम बदल सकता था। अच्छी बात ये है कि भारतीय टीम हर बार अपने अनुशासन की लक्ष्मण रेखा के अंदर रहती है।
अब भारतीय टीम कांस्य पदक के लिए अपना अंतिम मैच खेलेगी। अगर खिलाड़ियों ने अपना नर्व नहीं खोया तो पदक की उम्मीद तो की ही जा सकती है।
गंगेश गुंजन, ए़डिटर इन चीफ, 22Scope







