ग्रामीण झारखंड में PMAY-G के प्रभाव आकलन पर सीयूजे में एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन

रांची. झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूजे) में अर्थशास्त्र और विकास अध्ययन विभाग द्वारा आज पीएमएवाई-जी के प्रभाव मूल्यांकन पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला आईसीएसएसआर प्रायोजित अल्पकालिक अनुभवजन्य अनुसंधान परियोजना के परिणामों का प्रसार करने के लिए आयोजित की गई थी। कार्यशाला का विषय झारखंड के तीन जिलों- पाकुड़, गिरिडीह और चतरा में “गरीबी और असमानता उन्मूलन में सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम की प्रभावशीलता को मापना: ग्रामीण झारखंड में प्रधानमंत्री आवास योजना का अध्ययन” था। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डब्लयूएचओ के राज्य समन्वयक डॉ. अभिषेक पॉल मौजूद थे।

सीयूजे में राष्ट्रीय कार्यशाला

परियोजना समन्वयक और कार्यशाला की संयोजक डॉ. संहिता सुचरिता ने इस बात पर प्रकाश डाला कि पीएमएवाई-जी कार्यक्रम ने अपने लाभार्थियों की सामाजिक आर्थिक स्थिति को बढ़ाया है और महिला सशक्तिकरण का एक प्रमुख चालक रहा है क्योंकि पक्के घर ने महिलाओं की सुरक्षा और विनम्रता में सुधार किया है। इसके साथ ही गांवों में और बच्चों के बीच शिक्षा को भी बढ़ाया है।

आईएसआई गिरिडीह में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत डॉ. हरि चरण बेहरा ने प्रतिभागियों को उन मानदंडों के बारे में बताया जिनके अनुसार लाभार्थियों की पहचान की जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि पीएमएवाई-जी ने महिला सशक्तीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है क्योंकि 69% पीएमएवाई-जी घरों का स्वामित्व महिलाओं के पास है।

सांख्यिकी विभाग के प्रोफेसर कुंज बिहारी पांडा ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे पीएमएवाई-जी के माध्यम से पक्के घर का लाभ उठाने से जाति और वर्ग की बाधाएं दूर हो गई हैं। एनआइटी राउरकेला के प्रोफेसर डॉ. नारायण सेठी ने बताया कि कैसे पीएमएवाई-जी कार्यक्रम ने समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आवास की कमी को संबोधित किया है। उन्होंने पीएमएवाई कार्यक्रम के सामने आने वाली चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला, जैसे – डेटा पारदर्शिता की कमी, खराब निगरानी और कमजोर मूल्यांकन ढांचा। उन्होंने पीएमएवाई-जी योजना को एक ऐसी योजना के रूप में संक्षेपित किया जो सामाजिक एकजुटता को बढ़ावा देती है और आवास असमानताओं को कम करती है।

मुख्य अतिथि डॉ. अभिषेक पॉल ने गांवों से काला अज़र को कम करने में पीएमएवाई-जी योजना की भूमिका पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने प्रश्न उत्तर सत्र के माध्यम से दर्शकों से भी बातचीत की और पक्का घर काला अज़र को कैसे रोकता है, इस बारे में उनके प्रश्नों का समाधान किया।

कार्यशाला में एक पैनल चर्चा भी हुई जिसमें परियोजना समन्वयक डॉ. संहिता सुचरिता, जनसंचार विभाग की सहायक प्रोफेसर रश्मि वर्मा, लिट्टीपाड़ा ब्लॉक के गांवों के मुखिया और गिरिडीह के जिला समन्वयक के साथ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. प्रज्ञान पुष्पांजलि शामिल थे। पैनल चर्चा में, गांव के मुखियाओं ने इस बात पर प्रकाश डाला कि शिक्षा और जागरूकता की कमी ग्रामीणों द्वारा पक्के घर का लाभ उठाने में सबसे प्रमुख बाधा रही है। मुखियाओं ने यह भी बताया कि कच्चे घर में रहना आर्थिक से ज्यादा व्यवहारिक पहलू है। कार्यक्रम के बारे में ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए मुखियाओं ने समय-समय पर नुक्कड़-नाटकों का आयोजन कर पक्का मकान, काला अज़र के वाहक और इसकी रोकथाम के फायदे बताए।

कार्यशाला में विभिन्न हितधारकों जैसे तीन जिलों- चतरा, गिरिडीह और पाकुड़ के जिला समन्वयकों के साथ ही लिट्टीपाड़ा, गांडेय और गिद्धौर जैसे विभिन्न ब्लॉकों से ब्लॉक समन्वयक ने भाग लिया। आमंत्रित अतिथि एवं प्रतिभागी के रूप में लिट्टीपाड़ा, जंगी, दुरियो, करमाटांड़ के मुखिया एवं पंचायत समिति सदस्य एवं अन्य ग्रामीण भी उपस्थित थे। कार्यशाला में झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय के विभिन्न संकाय सदस्य, अनुसंधान विद्वान और दो सौ से अधिक छात्र भी शामिल थे।

Ranchi University PhD Admission: रांची यूनिवर्सिटी में PhD इंटरव्यू की तारीख...

Ranchi University PhD Admission: रांची विश्वविद्यालय में पीएचडी नामांकन की प्रक्रिया जारी है। नामांकन के लिए अभ्यर्थियों का इंटरव्यू 22, 23 और 24 अक्टूबर...

Jamshedpur Encroachment: सरकारी-लीज जमीन पर कब्जा करने वालों पर सख्ती, 17...

Jamshedpur Encroachment: सरकारी और टाटा स्टील की लीज भूमि से अवैध कब्जे हटाने के लिए मंगलवार को धालभूम अनुमंडल प्रशासन, राजस्व विभाग और पुलिस...

Ranchi State Library Fire: फिरायालाल की स्टेट लाइब्रेरी में आग, छात्रों...

Ranchi State Library Fire: फिरायालाल स्थित स्टेट लाइब्रेरी में मंगलवार को अचानक आग लगने की सूचना से हड़कंप मच गया। लाइब्रेरी में मौजूद छात्रों...