BHOJPUR में विशेश्वर ओझा हत्याकांड में मिश्रा बंधुओं को उम्र कैद, पांच अन्य को 10 साल की सजा

भोजपुर: विशेश्वर ओझा हत्याकांड में आज आरा की एडीजे 8 नीरज किशोर की अदालत ने सजा के बिंदु पर सुनवाई के बाद सजा का ऐलान कर दिया। आईपीसी की धारा 302 में हरेश मिश्रा एवं उसके भाई ब्रजेश मिश्रा को आजीवन (मृत्यु पर्यन्त) सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई। इसके साथ ही 50,000 का जुर्माना भी लगाया गया। ब्रजेश एवं हरेश मिश्रा को आईपीसी की धारा 307 के तहत भी दोषी पाया गया था एवं इसके तहत 10 साल की सश्रम सजा सुनाई गई एवं 25,000 का जुर्माना लगाया गया। विशेश्वर ओझा हत्याकांड विशेश्वर ओझा हत्याकांड

27 आर्म्स एक्ट में इन दोनों को 3 साल की सश्रम कारावास और 10,000 का अर्थ दंड सुनाया गया। अर्थ दंड नहीं देने पर 3 महीने की साधारण करावास की सजा का प्रावधान किया गया है। सभी सजा साथ-साथ चलेंगी। इसके साथ ही अदालत ने दोष सिद्ध पांच अन्य अपराधकर्मियों टुनी, उमाकांत, बसंत, हरेन्द्र और पप्पू को आईपीसी की धारा 307 एवं 27 आर्म्स एक्ट में क्रमशः 10 साल एवं 3 साल सश्रम सजा एवं 25000 तथा 10000 अर्थ दंड लगाया है। अर्थ दंड नहीं चुकाने पर तीन माह साधारण कारावास की सजा का ऐलान किया गया है। सभी सजा साथ-साथ चलेंगी।

सजा के बिंदु पर अभियोजन की बहस
अदालत में अभियोजन की तरफ से जिला अभियोजन पदाधिकारी सह अपर लोक अभियोजक माणिक कुमार सिंह ने सजा के बिंदु पर बहस की। उन्होंने आईपीसी 302 के तहत आरोपित हरेश मिश्रा एवं ब्रजेश मिश्रा को फांसी की सजा देने की मांग की उन्होंने अदालत में कहा कि यह रेयर ऑफ द रेयरेस्ट मामले के अंतर्गत आता है। माणिक सिंह ने अदालत में बताया कि इसी कांड के मुख्य गवाह एवं चश्मदीद की हत्या ब्रजेश मिश्रा ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर सिर्फ इसलिए कर दी ताकि उसे संदेह का लाभ मिल जाए।

माणिक सिंह ने अदालत में कहा कि गवाह विशेश्वर ओझा हत्याकांड में पूर्व से ही ब्रजेश मिश्रा आजीवन कारावास की सजा काट रहा है और इसलिए भी फांसी की सजा उसके लिए उपयुक्त है। इसके साथ ही उन्होंने आईपीसी की धारा 307 तहत दोषसिद्ध सभी पांच अपराध कर्मियों को आईपीसी 307 के सेक्शन 2 के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने की मांग की। उन्होंने दलील दी की सभी अपराध कर्मियों ने विशेश्वर ओझा को जीवन जीने के मौलिक अधिकार से वंचित कर दिया।

सजा के बिंदु पर बचाव पक्ष की बहस
विशेश्वर ओझा हत्याकांड बचाव पक्ष की ओर से सबसे पहले ब्रजेश मिश्रा के अधिवक्ता विष्णुधर पांडेय ने अदालत के समक्ष दलील दी कि अपर लोक अभियोजक गैर जरूरी दलील है प्रस्तुत कर रहे हैं और यह मामला रेयर ऑफ द रेयरेस्ट नहीं है इसलिए सजा सुनाए जाने के समय नरमी बरती जाए। वहीं रामाशंकर त्रिपाठी उर्फ मुन्ना त्रिपाठी ने सेशन ट्रायल 390/17 में सजा के बिंदु पर बहस करते हुए कहा कि सभी अभियुक्त 6 से 7 साल तक जेल में बिता चुके हैं इसलिए सजा सुनाए जाने के समय जेल में काटी गई अवधि का भी ध्यान रखा जाए।

विशेश्वर ओझा हत्याकांड – दलीलें सुनने के कुछ मिनट के अंदर सजा का ऐलान

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने आरोपी भाईयों हरेश एवं ब्रजेश मिश्रा को आजीवन सश्रम कारावास तथा पांच अन्य दोषियों को 10 साल सश्रम सजा का ऐलान कर दिया इसके साथ ही अन्य धाराओं में भी उपरोक्त सजा सुनाई गई एवं अर्थ दंड अधिरोपित किया गया।

किसने किनका पक्ष रखा
वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णुधर पांडेय एवं रामा शंकर त्रिपाठी उर्फ मुन्ना त्रिपाठी ने बचाव पक्ष की तरफ से बहस किया जबकि अभियोजन की तरफ से जिला अभियोजन पदाधिकारी सह अपर लोक अभियोजक माणिक कुमार सिंह ने बहस किया। सजा के बिंदु पर बहस आधे घंटे से भी अधिक समय तक चली।

कौन कहां था?
जिला अभियोजन पदाधिकारी सह अपर लोक अभियोजक माणिक कुमार सिंह , अपर लोक अभियोजक प्रशांत सिंह, बचाव पक्ष की ओर से वरीय अधिवक्ता विष्णुधर पांडेय, अधिवक्ता रामाशंकर त्रिपाठी, इस कांड में दोष सिद्ध उमाकांत, टुनी, हरेंद्र और पप्पू सिंह को आरा मंडल कार से भारी सुरक्षा के बीच लाया गया था। ब्रजेश मिश्रा बक्सर केन्द्रीय कारा से जबकि हरेश मिश्रा एवं बसंत सिंह को भागलपुर से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए उपस्थित कराया गया।

इसके अलावा अदालत में अधिवक्ता मधुरेंद्र कुमार पांडेय, बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी भीतर और बाहर मौजूद थे। इस अहम फैसले को कवर करने के लिए अदालत कक्ष के बाहर भारी संख्या में मीडिया कर्मियों की भीड़ भी मौजूद थी। अदालत के फैसले को सुनने के लिए आज विशेश्वर ओझा के पुत्र राकेश विशेश्वर ओझा भी अदालत पहुंचे थे और अदालत कब से कुछ दूर ही सुरक्षा कर्मियों के साथ खड़े रहे एवं आदेश के प्रतीक्षा करते रहे।

विशेश्वर ओझा हत्याकांड – सजा सुनकर आंखों में खुशी के आंसू

अदालत कक्ष में मौजूद विशेश्वर ओझा के समर्थकों के आंखों में खुशी के आंसू भी झलक गए। अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए राकेश विशेश्वर ओझा की आंखें भी नम हो गईं और उन्होंने फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि देर से ही सही लेकिन इस मामले में उनके साथ न्याय हुआ है। विशेश्वर ओझा हत्याकांड विशेश्वर ओझा हत्याकांड

भोजपुर से नेहा की रिपोर्ट

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