पटना : पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधिश जस्टिस कृष्ण बिनोद चंद्रन ने नए कानून में न्यायिक प्रक्रिया को लेकर बड़ी बात कह दी है। उन्होंने कहा कि देश भर में एक जुलाई से लागू तीन नए कानून में न्यायिक प्रक्रिया से छेड़छाड़ की गुंजाइश नहीं है। इन कानूनों से न्याय व्यवस्था को मजूबती मिलेगी। इनमें पहले से मौजूद कई कानूनी चुनौतियों से निपटने का समाधान भी है। मुख्य न्यायाधिश ने शनिवार यानी 27 जुलाई को पटना के ज्ञान भवन में नए ‘आपराधिक कानून’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
मुख्य न्यायाधिश जस्टिस बिनोद चंद्रन ने कहा कि इससे आम जनता को सुविधा होगी। सभी जिलों के डीएम, एसपी, जिला जज, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधिश और लोक अभियोजक आदि को संबोधित करते हुए जस्टिस चंद्रन ने कहा कि नए कानून में वैज्ञानिक और डिजिटल साक्ष्यों को प्रधानता दी गई है। इससे न्याय व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी और न्याय दिलाने में तेजी आएगी। ऐसे में अधिक संख्या में फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) कर्मियों की जरुरत पड़ेगी। उन्होंने चाणक्या नेशनल लॉ विश्वविद्यालय में एफएसएल से जुड़े कोर्स की शुरुआत का सुझाव भी दिया।
अनुसंधान के पहले प्राथमिक जांच का भी है प्रावधान – शाही
महाधिवक्ता पीके शाही ने कहा कि नए कानून को लेकर सरकार की यह दूसरी कार्यशाला है। नए कानून में इलेक्टॉनिक साक्ष्य के अतिरिक्त जीरो एफआईआर जैसी नई व्यवस्थाएं की गई है। बहुत मामलों में अनुसंधान के पहले प्राथमिक जांच का भी प्रावधान है। इससे पीड़ित को न्याय मिलेगा। रोज जांच पदाधिकारी को केस की प्रगति ऑनलाइन अपलोड करनी है। इन तमाम कार्यों को समयसीमा तय है।
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