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पटना: राजनीति के मौसम वैज्ञानिक कहे जाने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने वर्ष 2000 में एक पार्टी बनाई थी लोक जनशक्ति पार्टी। रामविलास पासवान ने देश की राजनीति में अपनी और पानी पार्टी की अच्छी खासी जगह बनाई थी। उनके निधन के बाद उनकी पार्टी से उनके ही भाई पशुपति कुमार पारस केंद्र में मंत्री बने लेकिन वर्ष 2021 में उन्होंने पार्टी के संस्थापक रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान को ही पार्टी से अलग करने की कोशिश की और फिर पार्टी दो भागों में बंट गई।
पशुपति पारस लगातार एनडीए का हिस्सा रहे और केंद्र में मंत्री भी बने, इधर चिराग पासवान की एनडीए में कोई हिस्सेदारी नहीं होने के बावजूद वह अपने आपको मोदी का हुनमान बताते रहे। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में एनडीए में पशुपति पारस को सीट में हिस्सेदारी नहीं मिली जबकि मोदी के हनुमान को पांच सीटें दी गई। लोकसभा चुनाव में सीट नहीं मिलने से नाराज पशुपति पारस ने केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था जिसके बाद कयास लगाया जा रहा था कि वे इंडिया गठबंधन में शामिल होंगे लेकिन पशुपति पारस किसी भी गठबंधन में नहीं गए और न ही उन्होंने चुनाव प्रचार में हिस्सा लिया।
हालांकि उन्होंने एक घोषणा जरूर की कि वे एनडीए गठबंधन का ही हिस्सा हैं। अब विधानसभा चुनाव की तैयारी के बीच एक बार फिर पशुपति पारस के एनडीए में रहने पर सवाल उठने लगा जिसके बाद पशुपति पारस की पार्टी को यह साफ करना पड़ा कि वे अभी भी एनडीए का हिस्सा हैं। दरअसल बीते दिनों चिराग पासवान की पार्टी के सांसद अरुण भारती ने कहा था कि एनडीए में बिहार की सिर्फ पांच पार्टियां है, और पशुपति पारस एनडीए का हिस्सा नहीं हैं।
इस बीच भाजपा के नवमनोनीत प्रदेश अध्यक्ष ने एक दिन पशुपति पारस के कार्यालय में जा कर उनसे मुलाकात भी की थी जिसके बाद रालोजपा के प्रवक्ता चंदन सिंह ने बयान जारी कर बताया कि उनकी पार्टी पहले भी एनडीए का हिस्सा थी, अभी भी है और आगे भी रहेगी। पशुपति पारस के एनडीए में रहने को लेकर भाजपा नेता नीरज कुमार बबलू और हरी सहनी ने भी बयान दिया और कहा कि पशुपति पारस एनडीए गठबंधन का ही हिस्सा हैं।
इस बीच विपक्षी पार्टी राजद ने तंज कसा और भाजपा पर दलितों के अपमान का आरोप लगाया जिसके बाद एक बार फिर चंदन सिंह ने बयान दिया है कि रालोजपा पहले भी एनडीए का हिस्सा थी, अभी है और आगे भी रहेगी। चंदन सिंह ने कहा कि भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष ने उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष के कार्यालय में आकर मुलाकात कर इस बात का साफ सन्देश दिया है कि पशुपति पारस और उनकी पार्टी एनडीए का ही हिस्सा है।
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पटना से विवेक रंजन की रिपोर्ट
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