रांची: झारखंड के मांडल विधानसभा क्षेत्र के सरवा पंचायत की मुखिया प्रभा किस्पोट्टा के निलंबन को लेकर प्रदेश में राजनीतिक उथल-पुथल मची हुई है। इस मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार बावरी के नेतृत्व में मुखिया संघ का एक प्रतिनिधि मंडल राज्यपाल से मिला और न्यायोचित कार्रवाई की मांग की।
नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार बावरी ने मीडिया से बातचीत में राज्य सरकार को आदिवासी विरोधी करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन की सरकार ने जानबूझकर एक आदिवासी महिला मुखिया को निलंबित कर दिया है। बावरी का कहना था कि मुखिया के खिलाफ कोई वित्तीय अनियमितता का आरोप नहीं है और न ही झारखंड में बिना कारण जनप्रतिनिधि को निलंबित करने का कोई प्रावधान है।
निलंबित मुखिया प्रभा किस्पोट्टा ने इस निलंबन को एक साजिश करार देते हुए कहा कि उन्हें झूठे आरोपों के तहत फंसाया गया है। उनका आरोप है कि मांडर विधायक शिल्पी नेहा तिर्की और पूर्व विधायक बंधु तिर्की ने सरकार पर दबाव बनाकर उन्हें निलंबित करवा दिया। प्रभा किस्पोट्टा ने कहा कि आदिवासी महिला मुखिया को इस तरह से निलंबित करना संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ है।
उन्होंने बताया कि जुलाई 2024 से उनके खिलाफ धरना-प्रदर्शन जारी है, लेकिन सरकार ने उनकी आवाज को अनसुना कर दिया। उनके खिलाफ कोई जांच या वित्तीय अनियमितता का आरोप नहीं है, फिर भी उन्हें निलंबित किया गया है। अब, राज्यपाल से निवेदन किया गया है कि इस मुद्दे पर हस्तक्षेप कर जल्द न्याय सुनिश्चित किया जाए और मुखिया के अधिकार की रक्षा की जाए।
मुखिया संघ और विपक्षी दलों ने इस पूरे मामले को एक गंभीर मुद्दा बताते हुए सरकार की कार्रवाई को गैरकानूनी और संविधान विरोधी करार दिया है। उनका कहना है कि झारखंड में ऐसे मामलों में स्पष्ट नियमावली का अभाव है, जिससे जनप्रतिनिधियों के अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब देखना होगा कि राज्यपाल इस मुद्दे पर क्या कदम उठाते हैं और क्या प्रदेश सरकार इस पर कोई उचित कार्रवाई करती है या नहीं।



















