बाबूलाल मरांडी बोले- ‘उत्पाद सिपाही दौड़ में हुई मौत के लिए हेमंत सरकार जिम्मेदार’, पीड़ितों के लिए की ये मांग

रांची. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने आज ओरमांझी के जिराबर गांव में उत्पाद सिपाही दौड़ में शामिल मृतक अजय कुमार के परिजनों से मुलाकात की। इस दौरान भाजपा ने पीड़ित परिवार को एक लाख रुपये की सहायता राशि दी। इस दौरान बाबूलाल मरांडी ने कहा कि राज्य सरकार पूरी तरह मौत के लिए जिम्मेदार है। उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि अविलंब मृतकों के आश्रित को 50 लाख रुपये मुआवजा एवं एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। इस दौरान प्रदेश महामंत्री एवं सांसद आदित्य साहू भी उपस्थित रहे।

पीड़ित परिवार से मिले बाबूलाल मरांडी

बाबूलाल मरांडी ने असामयिक मौत पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए परिजनों को ढांढस बंधाया और मृतक की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। उन्होंने परिजनों को प्रदेश भाजपा की ओर से एक लाख रुपये की सहायता राशि भी दी। साथ ही उन्होंने राज्य सरकार पर निशाना भी साधा।

उन्होंने कहा कि यह संवेदनहीन सरकार है। युवाओं की मौत हो रही और सरकार निश्चिंत है। परिजनों की सुध लेने की भी राज्य सरकार को फुर्सत नहीं है। उन्होंने कहा कि हेमंत सरकार ने उत्पाद सिपाही की दौड़ में जिस प्रकार से नियमों को उल्लंघन किया है, वह अभ्यर्थियों नवजवानों की मौत का कारण बन रहा है।

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि अभ्यर्थियों के स्वास्थ्य की कोई चिंता नहीं की गई। लंबी यात्रा करके नौजवान सेंटर पर पहुंचे। रात भर जगकर लाइन लगे और सुबह में धूप में उन्हें दौड़ाया गया। उन्होंने कहा कि इसका सीधा असर नवजवानों के स्वास्थ्य पर पड़ा। ऐसे में स्वाभाविक है कि नींद पूरी नहीं होने से ब्लड प्रेशर भी बढ़ता है। शरीर की कार्य क्षमता घटती है। फिर भी अभ्यर्थी दौड़ने को मजबूर हुए।

उन्होंने कहा कि जहां तक नियमावली की बात है तो 2018 की बहाली नियमावली में स्पष्ट प्रावधान है कि दौड़ के पहले अभ्यर्थियों की लिखित और शारीरिक जांच परीक्षा हो। जो इसमें सफल हों उन्हीं को दौड़ में शामिल किया जाए। लेकिन इस सरकार ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने कहा कि एक घंटा में 10 किलोमीटर की दौड़ उत्पाद विभाग के सिपाही के लिए अव्यवहारिक है। इतनी अनिवार्यता तो सेना की बहाली में भी नहीं है।

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि अजय कुमार महतो के इलाज में भी लापरवाही बरती गई। दौड़ में बेहोश हो जाने की स्थिति में परिजनों को सूचित किया गया। उनके पिताजी उनका इलाज प्राइवेट हॉस्पिटल में कराना चाहते थे, लेकिन उन्हें ऐसा नहीं करने दिया गया। उन्होंने कहा कि उल्टे उन्हें फूड पाइप के द्वारा नाक से रिम्स में भोजन दिया गया, जबकि वे बोल रहे थे और खाने और पीने में सक्षम थे। इस प्रकार इलाज में भी लापरवाही बरती गई।

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