रांची: जेएसएससी सीजीएल परीक्षा को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। एक ओर जहां जेएसएससी अभ्यर्थियों से लगातार साक्ष्य मांग रहा है, वहीं दूसरी ओर अब झारखंड हाई कोर्ट में इस परीक्षा को रद्द करने की मांग को लेकर जनहित याचिका दाखिल की गई है।
पिछले दिनों मुख्यमंत्री आवास पर कुछ छात्रों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का आभार जताया, लेकिन मीडिया से बातचीत में इन छात्रों ने स्पष्ट किया कि वे स्वयं परीक्षा में शामिल नहीं हुए थे, बल्कि उनके रिश्तेदारों ने इस परीक्षा में भाग लिया था। इस पर राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है।
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस मामले में ट्वीट कर झामुमो सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “झामुमो के कार्यकर्ता फर्जी छात्र बनकर जेएसएससी सीजीएल परीक्षा परिणाम जारी करने की मांग कर रहे हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि 7 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी है और वे सभी चाहते हैं कि पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच हो।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राजनीतिक आरोप लगाना आसान है। उन्होंने कहा कि “जो काम करते हैं, वही दिखता है,” और यह भी कहा कि उन्होंने जो काम किया है, उसका लाभ आम लोगों को मिलेगा।
जेएसएससी सीजीएल परीक्षा 22 और 23 सितंबर को हुई थी, और इसके दौरान इंटरनेट बंद कर दिया गया था। इसके बाद कई आरोप सामने आए कि प्रश्न पत्र के सील खुले थे और परीक्षा में पूछे गए प्रश्न पहले से ही लीक हो गए थे।
छात्रों के प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि उनके पास पुख्ता प्रमाण हैं जो साबित करते हैं कि परीक्षा में धोखाधड़ी हुई है। इनकी मांग है कि परीक्षा रद्द की जाए।
अब झारखंड हाई कोर्ट में दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई होगी, जहां प्रकाश कुमार नाम के व्यक्ति ने यह याचिका दायर की है। उन्होंने दावा किया है कि उनके पास ठोस साक्ष्य हैं, जो पेपर लीक की पुष्टि करते हैं।
यह मामला अब राजनीतिक रूप से भी गर्मा गया है और चुनावों से पहले यह विषय प्रमुख बन गया है। छात्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिलकर अपनी समस्याएं रखी हैं, जिससे यह साफ होता है कि जेएसएससी सीजीएल परीक्षा का मामला आने वाले दिनों में और भी जटिल हो सकता है।


