पटना : लगातार हो रही शराब से मौतों के बाद मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में पटना में शराबबंदी पर मैराथन समीक्षा बैठक हुई. करीब सात घंटे चली मैराथन बैठक में सीएम ने एक-एक बिंदू पर समीक्षा की. बैठक में सभी मंत्री से लेकर अधिकारी और जिलों से डीएम-एसपी जुड़े थे. थानेदार पर ही पूरी जिम्मेदारी थोप दी गई. जिनके क्षेत्र में शराब बरामद हुआ तो उनकी थानेदारी तो जायेगी ही, सीधी भूमिका होने पर 10 सालों तक थानेदारी से वंचित होना पड़ेगा. हालांकि डीजीपी ने कहा कि सिर्फ थानेदार ही नहीं बल्कि ऊपर के अधिकारियों पर भी शो-कॉज होगा.
इस बैठक में दूसरे राज्यों से जो शराब आ रही है उसे कैसे रोका जाये उसपर चर्चा हुई. शहरो में होम डिलीवरी हो रही है उसे कैसा रोका जाए. सभी प्रभारी मंत्री अपने जिलों में अन्य योजनाओं के साथ शराब बंदी को लेकर भी समीक्षा करेंगे. जो भी कानून पूर्व से चल रहे है और शक्ति से साथ उनका पालन करवाया जाएगा ।
डीजीपी एस के सिंघल ने कहा कि इंटेलिजेंस टीम को मजबूत किया जा रहा है. अगर कही से शराब बेचे जाने की सूचना मिलती है तो थाना प्रभारी पर करवाई की जाएगी उन्हें शो कॉज नोटिस किया जाएगा. यदि किसी के खिलाफ कंप्लेन आती है तो SHO को 10 साल के लिए SHO का पद नही मिलेगा साथ ही विभागीय करवाई भी की जाएगी.
डीजीपी ने कहा कि जहां से भी सूचना मिलती है पुलिस वहां जरूर पहुंचती है. जहां संख्या कम है वहां थोड़ा समय जरूर लगता है. वहीं उन्होंने कहा कि शराबबंदी कानून के तहत कई लोगों को गिरफ्तार किया जाता है उनमें से कई ऐसे लोग हैं जो छूटने के बाद फिर शराब बेचने का काम करते हैं ये प्रशासन के लिए काफी बड़ी चुनौती है.
रिपोर्ट : शक्ति

















