खरना आज, 36 घंटे का निर्जला उपवास करेंगे छठव्रती

नवादा : नवादा छठ पूजा के दूसरे दिन आज बुधवार को खरना की परंपरा निभाई जा रही है। आज छठ पूजा के दूसरे दिन खरना के प्रसाद बनाने के लिए छठव्रती कुआं और नदी से जल लाकर करना का प्रसाद बनाते हैं, उसके बाद ग्रहण करते है। नवादा शहर के सूरज घाट मंदिर के पास नदी से बड़ी संख्या में लोग खरना का प्रसाद बनाने के लिए जल भर रहे हैं। बता दें कि इस दिन व्रती मीठा भोजन कर व्रत की शुरुआत करते हैं। इसके बाद 36 घंटे तक अन्न-जल ग्रहण नहीं किया जाता।

दरअसल, छठ का महापर्व पांच नवंबर को नहाय खाय परंपरा के साथ शुरू हो गया है। सूर्य देव की उपासना के लिए छठ बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। छठ महापर्व का दूसरा दिन खरना के नाम से जाना जाता है। खर यानी शुद्ध अर्थात इस दिन पुनः शुद्धि और पवित्रता पर जोर दिया गया है। खरना का प्रसाद ग्रहण करने के बाद ये व्रत शुरू हो जाता है। छठ पूजा के दूसरे दिन छह नवंबर 2024 को खरना किया जाएगा। कार्तिक माह की पंचमी तिथि का दिन खरना कहलाता है। इसे लोहंडा के नाम से भी जाना जाता है। खरना के दिन महिलाएं शाम को मीठा भोजन कर व्रत शुरू करती हैं।

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आपको बता दें कि खरना के दिन शाम में मिट्टी के चूल्हे और आम की लकड़ी पर खाना बनाते हैं। इसके बाद केले के पत्ते पर खाना खाने का रिवाज है। खाने में रोटी और गुड़ की बनी खीर के साथ ही केला खाने का भी विधान है। खरना की खीर ऐसे समय बनती है जब आस पास किसी प्रकार का शोर न हो। व्रती प्रसाद ऐसे समय में खाने के लिए बैठती है जब आस पास कोई न हो औक कोई शोर-शराबा भी न हो। इसके बाद अगले 36 घंटे उसे न कुछ खाना है और न ही पीना है। व्रती के प्रसाद ग्रहण करने तो ही खरना कहता है।

खरना संपन्न, कल पड़ेगी अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य

लोक आस्था के महापर्व छठ के दूसरे दिन व्रतियों ने पूरे विधि-विधान के साथ पूजा अर्चना कर खरना किया। छठ महापर्व को लेकर व्रतियों ने बुधवार की शाम भगवान भास्कर की पूजा-अर्चना करके खरना संपन्न किया। सूर्य भगवान को दूध और गुड़ से निर्मित खीर और घी में बनी रोटी व चने दाल का भोग लगाकर खरना व्रतियों ने किया। खरना का प्रसाद व्रतियों ने खुद भी ग्रहण किया और परिजनों व पड़ोसियों के बीच वितरित भी किया। खरना को लेकर सुबह से ही लोग इसकी तैयारी में जुटे रहे। दूध के खटालों में अन्य दिनों की तुलना में लोगों की अधिक भीड़ देखी गई। वहीं अरवा चावल के लिए विभिन्न मिलों में लोग काफी संख्या में धान कुटवाने के लिए जमा थे।

खरना के साथ ही श्रद्धालुओं ने 36 घंटे के निर्जला-निराहार व्रत का संकल्प लिया। व्रती पहला अर्घ्य गुरुवार की शाम अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को प्रदान करेंगे। शुक्रवार की सुबह उगते सूरज को अर्घ्य प्रदान करने के साथ छठ महापर्व का चार दिवसीय अनुष्ठान संपन्न होगा। इस दौरान श्रद्धालु आरोग्य की कामना, संतान के कल्याण व सौभाग्य के लिए छठ व्रत करते हैं। सूर्योपासना के इस महापर्व को लेकर हर तरफ स्वच्छता और शुद्धता का ध्यान रखा जा रहा है। छठ महापर्व करने वााले सारे श्रद्धालु भगवान भास्कर की आराधना में लीन हैं।

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खरना संपन्न, कल पड़ेगी अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य

इधर, छठ के पहले अर्घ्य के लिए बाजार में फलों की खरीदारी के लिए काफी भीड़ देखी गई। शहर के मुख्य चौक बजरंगबली चौक से पुरानी बस स्टैंड तक सड़क के दोनों ओर फलों एवं पूजन सामग्री की कई अस्थाई दुकानें सजी थी। फल विक्रेता अपने-अपने स्टॉलों में फलों छठ पर्व में उपयोग की जानेवाली सामग्री बेच रहे हैं। भगवान भास्कर को आज अर्घ्य को लेकर धनार्जय नदी छठ घाटों पर साफ-सफाई कर पूरी व्यवस्था कर ली गई है। छठ को लेकर व्रतियों के आने-जाने वाले सड़कों पर लाइट की व्यवस्था की गई है।

व्रतधारियों की सहुलियत के लिए सुमित कुमार, बब्लू पंडित, श्रवण कुमार, रौशन कुमार, अमन सिंह, सुमित सिंह, संदीप वर्मा, राजा सिंह एवं अन्य समाजसेवियों की ओर से छठ घाटों पर विशेष व्यवस्था के अलावा शहर के प्रमुख मार्गों के सड़कों की सफाई के अलावा पानी का छिड़काव कराया गया है। ताकि व्रतधारियों को किसी प्रकार के असुविधा का सामना नहीं करना पड़े।

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अनिल कुमार की रिपोर्ट

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