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NDA vs INDIA: दांव पर प्रतिष्ठा, जनता किसे पसंद करेगी? पढ़ें…

NDA vs INDIA

पटना: बिहार विधानसभा 2025 के चुनाव के ठीक पहले चार सीटों पर विधानसभा के उप चुनाव होने जा रहा है। उप चुनाव लेकर चुनाव प्रचार का शोर सोमवार को शांत हो गया और अब जनता चार सीटों पर होने वाले उप चुनाव को लेकर उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला कल 13 नवंबर को अपने मत का प्रयोग करते हुए करेगी। उप चुनाव का परिणाम 23 नवंबर को आने वाला है। यह चुनाव एनडीए और इंडिया गठबंधन के लिए चुनौती से कम नहीं है। दोनों गठबंधन ने इसे उप चुनाव से पहले सेमीफाइनल के तौर पर लिया है।

एक तरफ जहां राजद को अपनी तीन सीटें बचाने की चुनौती है तो दूसरी तरफ एनडीए के सामने अपने विकास के एजेंडे पर विजय की उम्मीद है। इस बीच बिहार की राजनीति में नई एंट्री करने वाली पार्टी जन सुराज इस मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने में जुटी हुई है। उप चुनाव को लेकर दोनों ही गठबंधन के नेताओं ने अपने उम्मीदवारों के पक्ष में ताबड़तोड़ प्रचार किया है।

एनडीए के पक्ष में जहां बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, दोनों उप मुख्यमंत्री समेत सभी पांच घटक दलों के नेताओं ने जमकर अपनी ताकत झोंक कर प्रचार प्रसार किया है तो वहीं दूसरी तरफ इंडिया गठबंधन के उम्मीदवारों के पक्ष में राजद के संस्थापक और राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव सहित बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने भी जमकर पसीना बहाया है। चार सीटों पर हो रहे उपचुनाव में कुल 38 उम्मीदवार मैदान में हैं। इन सब के बावजूद सीधा मुकाबला एनडीए और इंडिया गठबंधन के बीच है।

इन चार सीटों पर बिहार की राजनीति में पहली बार कदम रख नई पार्टी की शुरुआत के साथ ही प्रशांत किशोर ने भी इस मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ा है। यह अलग बात है कि पार्टी बनाने और चुनाव में कूदने के बाद प्रशांत किशोर को सीटों पर अपने उम्मीदवार बदलने पड़े। 2020 में हुए बिहार विधानसभा में इन चार सीटों में से तीन सीट महागठबंधन के खाते में गई थी जबकि गया का एकमात्र सीट एनडीए गठबंधन के पास थी, जहां से जीतन राम मांझी जीते थे। ऐसे में यह उपचुनाव तेजस्वी यादव के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन चुका है।

एनडीए गठबंधन के लिए कहने को तो सिर्फ एक सीट बचाने की जद्दोजहद है जबकि इंडिया गठबंधन के पास तीन सीटें बचाने की चुनौती है। इस बीच राजनीति में अपना पहला चुनावी दंभ भर रहे प्रशांत किशोर के सामने अपनी साख बचाना एनडीए और इंडिया गठबंधन से अधिक चुनौती है।

तरारी:- अगर भोजपुर के तरारी विधानसभा सीट की बात करें तो यहां मुकाबला भाजपा से बाहुबली और 4 बार विधायक रह चुके सुनील पांडेय के बेटे विशाल प्रशांत उर्फ सुशील पांडेय का मुकाबला सीपीआईएमएल के कैंडिडेट राजू यादव से है। हालांकि प्रशांत किशोर ने इस सीट पर अपने कैंडिडेट के रूप में किरण सिंह को उतारते हुए इस मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश की है।

बेलागंज :- दूसरी सीट की बात की जाए तो वह बेलागंज है। जहां एनडीए की तरफ से जदयू की उम्मीदवार मनोरमा देवी का मुकाबला राजद के उम्मीदवार विश्वनाथ कुमार सिंह से है। विश्वनाथ कुमार सिंह राजद सांसद सुरेंद्र यादव के बेटे हैं जो 2020 में बिहार विधानसभा के चुनाव में जीत हासिल कर राजद का परचम लहराया था। वहीं जन सुराज ने मोहम्मद अमजद को अपना उम्मीदवार बनाया है। इसके बाद से यहां भी मुकाबला त्रिकोणीय होने की उम्मीद जताई जा रही है।

रामगढ़ :- तीसरी सीट की बात करें तो वह है कैमूर जिले का रामगढ़ विधानसभा। रामगढ विधानसभा में मुकाबला एनडीए की तरफ से भाजपा के प्रत्याशी अशोक कुमार सिंह और इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार अजीत कुमार सिंह के बीच है। बता दे कि अशोक कुमार सिंह 2015 में बीजेपी के विधायक रहे हैं तो वही अजीत कुमार सिंह राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह के छोटे बेटे और राजद सांसद सुधाकर सिंह के भाई हैं। यहां से जन सुराज ने भी अपने उम्मीदवार के रूप में सुनील सिंह कुशवाहा को मैदान में उतारा है।

इमामगंज:- चौथी सीट इमामगंज विधानसभा क्षेत्र से हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के संस्थापक जीतन राम मांझी ने 2020 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी। लोकसभा चुनाव में जीतन राम मांझी के सांसद बन जाने के बाद यह सीट खाली हुई थी और एक बार फिर से एनडीए ने यह सीट हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा को दी है। इस सीट पर सीधा मुकाबला बिहार सरकार में मंत्री संतोष सुमन की पत्नी और केंद्र सरकार में केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की बहू दीपा मांझी और इंडिया गठबंधन से राजद उम्मीदवार रौशन कुमार मांझी से है। जन सुराज ने भी इस सीट पर डॉ जितेंद्र पासवान को खड़ा करके नया दांव खेला है।

परिवर्तन की राजनीति के समर्थन में है जनता

बिहार विधानसभा की यह चारों सीट बिहार के राजनीतिक दलों के लिए यह नाक की लड़ाई बन चुकी है। लोकसभा चुनाव के नतीजे से राजद ज्यादा उत्साहित नजर आ रही है। केंद्र और बिहार में बैठी एनडीए की सरकार के विरोध के लहर का दावा राजद कर रही है। लालू प्रसाद यादव खुद इस बार इंडिया गठबंधन की कमान अपने हाथों में लेकर उप चुनाव की नैया पार लगाने की कोशिश के साथ-साथ तेजस्वी यादव के चेहरे को चमकाने की कोशिश कर रहे हैं।

राजद प्रदेश प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि महागठबंधन चारों विधानसभा उपचुनाव में जीत दर्ज करने जा रही है। बिहार की जनता का विश्वास और समर्थन लालू प्रसाद यादव के विचार और तेजस्वी यादव के कार्यों के प्रति बढ़ा है। हर वर्ग के लोग महागठबंधन के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं। एजाज ने आगे कहा कि बिहार में एनडीए सरकार ने जनता के हितों के लिए कोई कार्य नहीं किया है और बिहार में अपराध और अपराधियों का बोलबाला है।

बिहार में सरकार नाम की कोई चीज नहीं है सरकार का इकबाल पुरी तरह से समाप्त हो गया है, इसी कारण लोग परिवर्तनकारी राजनीति में तेजस्वी जी के साथ खड़े हैं। जो स्पष्ट रूप से दिख रहा और आने वाले समय में बिहार की राजनीति में जो जनता का विश्वास और समर्थन तेजस्वी जी को मिल रहा है यह बिहार में परिवर्तनकारी राजनीति को नया आयाम देगा।

उपचुनाव से होगी राजद के हार की शुरुआत

वहीं एनडीए नीतीश कुमार के काम के दम पर चुनावी मैदान में ताल ठोक रहा है। एनडीए की तरफ से बार-बार कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार ने इतना काम किया है कि कुछ बताने की जरूरत ही नहीं है सभी लोगों को सभी चीजें साफ और स्पष्ट तौर पर दिख रही है। डबल इंजन की सरकार में लोगों को विश्वास भी है और विकास का दावा भी है।

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता कुंतल कृष्ण ने कहा कि उपचुनाव में चारों सीट भाजपा और एनडीए के उम्मीदवार जीत रहे हैं। राजद एक डूबता जहाज है, और इस उपचुनाव से राजद के हार की शुरुआत हो जाएगी। 2025 तक राष्ट्रीय जनता दल का राजनीतिक अस्तित्व खत्म हो जाएगा। उपचुनाव के नतीजे में हम तीन सीट राजद और उनके साथियों से छीन रहे हैं।

एनडीए ने पेश की मिशाल तो राजद पिछड़े को पीट रही

वहीं जदयू एमएलसी नीरज कुमार ने भी भाजपा के सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि यह उपचुनाव महागठबंधन और राजद के लिए जख्म साबित होगा। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक तरफ बिहार के सामाजिक सौहार्द के लिए मिसाल कायम किया है तो इसके ठीक विपरीत बेलागंज में सुरेंद्र यादव के बेटे की उपस्थिति में राजद के कार्यकर्ताओं ने एक युवक की पिटाई महज विरोध करने पर कर दी।

इतना ही नहीं, रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र में सुधाकर सिंह के भाई लड़ रहे हैं वहां 300 बुथों पर लाठी से पीटने की बात सुधाकर सिंह ने की है जो सीधे तौर पर अति पिछड़ा, दलित समुदाय के लोगों को दबाने की कोशिश है। वहीं राजद के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव रोशन मांझी के चुनाव प्रचार में नहीं जाते हैं जबकि दूसरी जगह पर चुनाव प्रचार में जाते हैं। जिसे जनता समझ चुकी है और इस बार भी एनडीए को ही अपना बेसकीमती वोट देगी।

जन सुराज भी पीछे नहीं

भाजपा राजद और जदयू जब आपस में लड़ रहे हो तो तीसरी पार्टी के रूप में राजनीति में प्रवेश कर चुकी जन सुराज भला पीछे क्यों रहे। जन सुराज के प्रवक्ता सदफ़ इक़बाल ने कहा कि 13 नवंबर को 4 सीटों पर उपचुनाव होने जा रहा है और हमारी पार्टी इन चारों जगह पर बहुत ही मजबूती के साथ खड़ी है। हमने बहुत ही मेहनत के साथ बहुत ही ईमानदारी के साथ यह लड़ाई लड़ी है। और इस जंग को हम चारों जगह से जीत रहे हैं। इस उपचुनाव में सभी पार्टियों को हराकर हम उन्हें धूल चटाएंगे।

किसने किया कितना प्रचार

बिहार विधानसभा उप चुनाव को लेकर सभी पार्टियों ने ताबड़तोड़ चुनाव प्रचार किया है। उप चुनाव के दौरान प्रशांत किशोर ने सबसे अधिक 125 जनसभाएं की तो सबसे अधिक रोड शो भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने की। उप चुनाव के दौरान एनडीए से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चार सभाएं की जबकि राजद सुप्रीमो लालू यादव ने एक।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने 14 जनसभाएं की तो जदयू के प्रदेश अध्यक्ष ने 20, इसके साथ ही उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी 12 जनसभाएं की, जबकि केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने दो और जीतनराम मांझी ने 11 जनसभाएं की। दीपांकर भट्टाचार्य ने 10 सभाएं और रोड शो किया तो बिहार विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने 5 सभा और दो रोड शो किया।

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पटना से महीप राज की रिपोर्ट
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