Bihar Solar Subsidy 2026: बिहार में घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार ने अतिरिक्त वित्तीय सहायता देने की घोषणा की है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत केंद्र सरकार से मिलने वाली सहायता के अतिरिक्त अब बिहार सरकार भी लाभार्थियों को आर्थिक मदद देगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को पटना स्थित ऊर्जा ऑडिटोरियम में मुख्यमंत्री सोलर प्रोत्साहन योजना का शुभारंभ किया। इस योजना का उद्देश्य राज्य में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना, आम लोगों के बिजली खर्च को कम करना और पारंपरिक बिजली स्रोतों पर निर्भरता घटाना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सौर ऊर्जा को अपनाने से उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी और सरकार पर बिजली सब्सिडी का बोझ भी कम हो सकता है।
1 से 3 किलोवाट सोलर प्लांट पर मिलेगी अतिरिक्त सहायता
मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत केंद्र सरकार की सहायता के साथ बिहार सरकार भी लाभार्थियों को अतिरिक्त राशि देगी। अलग-अलग क्षमता के सोलर प्लांट पर राज्य की सहायता इस प्रकार होगी:
| सोलर प्लांट की क्षमता | केंद्र की सहायता | बिहार सरकार की अतिरिक्त सहायता |
|---|---|---|
| 1 किलोवाट | 30 हजार रुपये | 10 हजार रुपये |
| 2 किलोवाट | 60 हजार रुपये | 20 हजार रुपये |
| 3 किलोवाट | 78 हजार रुपये | 20 हजार रुपये |
इस तरह 1 किलोवाट का सोलर प्लांट लगाने वाले लाभार्थी को केंद्र और राज्य सरकार दोनों से आर्थिक सहायता मिल सकेगी। वहीं 2 और 3 किलोवाट क्षमता वाले संयंत्रों पर भी राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त राशि उपलब्ध कराई जाएगी।
सौर ऊर्जा से कम हो सकता है बिजली बिल और सब्सिडी का बोझ
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में वर्तमान में करीब 2.22 करोड़ बिजली कनेक्शन हैं। इनमें लगभग 1.94 करोड़ घरेलू उपभोक्ता हैं। उन्होंने बताया कि करीब 1.60 करोड़ परिवारों का पिछले एक वर्ष से बिजली बिल शून्य आ रहा है।मुख्यमंत्री के अनुसार, बिहार सरकार बिजली सब्सिडी पर लगभग 23 हजार करोड़ रुपये खर्च कर रही है। अकेले कृषि क्षेत्र में बिजली सब्सिडी के रूप में करीब 5 हजार करोड़ रुपये खर्च होते हैं। कृषि फीडरों को सौर ऊर्जा से जोड़कर इस खर्च में कमी लाई जा सकती है। उन्होंने ऊर्जा विभाग को कृषि फीडरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया। लक्ष्य है कि अगले दो वर्षों में कृषि फीडरों को 100 प्रतिशत सौर ऊर्जा से संचालित करने की दिशा में काम किया जाए।
किसानों को दिन में सौर ऊर्जा से बिजली देने की योजना
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की योजना किसानों को सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक सौर ऊर्जा से उत्पादित बिजली उपलब्ध कराने की है। इससे किसानों को दिन के समय पर्याप्त बिजली मिल सकती है और सिंचाई से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने में सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि कृषि फीडरों के सोलराइजेशन से सरकार को बिजली सब्सिडी के मद में लगभग 5 हजार करोड़ रुपये तक की संभावित बचत हो सकती है। इस दिशा में ऊर्जा विभाग को चरणबद्ध तरीके से काम करने को कहा गया है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि केवल बिजली उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए ट्रांसमिशन, वितरण, ग्रिड, तार और अन्य आधारभूत संरचनाओं को भी मजबूत करना जरूरी है।

अगले पांच वर्षों में 20 हजार मेगावाट इंफ्रास्ट्रक्चर का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने बताया कि बिहार में बिजली की खपत पहले करीब 350 मेगावाट थी, जो अब बढ़कर लगभग 10 हजार मेगावाट हो गई है। उद्योगों और अन्य क्षेत्रों की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए अगले पांच वर्षों में 20 हजार मेगावाट बिजली का इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि राज्य में सौर ऊर्जा, बैटरी स्टोरेज, पंप स्टोरेज और अन्य हरित ऊर्जा क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा। शाम के समय महंगी बिजली खरीदने की आवश्यकता को देखते हुए ऊर्जा भंडारण की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि ग्रीन हाइड्रोजन के लिए भी जल्द नीति लाने की दिशा में काम किया जा रहा है। इससे बिहार में करीब 16 हजार करोड़ रुपये के निवेश की संभावना जताई गई है।

बेहतर प्रदर्शन करने वाले स्थानीय निकायों को भी प्रोत्साहन
सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने में बेहतर प्रदर्शन करने वाले स्थानीय निकायों के लिए भी मुख्यमंत्री ने प्रोत्साहन राशि की घोषणा की। इसके तहत बेहतर प्रदर्शन करने वाली पंचायत को 1 लाख रुपये, नगर निगम को 1 लाख रुपये, नगर परिषद को 75 हजार रुपये और नगर पंचायत को 50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने बिजली विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से गांव-गांव जाकर लोगों को सौर ऊर्जा के फायदे और सरकारी सहायता की जानकारी देने की अपील की। उन्होंने सक्षम परिवारों से अपने घरों पर सोलर प्लांट लगाने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने स्वयं अपने घर पर 13 किलोवाट का सोलर प्लांट लगाया है। मुख्यमंत्री आवास में पहले से स्थापित 190 किलोवाट के सोलर प्लांट का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वहां बिजली का बिल शून्य आता है।
25 हजार लाभार्थियों को अतिरिक्त सहायता का हस्तांतरण
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत 25 हजार लाभार्थियों को राज्य सरकार की अतिरिक्त वित्तीय सहायता हस्तांतरित की गई। साथ ही योजना के प्रचार-प्रसार और जनजागरूकता अभियान के लिए नौ सोलर रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। कार्यक्रम में बिजली वितरण कंपनियों और जीविका के बीच समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर हुआ। इसके माध्यम से जीविका दीदियों के सहयोग से राज्य में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने की योजना है। मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुपौल, नालंदा और मुंगेर के लाभार्थियों से बातचीत की और सौर ऊर्जा अपनाने के लिए उन्हें बधाई दी। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, उपमुख्यमंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल सहित विभागीय अधिकारी, लाभार्थी और आमजन मौजूद रहे।




















