Bihar SLBC Meeting, पटना: राज्यस्तरीय बैंकर्स समिति यानी एसएलबीसी की 98वीं बैठक मंगलवार को पटना स्थित होटल मौर्या में आयोजित की गई। बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही तक वार्षिक साख योजना यानी एसीपी के तहत हुई प्रगति की समीक्षा की गई। इस दौरान कृषि ऋण, जीविका स्वयं सहायता समूहों, डिजिटल भुगतान और वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया। बैठक की अध्यक्षता उपमुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने की। ग्रामीण विकास एवं सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के मंत्री श्रवण कुमार और कृषि विभाग के मंत्री विजय कुमार सिन्हा भी बैठक में उपस्थित रहे।
वार्षिक साख योजना की उपलब्धियों की समीक्षा
बैठक की शुरुआत एसएलबीसी की 96वीं और 97वीं संयुक्त त्रैमासिक बैठकों के कार्यवृत्त के अंगीकरण से हुई। पिछली बैठकों में तय किए गए कार्य बिंदुओं पर हुई प्रगति की भी समीक्षा की गई। इसके साथ ही वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही तक वार्षिक साख योजना के तहत विभिन्न क्षेत्रों में ऋण वितरण और वित्तपोषण की स्थिति पर चर्चा हुई। प्राथमिक क्षेत्र को दिए जाने वाले ऋण, सरकारी प्रायोजित योजनाओं और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए बैंकिंग सहायता का जायजा लिया गया। बैठक में पीएमईजीपी, पीएमएफएमई, मुद्रा योजना, पीएम-स्वनिधि, पीएम-विश्वकर्मा और पीएम सूर्य घर बिजली योजना के तहत वित्तपोषण की स्थिति पर भी विचार किया गया।
कृषि, पशुपालन और जीविका समूहों पर विशेष ध्यान
कृषि क्षेत्र के लिए किसान क्रेडिट कार्ड यानी केसीसी फसल ऋण, डिजिटल केसीसी और कृषि अवसंरचना कोष के तहत वित्तपोषण की समीक्षा की गई। पशुपालन और मत्स्य पालन के लिए केसीसी ऋण को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। जीविका से जुड़ी स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के बैंक लिंकेज और व्यक्तिगत वित्तपोषण की प्रगति पर विशेष चर्चा हुई। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को बैंकिंग सुविधाओं और ऋण योजनाओं का लाभ आसानी से मिलना चाहिए। एमएसएमई क्षेत्र को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने और छोटे कारोबारियों तक बैंकिंग सेवाओं की पहुंच बढ़ाने को भी महत्वपूर्ण विषय के रूप में लिया गया।

महिला बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट्स की भागीदारी बढ़ाने पर चर्चा
बैठक में महिला बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट्स यानी बैंकिंग प्रतिनिधियों की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष चर्चा की गई। अधिकारियों ने बैंकिंग सेवाओं को ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचाने में बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट्स की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। इस दौरान बीसी के सामने आने वाली कामकाजी चुनौतियों की पहचान कर उनके समाधान पर भी विचार-विमर्श किया गया। बिना बैंकिंग सुविधा वाले राजस्व केंद्रों में नए बैंकिंग आउटलेट खोलने और जिलों के साख-जमा अनुपात यानी सीडी रेशियो में सुधार के उपायों पर भी चर्चा हुई। बैठक में ऋण ग्राह्यता क्षमता बढ़ाने तथा बैंकिंग सेवाओं को अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए आवश्यक कदम उठाने पर जोर दिया गया।
डिजिटल भुगतान और वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा
राज्य में डिजिटल भुगतान का बुनियादी ढांचा मजबूत करने के लिए पीओएस मशीनों और बेहतर कनेक्टिविटी के विस्तार पर बल दिया गया। इसके अलावा वित्तीय साक्षरता केंद्रों और स्कूली पाठ्यक्रम के माध्यम से डिजिटल वित्तीय जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता बताई गई। पीएम जनधन योजना के तहत पुनः केवाईसी, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और अटल पेंशन योजना की भी समीक्षा की गई। ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के वित्तीय समावेशन, स्टार्टअप के लिए क्रेडिट गारंटी और अनक्लेम्ड एसेट्स के त्वरित निपटान से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई।
ऋण वसूली और बैंकिंग शिकायतों के समाधान पर जोर
बैठक में एनपीए, नीलाम-पत्र वादों और सरफेसी अधिनियम से जुड़े मामलों के त्वरित निष्पादन पर विचार किया गया। ऋण वसूली के दौरान सामने आने वाली समस्याओं के समाधान पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री सचिवालय के ई-कंप्लायंस डैशबोर्ड, सहयोग पोर्टल यानी आरटीएमएस और सीपी ग्राम्स पोर्टल से प्राप्त बैंकिंग शिकायतों के अनुपालन की समीक्षा की गई। अधिकारियों को शिकायतों के समयबद्ध निपटारे और बिहार सीएसआर पोर्टल पर नोडल अधिकारियों के पंजीकरण तथा गतिविधियों को अपलोड करने के निर्देश दिए गए। बैठक के अंत में कौशल विकास, व्यापार एवं निर्यात प्रोत्साहन तथा प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में ऋण पुनर्गठन जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। बैठक में विकास आयुक्त, वित्त एवं कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, सहकारिता विभाग, डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग तथा जीविका के प्रतिनिधि मौजूद रहे।



















