DM ने कहा- बिहार स्टेट सुन्नी वक्फ बोर्ड ने अपने पत्र में लिखा है कि यह संपत्ति बोर्ड की नहीं

दरभंगा : वक्फ एक्ट में संशोधन के लिए जब मोदी सरकार बिल लेकर आई तो देश में वक्फ बोर्ड की संपत्ति को लेकर नई बहस छिड़ गई। अभी यह बिल संयुक्त संसदीय समिति के पास है और इसपर विचार-विमर्श किया जा रहा है। इसी बीच दरभंगा में वक्फ की संपत्ति का हवाला देकर दो पक्ष आमने सामने हो गए है। एक पक्ष का कहना है कि हनुमाननगर प्रखंड के तालपुपरी मौजे के 15 एकड़ जमीन वक्फ बोर्ड का है। जबकि दूसरे पक्ष का कहना है कि यह हमारी पैतृक संपत्ति है और खतियान हमारे परदादा स्वर्गीय इलाही बक्स खान के नाम से है।

इस पूरे मामले पर जिलाधिकारी राजीव रौशन ने वक्फ की जमीन के संदर्भ में कहा कि ऑफिशियल कागजात का अवलोकन किया गया है। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के द्वारा इस संदर्भ में निर्देशित है कि जो भी वक्फ बोर्ड की संपत्ति है, उसका हस्तांतरण अवैध है। साथ ही जो संपत्ति का ब्योरा वफ बोर्ड ने वेबसाइट पर डाला है। कार्यालय के द्वारा बताया गया कि प्रश्नगत भूमि है वह वेबसाइट पर दर्ज नहीं है। इसके अलावा बिहार का जो वक्फ बोर्ड है उसके अध्यक्ष के द्वारा एक आदेश पारित किया गया है कि जो प्रश्नगत भूमि है वह वक्फ बोर्ड की जमीन के रूप में रजिस्टर्ड नहीं है। इस बारे में परिवादी के द्वारा वक्फ बोर्ड के लोगों से भी संपर्क किया गया है। उनके द्वारा बताया गया कि इस बारे में वक्फ बोर्ड कोई संशोधित आदेश पारित करने वाले हैं। अगर संशोधित आदेश कोई आता है तो उस आलोक में कार्रवाई की जाएगी।

वहीं एक पक्ष मोहमद रिजवान ने कहा कि हमारे पूर्वज मोहमद हासिम खान, मोहमद इब्राहिम और उनकी तीन बहन ने हमारी दादी जैतून निशा को 1948 में रजिस्ट्री कर दिया। हमारी दादी जैतून निशा ने 1950 ईसवी में हमारे पिता कमरुल हौदा को कबाला कर दिया। जिसका 1955 में दरभंगा कोर्ट से हमलोगों को डिग्री प्राप्त है। हमारे पिता कमरुल हौदा को चार संतान हुए। जिसमे हमलोग दो बहन और दो भाई मोहम्मद जावेद व मोहमद रिजवान है।

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हमारे चाचा व अन्य लोग संयंत्र रचकर हमारी जमीन को वफ बोर्ड का हवाला देकर हड़पना चाहते हैं। जबकि जिला अल्पसंख्यक कल्याण, अंचल तथा जिलाधिकारी के यहां से किसी प्रकार का रुकावट नहीं है। साथ ही बिहार स्टेट सुन्नी वफ बोर्ड पटना ने अपने पत्र में थाना नम्बर 265, खेसरा नंबर 82 नया, खेसरा नंबर 147, 164, 166 और 141 को स्पष्ट तौर पर लाख है कि यह संपति बिहार स्टेट सुन्नी वफ बोर्ड का नही है। वहीं उन्होंने कहा कि इतने आदेश होने के बावजूद हमारी रजिस्ट्री पर रोक लगा दिया गया है। तथा इसी खेसरा में हमारे रिश्तेदार लोग आठ विघा जमीन को बिक्री कर रखा है।

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वरुण ठाकुर की रिपोर्ट

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