पटना: बीपीएससी की 70वीं संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा रद्द करने की याचिका पर गुरुवार को पटना हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। याचिका पर जस्टिस अरविंद सिंह चंदेल ने दोनों पक्षों की बात सुनी और अगली सुनवाई के लिए 31 जनवरी की तारीख तय की। उन्होंने बीपीएससी के वकील को सभी आरोपों का जवाब 30 जनवरी तक दाखिल करने का निर्देश भी दिया है। हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार बीपीएससी के खिलाफ पेटीशन दायर करने वाले पक्ष के वकील ने हाई कोर्ट में कहा कि बीपीएससी की परीक्षा में कई तरह की अनियमितताएं देखी गई।
साथ ही पेटीशन दायर करने वाले ने कहा है कि परीक्षा का पेपर लीक हुआ, कई परीक्षार्थियों को प्रश्न पत्र नहीं दिया गया। 13 दिसंबर को आयोजित परीक्षा के दिन 1 बज कर 6 मिनट पर परीक्षा का प्रश्न पत्र सोशल मीडिया X पर पोस्ट किया गया। इसके साथ ही बीपीएससी के पास इतने बड़े पैमाने पर परीक्षा आयोजित करने के लिए प्रयाप्त साधन नहीं है। इसके साथ ही कई सेंटर पर जैमर भी नहीं चल रहा था।
हाई कोर्ट में बिहार सरकार के अधिवक्ता जनरल पी के शाही ने आरोपों का खंडन किया और कहा कि बीपीएससी के विरुद्ध पेटीशन दायर करने वालों में से एक मात्र छात्र हैं जो कि 13 दिसंबर और 4 जनवरी दोनों ही परीक्षाओं में शामिल हुए थे, जबकि अन्य कोई भी परीक्षार्थी नहीं हैं।
इसके साथ ही उन्होंने प्रश्न पत्र लीक होने के आरोप के जवाब में कहा कि बापू परीक्षा केंद्र के सीसीटीवी फूटेज में साफ देखा जा रहा है कि 13 दिसंबर को आयोजित परीक्षा में 1 बज कर 5 मिनट पर एक छात्र प्रश्न पत्र हाथ में लेकर बाहर निकल आया था और 1 बज कर 6 मिनट पर प्रश्न पत्र सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया गया। इसलिए प्रश्नपत्र लीक होने का आरोप निराधार है।
हाई कोर्ट के जस्टिस अरविंद सिंह चंदेल ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पेटीशन दायर करने वाले पक्ष को किसी प्रकार की कोई राहत देने से मना करते हुए अगली सुनवाई की तिथि 31 जनवरी को मुक़र्रर कर दी है। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने बीपीएससी और राज्य सरकार के वकील को 30 जनवरी से पहले सभी आरोपों का विस्तृत जवाब देने का निर्देश दिया है।
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पटना से महीप राज की रिपोर्ट
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