Hazaribagh के लाल शहीद कैप्टन करमजीत सिंह बक्शी को कुछ इस तरह से दी गई अंतिम विदाई…

Hazaribagh : देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर सपूत कैप्टन करमजीत सिंह बक्शी को मंगलवार को पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। जैसे ही उनका पार्थिव शरीर उनके जुलु पार्क स्थित आवास से निकला, पूरे शहर की आंखें नम हो गईं। सिद्धू कानू चौक, सरकारी बस स्टैंड होते हुए उनकी अंतिम यात्रा गुरुगोबिंद सिंह रोड स्थित गुरुद्वारा पहुंची, जहां सिख रीति-रिवाज से अरदास की गई। इसके बाद शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए उनका पार्थिव शरीर मुक्ति धाम लाया गया।

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Hazaribagh अंतिम विदाई में शामिल लोग
Hazaribagh अंतिम विदाई में शामिल लोग

Hazaribagh : हजारों की संख्या में लोग अंतिम यात्रा में हुए शामिल

शहर में हर ओर गमगीन माहौल था, लेकिन साथ ही गर्व भी कि यह वीर सपूत हजारीबाग की धरती से था। हजारों की संख्या में लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए। आम लोगों के साथ-साथ जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और प्रशासनिक अधिकारी भी इस श्रद्धांजलि सभा का हिस्सा बने। हजारीबाग की उपायुक्त (डीसी) नैंसी सहाय और पुलिस अधीक्षक अरविंद कुमार सिंह भी मौजूद रहे और उन्होंने शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की।

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“कैप्टन करमजीत अमर रहें” के नारों से गूंजा शहर

कैप्टन करमजीत सिंह बक्शी की अंतिम यात्रा में लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए “भारत माता की जय” और “कैप्टन करमजीत अमर रहें” के नारे लगाए। जैसे-जैसे उनका पार्थिव शरीर आगे बढ़ता गया, लोगों की भीड़ बढ़ती गई। हर कोई अपने इस वीर को अंतिम विदाई देने के लिए लालायित था।

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माता-पिता ने गर्व और गम के साथ दी विदाई

मुक्ति धाम में सैन्य सम्मान के साथ कैप्टन करमजीत का अंतिम संस्कार किया गया। वहां मौजूद उनकी मां को भारतीय सेना द्वारा उनकी वर्दी और तिरंगा सौंपा गया। इस दौरान माहौल बेहद भावुक हो गया। शहीद के पिता ने कहा, “मेरा बेटा देश के लिए कुर्बान हुआ, यह गर्व की बात है, लेकिन एक पिता के लिए यह पल बेहद कठिन भी है।” वहीं, मां ने तिरंगे को अपनी छाती से लगाकर कहा, “मेरा बेटा अमर रहेगा।”

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कैप्टन करमजीत सिंह बक्शी की शहादत को पूरा देश सलाम करता है। उनकी वीरता और बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा। हजारीबाग ने अपना लाल खो दिया, लेकिन भारत माता ने एक अमर सपूत पा लिया।

हजारीबाग से शशांक शेखर की रिपोर्ट–

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