लखनऊ : यूपी में भी भाजपा मंत्रिमंडल के विस्तार से लेकर संगठन में बदलाव के मूड में। बिहार के बाद अब भाजपा नेतृत्व यूपी में सत्ता से लेकर संगठन में चुनावी तैयारी एवं समीकरणों के लिहाज अहम बदलाव के मूड में हैं।
दिल्ली में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों से उत्साहित भाजपा नेतृत्व ने बिहार के साथ यूपी में अपनी किलेबंदी को चाकचौबंद करने पर फोकस किया है। बताया जा रहा है कि अगले 10 दिनों में यूपी में सत्ता से लेकर संगठन में भाजपा के चेहरों में कुछ अहम बदलाव दिख सकते हैं।
सत्ता में मुखिया का चेहरा CM Yogi आदित्यनाथ ही बने रहेंगे लेकिन उनके मंत्रिमंडल के कुछ चेहरे बदले जा सकते हैं। इसी के साथ ही संगठन में जातीय एवं क्षेत्रीय समीकरणों का संतुलन साधने पर पैनी नजर है।
बदलाव के लिए भाजपा ने पूरा किया होमवर्क
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने राज्यस्तर से फीडबैक लेने के बाद अपना होमवर्क पूरा कर लिया है। यूपी में अगले आठ से 10 दिन में मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है। नए मंत्रिमंडल में 3 से 4 नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है।
संकेत है कि मंत्रिमंडल में पश्चिमी यूपी की हिस्सेदारी बढ़ेगी। बताया जा रहा है कि मंत्रिमंडल फेरबदल में कई मंत्रियों के विभाग भी बदले जाएंगे और 75 पार हो चुके नेताओं को आराम दिया जाएगा।
इसी के साथ अहम संकेत यह दिया गया है कि खराब प्रदर्शन और भ्रष्टाचार की शिकायतों के आधार पर 2 से 3 मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है।

प्रदेश अध्यक्ष के लिए ब्राह्मण कार्ड की तैयारी में है भाजपा
भाजपा के रणनीतिकारों से बीच-बीच में मिलने वाले संकेतों के आधार पर पहले भी इस तरह के कयास लगाए जा रहे थे कि दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा के नये अध्यक्ष की घोषणा हो सकती है। दिल्ली में भाजपा ने 27 साल बाद वापसी की है।
दिल्ली विधानसभा चुनाव के साथ यूपी के अयोध्या में मिल्कीपुर उपचुनाव के परिणाम भी इस लिहाज से सत्ता से लेकर संगठन में चर्चा का विषय हैं। अभी हाल ही में सम्पन्न हुए विधानसभा उपचुनाव में भाजपा ने प्रतिष्ठित मिल्कीपुर सीट सहित 10 में से 8 सीटों पर जीत दर्ज की थी।
अब सबकी नजरें भाजपा के नये राष्ट्रीय अध्यक्ष पर हैं। वहीं, दिल्ली की सत्ता का रास्ता जिस यूपी से होकर जाता है और जिस पर भाजपा का शुरू से खास फोकस रहा है, अब उसी यूपी में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष का नाम भी चौंका सकता है।
पार्टी ब्राह्मण कार्ड खेलने की तैयारी में है। इस लिहाज से भाजपा का अगला प्रदेश अध्यक्ष ब्राह्मण समाज से हो सकता है। संकेत है कि उसकी घोषणा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की घोषणा से पहले हो सकती है।

पेंडिंग चल रहे भाजपा जिलाध्यक्षों की सूची भी जारी करने की है तैयारी
इसी क्रम में भाजपा नेतृत्व में कुछ और अहम संकेत दिए हैं। सत्ता और संगठन में जमीनी और पुराने कार्यकर्ताओं को अहमियत देने पर फोकस है। ऐसे में यूपी मंत्रिमंडल में नये चेहरों को मौका देने का उद्देश्य कार्यकर्ताओं को 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए संदेश देना भी है कि पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं की अनदेखी नहीं होने दी जाएगी।
इसी क्रम में यूपी में काफी समय से पेंडिंग में चल रहे भाजपा के जिलाध्यक्षों की सूची भी जल्द ही जारी करने का संकेत दिया गया है। प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी इस पर स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं।
भूपेंद्र सिंह चौधरी ने कहा है कि – ‘…दिल्ली विधानसभा चुनाव और महाकुंभ के आयोजन की वजह से प्रक्रिया कुछ धीमी हुई। जिलाध्यक्षों की सूची जारी होने में अब कहीं कोई पेंच नहीं है। बहुत जल्द ही जिलाध्यक्षों की सूची जारी की जाएगी।
…सूची जारी होने में जो भी बिंदु सामने आए थे, सभी का निस्तारण हो गया है। भाजपा का संगठन सर्वव्यापी और सर्वस्पर्शी है। समाज के सभी वर्गों में हमारा प्रतिनिधित्व है।
…हमारा ही एक ऐसा संगठन है, जिसमें महिलाओं और अनुसूचित जाति समेत सभी वर्गों के लिए काम करने के समान अवसर दिए गए हैं और आगे भी इसका ख्याल रखा जाएगा।’


















