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Hazaribagh : “हमीन पानी छांक-छांक पीयो हियय” हरदिया के आदिवासियों का दर्द…

Hazaribagh : विकास के वादे, शुद्ध जल, बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य के दावे, सड़क निर्माण और कनेक्टिविटि की बातें, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों और वादों से कोसो दूर है। सरकार भले ही विकास कार्य तेजी से धरातल पर उतारने का दावा करती हो पर आज भी लोगों को पेयजल, सडक जैसी बुनियादी सुविधाएं मयस्सर नहीं है। हम बात कर रहे हैं टाटीझरिया प्रखंड के धरमपुर पंचायत अंतर्गत आदिवासी टोला हरदिया की।

Hazaribagh : गांव से दूर पानी भरकर लेके जाती महिलाएं
Hazaribagh : गांव से दूर पानी भरकर लेके जाती महिलाएं

Hazaribagh : जल संकट और जर्जर सड़क से हरदिया के आदिवासियों में नाराजगी

धरमपुर से 2 किमी दूर गड्ढे-नाले जर्जर कच्ची सड़क पार कर जब हरदिया पहुंचा तो पाया यहां ना तो पानी की सुविधा है ना ही सड़क की। हरदिया की महिलाएं फूलमती देवी, सोमरी देवी, अनिता देवी, सुंदरी देवी, सूरजी देवी, देवंती देवी, कंदनी देवी, लीलमुनी देवी खेत में बने गड्ढे से पानी निकाल गमछे से छानकर अपने बर्तनों में भर रही थी।

उसने बताया कि “हमीन पानी छांक-छांक पीयो हियय हमीन के बीमारी नाय हो जीतय, हींया कुछो के सुविस्थे नखय।” आदिवासी टोला हरदिया में 40 घर हैं, जिसमें 300 से भी अधिक की आबादी रहती है। ये आबादी शासन-प्रशासन के लिए अदृश्य है। जलमीनार से घरों तक कनेक्शन जरूर दिया गया है लेकिन उसमें पानी नहीं है। दो चापानल लगे हैं जो दोनों खराब है। यहां साफ पानी का स्रोत नहीं है। लिहाजा महिलाएं खेत में बने गड्ढे से पानी छानकर लाती हैं।

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लुकुईया नाला पर पुल निर्माण की मांग, बरसात में बंद हो जाता है रास्ता

परमेश्वर मांझी, सोमर मांझी, फिनिलाल मांझी, बजन मांझी, मोहन मांझी ने बताया कि पगडंडियों के सहारे ही आवाजाही होती है। अगर कोई बीमार पड़ जाता है तो सरकारी एंबुलेंस गांव तक नहीं आ पाती। मरीजों और गर्भवती महिलाओं को धरमपुर मुख्य सड़क तक खटिए पर लादकर ले जाना पड़ता है। लुकुईया नाला पर पुल नहीं रहने के कारण बरसात में रास्ता बंद हो जाता है। वैकल्पिक व्यवस्था के लिए लकडी का पुल बनाया था वह भी ढह गया है।

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जलमीनार और चापानल पडे़ हैं बेकार

उन्होंने कहा कि पानी-सड़क को लेकर वह कई वर्षों से गुहार लगाते आए हैं, लेकिन आश्वासन के सिवा उन्हें कुछ नहीं मिला, इसको लेकर ग्रामीण काफी नाराज हैं। उनकी मांग है कि जल्द हमारी समस्या का सामाधान किया जाए। हरदिया के आदिवासी परिवार समस्याओं के बीच छला हुआ महसूस कर रहे हैं। ग्रामीण शासन-प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं। सड़क निर्माण और पानी की सुविधा की मांग कर रहे हैं, लेकिन इनकी मांगों पर सुनवाई कब तक होती है ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

शशांक शेखर की रिपोर्ट–

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