मिट्टी जांच में बिहार अग्रणी, विगत 2 वित्तीय वर्षों में 8 लाख मिट्टी के नमूनों की हुई जांच

पटना : मिट्टी जांच में राज्य ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कृषि विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, विगत दो वित्तीय वर्षों में आठ लाख मिट्टी के नमूनों की जांच की गई है, तीन वर्ष में एक बार मिट्टी की जांच की जाती है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में पांट लाख और वर्ष 2025-26 में तीन लाख मिट्टी के नमूनों की जांच की गई है। यह आंकड़ा राज्य को मिट्टी के स्वास्थ्य जांच में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करता है। साथ ही, राज्य सरकार कृषि के तेज विकास के लिए मिट्टी जांच की सुविधाओं का तेजी से विस्तार कर रही है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में अनुमंडल स्तर पर 25 जिलों में कुल 32 मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं

वित्तीय वर्ष 2025-26 में अनुमंडल स्तर पर 25 जिलों में कुल 32 मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं। वहीं, राज्य में पहले से 14 अनुमंडल स्तरीय मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं। इसके अलावा कृषि विश्वविद्यालयों एवं कृषि विज्ञान केंद्रों के स्तर से संचालित मिट्टी जांच प्रयोगशालाओं में भी नमूनों की जांच की जाती है। किसानों को अपने जिले में ही यह सुविधा मिले, इसके लिए राज्य के सभी 38 जिलों में जिला स्तरीय मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं। इसके अतिरिक्त प्रत्येक प्रमंडल में एक-एक, अर्थात कुल नौ चलंत मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं भी संचालित हैं। साथ ही, ग्राम स्तर पर 72 मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं भी कार्य कर रही हैं।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक दस्तावेज है

जांच की गुणवत्ता के अनुश्रवण के लिए केंद्रीय मिट्टी जांच प्रयोगशाला के अतिरिक्त, राज्य में स्थित दोनों कृषि विश्वविद्यालयों की मिट्टी जांच प्रयोगशालाओं को रेफरल प्रयोगशाला के रूप में अधिसूचित किया गया है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक दस्तावेज है, जिसके माध्यम से उन्हें उनके खेत की मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्वों की सटीक जानकारी दी जाती है।

जांच परिणामों के आधार पर किसानों को उनके खेत के रकबे एवं फसल के अनुसार, संतुलित उर्वरक उपयोग की अनुशंसा की जाती है

जांच परिणामों के आधार पर किसानों को उनके खेत के रकबे एवं फसल के अनुसार, संतुलित उर्वरक उपयोग की अनुशंसा की जाती है, जिससे अनावश्यक और अंधाधुंध रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग में कमी आती है। रासायनिक उर्वरकों के स्मार्ट उपयोग से जहां फसलों का उत्पादन बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर गैर-जरूरी उपयोग कम होने से कृषि लागत में भी कमी आ रही है। इससे किसानों की आय बढ़ रही है और उनमें खुशहाली आ रही है। यह पहल राज्य में कृषि क्षेत्र में एक मौन क्रांति का कार्य कर रही है।

12 पैरामीटर पर होता है मिट्टी के नमूनों का विश्लेषण

राज्य सरकार की सभी मिट्टी जांच प्रयोगशालाओं में 12 पैरामीटर—pH, EC, OC, N, P, K, Zn, Cu, Mn, Fe, S और B—पर मृदा नमूनों का विश्लेषण किया जाता है। नमूना लेने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से सॉफ्टवेयर आधारित संग्रहण प्रणाली अपनाई गई है। कृषि विभाग के कर्मी खेत पर जाकर किसान के प्लॉट का फोटो, अक्षांश एवं देशांतर के साथ पूरा विवरण ऐप पर अपलोड करते हैं।

मोबाइल पर मिल रहा मृदा स्वास्थ्य कार्ड

मिट्टी नमूनों की जांच के बाद किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराने में लगने वाले समय को कम करने के उद्देश्य से उन्हें व्हाट्सएप के माध्यम से डिजिटल मृदा स्वास्थ्य कार्ड भी उपलब्ध कराया जा रहा है। ऑनलाइन उपलब्ध इस कार्ड में लगभग 106 फसलों के लिए अनुशंसाएं दर्ज होती हैं। मिट्टी जांच की वैधता तीन वर्ष की होती है।

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