Palamu: अंग्रेजों द्वारा निर्मित और मेदिनीनगर की पहचान रहे जिला स्कूल, मेदिनीनगर का अस्तित्व आज जिला प्रशासन की जिद्द के आगे खतरे में है.
दरअसल जिला प्रशासन स्कूल के मैदान के बीच मॉडल स्कूल के निर्माण पर अड़ा है, मॉडल स्कूल के निर्माण के लिए नींव भी खोद दी गई है. इस बीच स्कूल के मैदान के बीच मॉडल स्कूल का निर्माण का स्थानीय लोगों और छात्रों द्वारा विरोध किया जाने लगा है. दिन प्रति दिन यह विरोध का स्वर तेज हो रहा है. अब इस मुद्दे पर स्थानीय समाजसेवियों और शिक्षाविदों की ओर से भी विरोध किया जाने लगा है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि जिला प्रशासन के इस कदम से स्कूल की पहचान ही खत्म हो जाएगी. जिला स्कूल की पहचान उसका मैदान है. इसी मैदान में विभिन्न प्रकार के खेलों का आयोजन होता रहा है. स्कूल के छात्र और छात्राएं यहां विभिन्न प्रकार का खेल खेलकर अपने आप को शारीरिक-मानसिक रुप से उर्जावान बनाते हैं. जब यह मैदान ही खत्म हो जाएगा तब यह छात्र कहां जाएंगे, यह कौन सी शिक्षा नीति है, जिसमें शारीरिक-मानसिक विकास और गतिविधियों के लिए कोई स्थान नहीं है. जबकि सरकार खुद भी विभिन्न प्रकार के खेलों के लिए छात्र छात्राओं को प्रोत्साहित करने की बात करती है. नई शिक्षा नीति का यह एक अहम हिस्सा है, फिर यह कदम क्यों और किसके इशारे पर उठाया जा रहा है.
यहां बता दें कि 18वीं शताब्दी में स्थापित जिला स्कूल का मैदान मेदिनीनगर के युवाओं के लिए स्टेडियम से कम नहीं है. शहर में इस मैदान के सिवा अन्य कोई मैदान भी नहीं है. हर दिन सैकड़ों युवा फुटबाल, क्रिकेट, कबड्डी खेलने और मार्निंग वाक करने के लिए यहां आते हैं. लेकिन अब जिला प्रशासन मैदान के बीचो बीच मॉडल स्कूल बनाने पर अड़ा है. देखना होगा कि जिला प्रशासन अपनी जिद्द पर अड़ा रहता है या जन भावनों का ख्याल रख इसको तिंलाजली देता है.
रिपोर्टर:संजीत यादव

















