Gayaji: बिहार का एक गांव जहां पहले कभी सघन आबादी बसती थी लेकिन अभी इस गांव में आबादी का नामोनिशान नहीं है। गांव की पूरी आबादी पलायन कर गई और अब ऐसी स्थिति है कि जिला के लोगों को इस गांव का नाम भी याद नहीं। यह गांव है बिहार के गयाजी के गुरारू प्रखंड के डीहा पंचायत अंतर्गत महमदपुर। आसपास के गांव के लोगों से इस गांव के बारे में पूछने पर वे कहते हैं कि वहां सिर्फ खेत है आबादी नहीं। आसपास के कुछ बुजुर्ग लोगों ने बताया कि एक समय था जब यह गांव आबादी से गुलजार रहता था। Gayaji Gayaji Gayaji Gayaji Gayaji Gayaji Gayaji
गांव में ततवा और राजपूत जाति के लोग रहते थे। अचानक गांव में महामारी और कुछ अन्धविश्वास का असर हुआ जिसके बाद धीरे धीरे लोगों ने गांव खाली कर दिया। यहां के निवासी कुछ लोग आसपास के गांवों में बस गये तो कुछ लोग अगल बगल के जिले में। गयाजी या महमदपुर गांव के आसपास के नई पीढ़ी के लोगों से जब इस गांव के बारे में पूछा जाता है तो वे चौंक उठते हैं क्योंकि उन्हें पता भी नहीं कि यहां कोई रहता है। Gayaji Gayaji Gayaji Gayaji Gayaji
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बुजुर्गों ने बताया कि गांव में अभी भी दो तीन मंदिर है जो इस बात का परिचय देता है कि यह गांव कभी गुलजार था। गांव में अभी भी महादेव स्थान है जिसकी स्थिति जीर्ण शीर्ण हो गई है वहीं एक प्राचीन देवी मंदिर भी है जिसे आसपास के गांव के लोगों ने जीर्णोद्धार करवाया है। इसके साथ ही यहां एक गौरेया स्थान भी जहां अब भी लोग पूजा पाठ करते हैं।
ऐसे खाली हुआ यह गांव
इस गांव के खाली होने की कहानी कई दशक पुरानी है। गांव के लोग खुलकर तो नहीं, लेकिन बातों ही बातों में बताते हैं, कि यहां महामारी और अंधविश्वास ने ऐसा जकड़ा कि एक के बाद एक करके यहां के रहने वाले सभी लोग दूसरे जगह को निवास करने को चले गए। ग्रामीण बताते हैं, कि महामारी और अंधविश्वास ने कुछ ऐसा परेशान किया, कि पूरा गांव खाली हो गया। हर कोई परिवार अपना घर छोड़कर यहां से चला गया।
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यह बात आजादी से पहले की बताई जाती है। यहां के लोग कहां-कहां गए हैं, इसके बारे में पूरी जानकारी तो नहीं है, लेकिन कुछ ऐसे लोग हैं, जो गया जी और औरंगाबाद में निवास कर रहे हैं। कुछ के वंशज डीहा पंचायत के क्षेत्रों में भी रहते है, ऐसा महमूदपुर गांव के आसपास के ग्रामीण बताते हैं। उनके संबंध में लोग चर्चा जरूर करते हैं।
औरंगाबाद विधायक के पूर्वज यहां रहते थे
महमदपुर के बगल के गांव डीहा गांव के अरुण कुमार बताते हैं, कि महमदपुर गांव पहले आबादी वाला गांव था। यहां अच्छी खासी आबादी थी। ततवा, राजपूत समेत अन्य जातियों के लोग यहां निवास करते थे, लेकिन ऐसी कुछ घटनाएं हुई, ऐसी कुछ महामारी फैली, ऐसे अंधविश्वास ने लोगों के मन में अवधारणा किया कि एक के बाद एक कर पूरा गांव खाली हो गया। उन्होंने अपने बुजुर्गों से सुना है, कि महामारी और अंधविश्वास (भूूत प्रेत का वहम) की कड़ी से मन में उपजी भयावहता के कारण लोगों ने अपने घर-बार छोड़ दिए और दूसरे जगह को पलायन कर गए।
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यहां खेती होती है पर कोई रहता नहीं
गांव में अब भी लोग खेतीबारी करते हैं। इस गांव की जमीन पर फसल उपजा कर आसपास के गांव के लोग अपनी आजीविका चलाते हैं लेकिन इस गांव में बसने से डरते हैं। यहां की पूरी जमीन समतल है, जिस पर खेती होती है। ऐसे लोग भी हैं, जो बेचिरागी होने की स्थिति में परती भूमि देख यहां की जमीन पर खेती करते हैं। वही, अगल-बगल के गांव के लोगों की कुछ जमीन इस गांव में है, वह भी यहां खेती करते हैं।
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गया से आशीष कुमार की रिपोर्ट
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