रांची: रांची नगर निगम की नींद ने न जाने कितने सपनों को अधर में लटका दिया है। जिन लोगों ने वर्षों की कमाई से एक टुकड़ा ज़मीन खरीदी, अब उनके सपनों का मकान सिर्फ एक लॉग-इन फेलियर का शिकार बन गया है।
राज्य के दूसरे नगर निकायों और क्षेत्रीय विकास प्राधिकारों ने तो बीपीएएमएस के मेंटनेंस की झपकी से उठकर फिर से कामकाज शुरू कर दिया है, लेकिन रांची नगर निगम… वो तो अब भी “कुंभकरण” की नींद में है। पांच महीने से सिस्टम डाउन है, और जनता डाउनलोड कर रही है सिर्फ मायूसी।
ऊपर सेअदालती आदेश और नीचे से तकनीकी बहाने , बीच में फंसे हैं वो लोग जिनका सपना था “अपने घर की छत के नीचे सुबह की चाय”।
बीपीएएमएस लॉग इन नहीं कर रहा है, तो क्या जनता अपने सपनों को पासवर्ड रिसेट लिंक भेजे?
कहते हैं, झारखंड स्टेट डेटा सेंटर पर डेटा माइग्रेट हो रहा है। मगर जिस गति से यह माइग्रेशन हो रहा है, उससे तो मंगलयान भी शर्मिंदा हो जाए। 9 से 15 मई कहा गया था, अब 24 तारीख आ गई है और अभी भी “अभी कुछ समय और लगेगा” की सूचना झलक रही है।
उधर लोग बैंक से लोन नहीं ले पा रहे क्योंकि नक्शा पास नहीं। बैंक पूछ रहा है नक्शा, निगम कह रहा है “ट्राई अगेन लेटर।” जनता कह रही है: “कृपया वेट करें, आपकी कॉल हमारे लिए महत्वपूर्ण है।”
300 नक्शे रांची नगर निगम में लंबित हैं। 200 से अधिक रांची क्षेत्रीय विकास प्राधिकार में फंसे हैं। कुछ लोग तो अब नक्शा पास होने से पहले खुद पास हो जाने की आशंका जता रहे हैं।
अब कोई निगम से पूछे, बिना नक्शा के कोई कैसे घर बनाए? और अगर आप ही नहीं जागे तो जनता कब तक सपनों के ब्लूप्रिंट को दिल में लिए भटकेगी?
आपके एक लॉगिन से कई लोग जीवन में आगे बढ़ सकते हैं।
तो हुजूर, अब इस सॉफ्टवेयर स्लीप मोड से बाहर आइए और कृपा कीजिए
“अब तो जागिए, कुंभकरण की नींद छोड़िए!”



















