रांची: राज्य गठन के बाद झारखंड में सबसे अधिक नियुक्तियां अगर किसी विभाग में हुई हैं, तो वह है शिक्षा विभाग। यहां शिक्षकों के एक लाख से अधिक पद हैं। लेकिन जितनी बार नियुक्ति हुई, उससे कई गुना ज्यादा बार नियमावली बदली गई। आंकड़े बताते हैं कि राज्य बनने के बाद से प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति नियमावली में अब तक 11 बार संशोधन किया जा चुका है, जबकि नियुक्ति महज तीन बार ही पूरी हुई है और एक प्रक्रिया फिलहाल जारी है।
यदि औसत देखा जाये, तो प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में हर एक बार की नियुक्ति पर लगभग तीन बार नियमावली में बदलाव किया गया है।
हाईस्कूल में शिक्षक नियुक्ति के लिए तीन बार, जबकि प्लस टू स्कूलों में शिक्षक नियुक्ति के लिए दो नियमावलियां बनीं। प्लस टू स्कूलों में दो बार प्राचार्य नियुक्ति नियमावली बनी, पर अब तक एक भी नियुक्ति नहीं हो सकी। हाईस्कूल में प्रधानाध्यापक के लिए तीन नियमावलियां बनीं और सिर्फ एक बार नियुक्ति हुई।
हाल ही में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने हाईस्कूल और प्लस टू स्कूलों में प्रधानाध्यापक से लेकर शिक्षकों तक की नई नियुक्ति नियमावली जारी की है। लेकिन इसके कई प्रावधानों पर विरोध की आवाजें उठ रही हैं।
वहीं झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) की नयी नियमावली वर्ष 2016 से अब तक अधूरी पड़ी है, जिसे अभी तक अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है।
प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति नियमावली की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है।
- पहली नियमावली वर्ष 2002 में बनी और उसी साल अगस्त में इसमें संशोधन करना पड़ा।
- 2003 में नयी नियमावली के आधार पर शिक्षक नियुक्ति हुई।
- 2006 और 2009 में भी नयी नियमावलियां बनीं, लेकिन नियुक्ति केवल दो बार ही हो सकी।
- 2012 में फिर नयी नियमावली, जिसमें 2014-15 में संशोधन किया गया।
- 2016 से 2022 तक नियमावली में फिर बदलाव होते रहे।
- 2022 में पूरी तरह नयी नियमावली बनी, जिसके आधार पर जून 2023 में फिर बदलाव किया गया।
इसी के तहत फिलहाल 26,000 सहायक आचार्य की नियुक्ति प्रक्रिया जारी है।
शिक्षा विभाग में बार-बार नियम बदलने से जहां नियुक्ति प्रक्रिया में देरी हुई है, वहीं उम्मीदवारों के बीच अस्पष्टता और असंतोष भी बढ़ा है।


















