रांची: झारखंड सरकार में योजना एवं वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने ऊर्जा विभाग की 1746 करोड़ रुपये की लागत वाली 17 बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी देने से इनकार कर दिया है। इन सभी योजनाओं का केंद्र केवल धनबाद-चास-बोकारो क्षेत्र था, जिस पर मंत्री ने असहमति जताते हुए कहा कि इससे राज्य में क्षेत्रीय असंतुलन बढ़ेगा। उन्होंने फाइल को रोकते हुए लिखा कि अन्य पिछड़े जिलों की उपेक्षा कर केवल एक औद्योगिक क्षेत्र में निवेश करना अनुचित होगा।
यह निर्णय 20 मई को विकास आयुक्त अविनाश कुमार की अध्यक्षता में हुई राज्य योजना प्राधिकृत समिति की बैठक के बाद आया। बैठक में ऊर्जा विभाग के 17, पथ निर्माण विभाग के 14 और शिक्षा व आईटी विभाग के एक-एक प्रस्तावों पर विचार किया गया। हालांकि, मंत्री ने पथ निर्माण, शिक्षा और आईटी विभाग के प्रस्तावों को मंजूरी दे दी, लेकिन ऊर्जा विभाग के प्रस्तावों पर आपत्ति जताई।
मंत्री किशोर ने साफ किया कि लोहरदगा, पलामू, पाकुड़, सिमडेगा और चाईबासा जैसे जिलों में आज भी बिजली की गंभीर समस्याएं हैं। इन क्षेत्रों में संचरण लाइन की भारी कमी है और उन्हें प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि धनबाद क्षेत्र को पहले से ही पर्याप्त योजनाओं का लाभ मिल चुका है, इसलिए अब संतुलित विकास की दिशा में काम होना चाहिए।
सूत्रों के अनुसार, मंत्री की आपत्ति के बाद योजना विभाग ने ऊर्जा विभाग से स्पष्टिकरण मांगा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ऊर्जा विभाग प्रस्तावों में क्षेत्रीय संतुलन लाने के लिए संशोधन करता है या कोई वैकल्पिक समाधान पेश करता है।


















