छपरा: शहर के बीचोबीच होकर गुजरने वाले खनुआ नाला अतिक्रमण मुक्त हो जाएगा। इसके लिए कोर्ट के निर्देश पर सरकार और प्रशासन भी गहरी नींद से जगी है। जिला प्रशासन के अनुसार खनुआ नाला पर लगभग 286 दुकानें और करीब 120 लोगों का मकान और अवैध निर्माण कराकर अतिक्रमण किया गया है। पूर्व में गठित अफसरों की टीम ने भौतिक जांच में नाला के ऊपर अतिक्रमण की जांच भी की थी। जिसे पहली बार सुनवाई में सरकार और विभाग के अफसरों ने माना है।
एनजीटी के आर्डर में जो सूची अतिक्रमण का शामिल किया गया है, उसमें नाला के ऊपर बड़े-बड़े डाक्टर, इंजीनियर और वकील द्वारा भी कब्जा जमाया गया है। ऐसे में एनजीटी के आदेश पर 286 दुकानों के अलावे इन अवैध कब्जा को भी हटाने की प्लानिंग की गई है। प्रशासनिक स्तर पर गठित टीम इसको लेकर प्रक्रिया शुरू कर दी है।
450 साल पहले बना था यह नाला, 1995 में नगरपालिका ने बनवाईं दुकानें
छपरा शहर में मुगलकाल के समय में बीचो-बीच खनुआ नहर था। जिससे होकर व्यापार का कार्य होता था। छोटी बड़ी नावें आया जाया करती थी। अकबर शासन काल के समय में राजा टोडरमल अकबर के राजस्व और वित्तमंत्री थे। उसी ने 1574 में नहर का निर्माण कराया था। कलांतर में वह नाला बन गया और संर्कीण होते गया। 450 साल बाद 1995 में जिला प्रशासन ने खनुआ नाला पर 386 दुकानें बना दी। नगरपालिका ने सभी लोगों को आवंटित भी कर दिया था। अब जबकि शहर में पानी निकासी का एक मात्र साधन यह नाला पूरी तरह अतिक्रमण का शिकार हो गया है जिसको लेकर कई वर्षों से न्यायालय में वाद विवाद और याचिकाएं दायर हुई।
पहले तो नोटिस थमाया फिर अतिक्रमण हटाया
छपरा नगर निगम और अंचल अधिकारी ने ऐसे कब्जाधारियों को पहले तो नोटिस थमाया फिर अतिक्रमण हटाओ अभियान भी शुरू कर दिया है। इसमें कुछ अस्थायी कब्जा था जिसे पूर्व में हटाया का चुका है। जिला प्रशासन की तरफ से मौजूद अधिकारी ने बताया कि बुडको के एमडी ने पहले भी नाला का जायजा लिया था। जिसमें माना गया कि बिना अतिक्रमण हटाए सही तरीके से निर्माण संभव नहीं है।
वहीं एक दुकानदार ने बताया कि यह कार्रवाई पूरी तरह तुगलकी फरमान जारी कर किया जा रहा है जो सही नहीं है। किसी भी नोटिस जारी करने के साथ ही उसमे एक समय सीमा का निर्धारण किया जाता है ताकि किसी पीड़ित को कोई परेशानी नहीं हो। जबकि खानुवा नाले पर बने सभी दुकानों से नगर निगम किराए भी वसूलती है वावजूद इसके किसी तरह का कोई सुविधा नहीं दी जाती हैं। आज जिस तरह से दुकानें तोड़ी जा रही है वो तरीका बिल्कुल गलत है। हम सभी चाहते हैं हमारा नगर निगम का विकास हो स्वच्छ एवं सुंदर शहर बने लेकिन आम जनमानस का भी खयाल रखा जाना चाहिए। बिना किसी अतिरिक्त व्यवस्था के किसी का रोजी रोटी का साधन उजाड़ कर नहीं।
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