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SIR पर झारखंड सरकार का स्टैंड: मंत्री सुदिव्य सोनू बोले, मतदाता अधिकार छीनने का विरोध करेंगे

झारखंड सरकार ने SIR पर स्टैंड साफ किया। मंत्री सुदिव्य सोनू ने कहा, किसी का मताधिकार नहीं छीना जाएगा और भाजपा-चुनाव आयोग के रिश्तों पर सवाल उठाए।


रांची। SIR (Special Intensive Revision) को लेकर राजनीतिक घमासान जारी है। इस बीच मंत्री सुदिव्य सोनू ने सरकार का स्टैंड साफ करते हुए कहा कि किसी भी नागरिक का मताधिकार छीना नहीं जाएगा। उन्होंने भाजपा पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि यह मुद्दा संविधान की मूल भावना और नैसर्गिक न्याय के खिलाफ है।

सोनू ने कहा कि बिहार के SIR ड्राफ्ट में 65 लाख से ज्यादा नाम कटे, लेकिन चुनाव आयोग अब तक यह स्पष्ट नहीं कर पाया कि उनमें कितने विदेशी मतदाता थे। “अगर चुनाव आयोग एक भी विदेशी घुसपैठिए की पहचान नहीं कर पाया तो SIR का मतलब ही क्या है,” उन्होंने सवाल उठाया।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि झारखंड सरकार चुनाव आयोग की परंपरागत प्रक्रिया का समर्थन करती है, लेकिन SIR के नाम पर विवाद खड़ा करना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी चुनाव आयोग का प्रवक्ता बनकर संविधान और मताधिकार पर चोट करना चाहती है।


Key Highlights:

  • झारखंड सरकार ने SIR (Special Intensive Revision) पर अपना रुख साफ किया।

  • मंत्री सुदिव्य सोनू बोले, किसी का मताधिकार नहीं छीना जाएगा।

  • बीजेपी पर चुनाव आयोग का प्रवक्ता बनने और संविधान की मूल भावना पर चोट करने का आरोप।

  • बिहार के SIR ड्राफ्ट में 65 लाख नाम कटने पर सवाल उठाया।

  • सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल खड़े किए।

  • सोनू ने कहा, बहुमत से सदन जो भी फैसला करेगा, वही झारखंड सरकार का स्टैंड होगा।


सोनू ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि कई बार अदालत ने चुनाव आयोग को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट प्रकाशित करने और आधार को मान्यता देने का निर्देश दिया, लेकिन आयोग टालता रहा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “आज चुनाव आयोग की स्थिति ऐसी हो गई है मानो उसका नाम ‘केंचुआ आयोग’ रख दिया गया हो।”

मंत्री सुदिव्य सोनू ने कहा
मंत्री सुदिव्य सोनू ने कहा

उन्होंने यह भी कहा कि यदि सदन में SIR पर कोई प्रस्ताव आता है तो बहुमत का फैसला झारखंड सरकार का फैसला माना जाएगा, न कि सिर्फ सत्ता पक्ष या विपक्ष का। साथ ही उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह मताधिकार छीनकर जनता को वंचित करना चाहती है।

नैतिकता के सवाल पर सोनू ने कहा कि इसका अर्थ व्यापक है। उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री के रेल दुर्घटना के बाद इस्तीफे का उदाहरण देते हुए कहा कि आज के दौर में रेल मंत्री हादसे के बाद सोशल मीडिया पर रील बनाते हैं, इसलिए भाजपा को नैतिकता का पाठ पढ़ाना शोभा नहीं देता।

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