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झारखंड में भी होगा SIR, बदलते डेमोग्राफी पर बाबूलाल मरांडी ने जताई चिंता

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड में भी होगा SIR, बदलते डेमोग्राफी पर जताई चिंता। सुप्रीम कोर्ट और संविधान संशोधन पर भी दी बड़ी प्रतिक्रिया।


रांची: झारखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने झारखंड में SIR (Special Revision of Electoral Roll) की जरूरत पर जोर देते हुए कहा है कि राज्य में तेजी से बदल रही डेमोग्राफी (जनसांख्यिकी) को देखते हुए यह बेहद जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों से चुनाव आयोग की मदद करने के लिए हलफनामा मांगा है, उसी तरह झारखंड में भी यह प्रक्रिया लागू होनी चाहिए।

मरांडी ने घाटशिला में पत्रकारों से बातचीत में कहा,

“पूरे देश में SIR होने वाला है तो झारखंड कैसे अछूता रह सकता है। यहां तो इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। हमने पहले भी चुनाव के समय बताया था कि किस तरह झारखंड के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में सुनियोजित तरीके से डेमोग्राफिक बदलाव कराया जा रहा है।”

उन्होंने बताया कि बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी होनी चाहिए कि वे मतदाता सूची में गलत तरीके से चढ़ाए गए नामों को हटाने और जिनका नाम छूटा है, उन्हें जोड़ने का काम करें।


Key Highlights:

  • बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड में भी लागू होगा SIR, क्योंकि डेमोग्राफी तेजी से बदल रही है।

  • बूथ स्तर पर गलत वोट हटाने और छूटे नाम जोड़ने पर दिया जोर।

  • सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों को चुनाव आयोग की मदद करने का निर्देश दिया।

  • राहुल गांधी और विपक्ष पर सिर्फ विरोध की राजनीति करने का आरोप।

  • 130वें संविधान संशोधन पर विपक्ष को भ्रष्टाचारियों को बचाने वाला बताया।

  • किसानों और हत्याकांडों पर भी सरकार को घेरा।


सुप्रीम कोर्ट और विपक्ष पर निशाना

मरांडी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सिर्फ हंगामा करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि राजनीतिक दलों को चुनाव आयोग को सहयोग करना होगा। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस और राहुल गांधी पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा,

“राहुल गांधी और विपक्ष यह तो कहते हैं कि SIR नहीं होना चाहिए, लेकिन वे यह नहीं बताते कि आखिर होना क्या चाहिए। सिर्फ विरोध की राजनीति से जनता को गुमराह किया जा रहा है।”

130वें संविधान संशोधन पर बयान

मरांडी ने 130वें संविधान संशोधन का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष इसे जनप्रतिनिधियों के अधिकारों का हनन बता रहा है, जबकि हकीकत यह है कि अगर कोई मंत्री, मुख्यमंत्री या यहां तक कि प्रधानमंत्री भी जेल जाते हैं और 30 दिन तक बाहर नहीं आते तो उन्हें भी वही नियम झेलने चाहिए जो सरकारी कर्मचारियों पर लागू होते हैं।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा,

“आज किसी भी सरकारी कर्मचारी पर आरोप लगते ही जेल जाने पर उसकी नौकरी निलंबित हो जाती है। फिर मंत्री या मुख्यमंत्री विशेषाधिकार कैसे पा सकते हैं? असल में विपक्ष भ्रष्टाचारियों को बचाने की कोशिश कर रहा है।”

किसानों और अन्य मुद्दों पर भी बोले

मरांडी ने किसानों की समस्याओं और राज्य में हुई हत्याओं की जांच को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार से मांग की गई है कि मृतकों के परिवारों को न्याय मिले और किसानों को भी उनकी वैध मांगों के अनुरूप रसीदें दी जाएं।

बाबूलाल मरांडी का यह बयान ऐसे समय आया है जब झारखंड की राजनीति में डेमोग्राफी, मतदाता सूची और संविधान संशोधन जैसे मुद्दे गरमा रहे हैं। SIR की मांग को लेकर भाजपा सरकार पर दबाव बना रही है, वहीं विपक्ष इसे लेकर सरकार पर हमला बोल रहा है। आने वाले महीनों में यह मुद्दा झारखंड की राजनीति में बड़ा राजनीतिक हथियार बन सकता है।


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