महागठबंधन में पड़ी दरारें! क्या सीएम हेमंत सोरेन बिहार चुनाव में नहीं करेंगे प्रचार?

रांची. बिहार विधानसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच झारखंड के मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के केंद्रीय अध्यक्ष हेमंत सोरेन का चुनाव प्रचार से दूर रहना नए राजनीतिक संकेत दे रहा है। महागठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे को लेकर जेएमएम की नाराजगी अब सार्वजनिक होती दिख रही है। पार्टी ने साफ कर दिया है कि जब बिहार में उन्हें चुनाव लड़ने का मौका ही नहीं मिला, तो वहां प्रचार करने का सवाल ही नहीं उठता।

महागठबंधन में असंतोष

जेएमएम के केंद्रीय प्रवक्ता ने एक न्यूज चैनल से बात करते हुए कहा कि बिहार में पार्टी को एक भी सीट पर चुनाव लड़ने का अवसर नहीं दिया गया। ऐसी स्थिति में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के लिए प्रचार करने की कोई आवश्यकता नहीं है, और न ही उन्हें इसके लिए आमंत्रण मिला है। उन्होंने कहा, ‘अगर हम चुनाव ही नहीं लड़ रहे हैं, तो प्रचार किसका करेंगे? हम गठबंधन धर्म झारखंड में निभा रहे हैं, लेकिन बिहार में हमें साथ ही नहीं लिया गया।’

जेएमएम प्रवक्ता के बयान से स्पष्ट है कि जेएमएम अपने ‘समान भागीदारी’ के मुद्दे पर पीछे हटने को तैयार नहीं है। पार्टी की नाराजगी यह भी संकेत दे रही है कि बिहार में महागठबंधन की रणनीति ने झारखंड में उसके सहयोगियों के बीच अविश्वास की रेखा खींच दी है।

कांग्रेस अब भी आशान्वित

वहीं, कांग्रेस अब भी स्थिति को सामान्य बताने की कोशिश में है। पार्टी के नेता का कहना है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बिहार चुनाव में स्टार प्रचारक के रूप में जरूर जाएंगे। उन्होंने कहा, ‘महागठबंधन के अंदर सब कुछ ठीक है। किसी तरह की नाराजगी नहीं है, और कांग्रेस नेताओं ने हेमंत जी से संपर्क किया है।’ हालांकि, जेएमएम की तरफ से किसी भी आधिकारिक सहमति या कार्यक्रम की घोषणा नहीं हुई है।

भाजपा ने साधा निशाना

महागठबंधन के भीतर बढ़ती खटास पर भाजपा ने भी मौके का फायदा उठाया है। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि हेमंत सोरेन को ‘स्वाभिमान की रक्षा’ करते हुए कांग्रेस और राजद से नाता तोड़ लेना चाहिए। व्यंग्य करते हुए कहा, ‘पहले जेएमएम ने 25 सीटों पर लड़ने की बात कही, फिर 12, फिर 6, और अब कहीं से चुनाव ही नहीं लड़ रहे हैं। यह साबित करता है कि महागठबंधन में उनकी कोई हैसियत नहीं बची है।’

बिहार की राजनीति का असर झारखंड पर

जेएमएम का यह रुख सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह असंतोष लंबा खिंचता है, तो झारखंड में महागठबंधन सरकार पर भी असर पड़ सकता है। राज्य में पहले से ही कांग्रेस और झामुमो के बीच कई मुद्दों पर मतभेद सामने आते रहे हैं। चाहे वह नियुक्तियों के फैसले हों या गठबंधन की नीतियां। ऐसे में बिहार चुनाव ने इन तनावों को और बढ़ा दिया है।

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