Manorama Devi Statement, गया: शहर के रामपुर स्थित एक निजी होटल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान बेलागंज विधायक मनोरमा देवी के एक बयान के बाद स्थानीय राजनीति में चर्चा तेज हो गई। कार्यक्रम में विधायक ने कहा, “मैं ठेकेदार न होती तो विधायक न बनती।” उनके इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। विधायक के बयान ने कार्यक्रम के दौरान ही राजनीतिक चर्चा को हवा दे दी। खासकर जनप्रतिनिधि के तौर पर राजनीति और उनके पूर्व पेशे से जुड़े इस बयान को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा शुरू हो गई।
विजय सिन्हा ने राजनीति को बताया जनसेवा का माध्यम
कार्यक्रम में मौजूद प्रभारी मंत्री एवं कृषि मंत्री विजय सिन्हा ने विधायक के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए राजनीति के उद्देश्य और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी को लेकर अपनी बात रखी। विजय सिन्हा ने कहा कि राजनीति जनता की सेवा और क्षेत्र के विकास का माध्यम है। जनप्रतिनिधियों को अपनी जिम्मेदारी को प्राथमिकता देते हुए जनता के विश्वास पर खरा उतरने का प्रयास करना चाहिए। मंत्री की इस प्रतिक्रिया के बाद कार्यक्रम का माहौल कुछ समय के लिए पूरी तरह राजनीतिक चर्चा में बदल गया। उनके बयान को विधायक मनोरमा देवी की टिप्पणी के जवाब के तौर पर देखा गया।
‘मैं कुछ और बोलना चाह रही थी’—मनोरमा देवी
विजय सिन्हा के भाषण के दौरान मनोरमा देवी ने अपने बयान को लेकर कहा कि वह कुछ और कहना चाह रही थीं। इससे उनके पहले दिए गए बयान के संदर्भ को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई। विधायक के बयान और मंत्री की प्रतिक्रिया के बाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच भी इस विषय को लेकर बातचीत होती रही। हालांकि, विधायक के बयान का पूरा संदर्भ क्या था और वह किस बात की ओर इशारा कर रही थीं, इसे लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
सोशल मीडिया पर भी शुरू हुई चर्चा
मनोरमा देवी और विजय सिन्हा के बयानों को लेकर सोशल मीडिया पर भी लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। दोनों नेताओं की टिप्पणियों को लेकर अलग-अलग तरह की राजनीतिक व्याख्याएं की जा रही हैं। स्थानीय राजनीतिक हलकों में भी यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में दोनों नेताओं के बयानों को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और सामने आने की संभावना है।
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