18 जनवरी को माघ मौनी अमावस्या पर गंगा स्नान, मौन व्रत और दान का महत्व। 19 जनवरी से गुप्त नवरात्र आरंभ, जानें तिथियां, योग और पूजा विधि।
Mauni Amavasya 2026 रांची: साल की पहली अमावस्या 18 जनवरी को माघ मौनी अमावस्या के रूप में मनाई जाएगी। इसे माघी अमावस्या भी कहा जाता है और इसे वर्ष की सबसे पवित्र अमावस्या माना जाता है। इस दिन मौन व्रत, पवित्र नदियों में स्नान और दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मौनी अमावस्या पर स्नान करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष प्राप्ति के योग बनते हैं।
Mauni Amavasya 2026:मौनी अमावस्या पर शुभ योग और नक्षत्रों का संयोग
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 18 जनवरी को माघ कृष्ण पक्ष में मौनी अमावस्या पड़ेगी। इस दिन सुबह 10 बजकर 29 मिनट तक पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र रहेगा, इसके बाद उत्तराषाढ़ा नक्षत्र लगेगा, जो अगले दिन 19 जनवरी की सुबह 10 बजकर 14 मिनट तक प्रभावी रहेगा। मौनी अमावस्या के दिन हर्षण योग, बज्र योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्ध योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिससे इस दिन का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है। इस दिन भगवान सूर्य और भगवान विष्णु की पूजा से विशेष फल की प्राप्ति मानी गई है।
Mauni Amavasya 2026: गंगा स्नान और दान-पुण्य का विशेष महत्व
मौनी अमावस्या पर गंगा स्नान को अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन गंगा जल अमृतमय हो जाता है और स्नान करने वाले साधकों के जाने-अनजाने किए गए पाप नष्ट हो जाते हैं। इस दिन ऊन से बने वस्त्र, अन्न और धन का दान करना श्रेष्ठ माना गया है। साथ ही पितरों को तर्पण और पिंडदान करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है। कई श्रद्धालु पूरे माघ माह में प्रतिदिन गंगा स्नान का संकल्प भी लेते हैं।
Key Highlights
18 जनवरी को माघ मौनी अमावस्या, मौन व्रत और गंगा स्नान का विशेष महत्व
मौनी अमावस्या पर सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि सहित कई शुभ योग
19 जनवरी से साल का पहला गुप्त नवरात्र शुरू, 27 जनवरी को समापन
गुप्त नवरात्र में 10 महाविद्याओं की गुप्त साधना का विधान
माघ और चैत्र दोनों नवरात्र की शुरुआत इस वर्ष 19 तारीख से
Mauni Amavasya 2026: 19 जनवरी से शुरू होगा साल का पहला गुप्त नवरात्र
मौनी अमावस्या के अगले दिन 19 जनवरी से साल का प्रथम गुप्त नवरात्र आरंभ होगा। आचार्यों के अनुसार माघ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को गुप्त नवरात्र का पहला दिन रहेगा। गुप्त नवरात्र कुल नौ दिनों तक चलेगा और 27 जनवरी को नवमी तिथि के साथ इसका समापन होगा। 23 जनवरी को पंचमी तिथि पर वसंत पंचमी और सरस्वती पूजा मनाई जाएगी। 25 जनवरी को अचला सप्तमी, 26 जनवरी को दुर्गाष्टमी और 27 जनवरी को नवमी तिथि रहेगी।
Mauni Amavasya 2026: गुप्त नवरात्र में 10 महाविद्याओं की होगी साधना
गुप्त नवरात्र को तंत्र साधना और गुप्त उपासना की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। इस दौरान काली, तारा, बगलामुखी समेत दस महाविद्याओं की गुप्त रूप से पूजा की जाती है। आचार्यों के अनुसार गुप्त नवरात्र में कलश स्थापना उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, बज्र योग और सर्वार्थ सिद्धि व अमृत सिद्ध योग के संयोग में होगी, जिससे साधना का फल कई गुना बढ़ जाता है।
Highlights

