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RIMS land scam investigation: अवैध म्यूटेशन की जांच में उतरी ACB, हाइकोर्ट ने मांगी 6 हफ्ते में रिपोर्ट

RIMS land scam investigation रिम्स की अधिग्रहित जमीन पर अवैध कब्जे और म्यूटेशन मामले की जांच ACB ने शुरू की। हाइकोर्ट ने दोषी अफसरों की पहचान कर 6 सप्ताह में स्टेटस रिपोर्ट मांगी।


RIMS land scam investigation रांची: रांची स्थित रिम्स की अधिग्रहित जमीन पर अवैध कब्जा और निजी लोगों के नाम म्यूटेशन के मामले की जांच बुधवार से शुरू हो गई है। जांच की जिम्मेदारी भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को सौंपी गई है। एसीबी की टीम ने बड़गाईं अंचल कार्यालय और रजिस्ट्री कार्यालय जाकर जमीन से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल की। अधिकारियों के अनुसार, जांच में सामने आए तथ्यों, बयानों और दस्तावेजों के आधार पर उन लोगों की पहचान की जाएगी, जिनकी भूमिका से रिम्स की जमीन का म्यूटेशन और रजिस्ट्रेशन निजी व्यक्तियों के नाम पर हुआ।


Key Highlights

  • रिम्स की जमीन पर अवैध कब्जा और म्यूटेशन की जांच शुरू

  • एसीबी ने अंचल कार्यालय और रजिस्ट्री ऑफिस से दस्तावेज जुटाए

  • रिम्स प्रबंधन और टूटे घरों के मालिकों के बयान दर्ज

  • हाइकोर्ट ने 6 सप्ताह में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश

  • कैलाश कोठी प्रकरण भी जांच के दायरे में


RIMS land scam investigation:रिम्स प्रबंधन और अंचल कार्यालय से पूछताछ

एसीबी की टीम ने राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हिरेंद्र बिरुआ और संपदा पदाधिकारी डॉ. शिव प्रिये से विस्तृत जानकारी ली। उनसे पूछा गया कि रिम्स की कितनी जमीन पर अतिक्रमण है, कितनी जमीन अभियान चलाकर खाली कराई गई और अतिक्रमण से पहले नोटिस की प्रक्रिया अपनाई गई या नहीं। नोटिस चस्पा करने की प्रक्रिया और दस्तावेजी साक्ष्य भी टीम ने अपने कब्जे में लिए। इसके अलावा, जिन लोगों के घर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में टूट चुके हैं, उनके भी बयान दर्ज किए गए।

RIMS land scam investigation:दोषी अफसरों की पहचान पर फोकस

जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाने पर है कि किन अधिकारियों और कर्मियों की मिलीभगत से अधिग्रहित सरकारी जमीन का म्यूटेशन और रजिस्ट्री निजी नामों पर हुई। एसीबी अधिकारियों का कहना है कि दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर जिम्मेदार लोगों को चिह्नित कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

RIMS land scam investigation:हाइकोर्ट सख्त, छह सप्ताह में रिपोर्ट का आदेश

इस पूरे मामले की निगरानी झारखंड हाईकोर्ट कर रहा है। रिम्स में मरीजों के बेहतर इलाज और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी स्वतः संज्ञान पीआईएल की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने राज्य सरकार का पक्ष सुना। अदालत ने कहा कि चूंकि अब मामले की जांच एसीबी कर रही है, इसलिए एसीबी को आवश्यक पक्षकार मानते हुए दोषी अधिकारियों की पहचान की जाए। कोर्ट ने एसीबी को छह सप्ताह के भीतर जांच की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई की तारीख 18 फरवरी तय की गई है।

RIMS land scam investigation:कैलाश कोठी प्रकरण भी जांच के दायरे में

कैलाश कोठी मामले में सुप्रीम कोर्ट से स्टे ऑर्डर आया था, लेकिन उससे पहले ही प्रशासन द्वारा भवन का बड़ा हिस्सा तोड़ा जा चुका था। अंचल कार्यालय का कहना है कि कार्रवाई के वक्त स्टे ऑर्डर प्रस्तुत नहीं किया गया था और यह कार्रवाई हाईकोर्ट के निर्देश के अनुपालन में की गई। फिलहाल कुछ हिस्सों में परिवार रह रहा है।

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