बाल श्रम मुक्त राज्य की दिशा में बड़ा कदम, शिक्षा से जोड़े जाएंगे बच्चे

पटना : राज्य के विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह की अध्यक्षता में बुधवार को बाल एवं किशोर श्रम उन्मूलन के लिए एक महत्वपूर्ण आयोजित हुई। इस दौरान राज्य रणनीति एवं कार्य योजना 2025 के प्रावधानों के अन्तर्गत गठित राज्य कार्यबल की बैठक में राज्य में बाल एवं किशोर श्रम के प्रभावी रोकथाम, विमुक्त बाल एवं किशोर श्रमिकों के समुचित पुनर्वास से संबंधित कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की गई। इस दौरान संबंधित विभागों के स्तर पर राज्य में बाल एवं किशोर श्रम की विमुक्ति कार्रवाई एवं पुनर्वास से संबंधित अंतर-विभागीय समन्वय की स्थिति पर प्रस्तुतीकरण भी दिया गया।

विमुक्त बच्चों को शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और सामाजिक सुरक्षा का लाभ

बैठक में धावा दलों के कार्यप्रणाली को समयबद्ध तरीके से और अधिक प्रभावी बनाने, विमुक्त किए गए बच्चों एवं किशोरों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने, व्यावसायिक प्रशिक्षण एवं कौशल विकास की सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था कराने एवं उनके परिवारों को विभिन्न सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने पर विचार-विमर्श किया गया। विकास आयुक्त ने निर्देश दिया है कि सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ एकीकृत कार्ययोजना के अनुरूप कार्य करें। उन्होंने बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के अन्तर्गत कानूनी कार्रवाई को सुगम बनाने के उद्देश्य से हर महीने गृह विभाग, श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग, विधि विभाग एवं बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार की संयुक्त बैठक आयोजित करने का निदेश दिया है।

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बैठक में कई अधिकारी रहे शामिल

बैठक में बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग के अध्यक्ष अशोक कुमार बादल, शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी राजेन्दर, योजना एवं विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव एन विजयलक्ष्मी, समाज कल्याण विभाग की सचिव बन्दना प्रेयषी, विभागीय सचिव दीपक आनन्द, श्रमायुक्त राजेश भारती समेत अन्य संबंधित विभागों के सचिव, वरिष्ठ अधिकारी, अन्य पदाधिकारी और बाल संरक्षण विशेषज्ञ यूनिसेफ बिहार के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

विमुक्त किए गए प्रत्येक बाल एवं किशोर श्रमिक का व्यक्तिगत पुनर्वास प्रोफाइल तैयार किया जाए – विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह

विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने कहा कि विमुक्त किए गए प्रत्येक बाल एवं किशोर श्रमिक का व्यक्तिगत पुनर्वास प्रोफाइल तैयार किया जाए तथा उनकी प्रगति की समय-समय पर निगरानी की जाए। ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी बच्चा फिर से श्रम में न लौटे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग बालश्रम से विमुक्त बच्चों का श्रेणीवार डाटा तैयार करे, ताकि नोडल विभाग के स्तर पर संचालित योजनाओं का लाभ उन्हें मिल सके और विमुक्त बच्चे, जिनको रहने की समस्या है, उन्हें अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के छात्रावासों में रखा जाए।

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‘दूसरी तरफ उनके परिवार को राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड के साथ-साथ अन्य जन-कल्याणकारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए’

वहीं, दूसरी तरफ उनके परिवार को राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड के साथ-साथ अन्य जन-कल्याणकारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए। विकास आयुक्त ने यह भी कहा कि बाल एवं किशोर श्रमिकों की विमुक्ति एवं पुनर्वास राज्य की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और इसके लिए सभी विभागों को संवेदनशीलता, तत्परता एवं उत्तरदायित्व के साथ कार्य करना होगा।

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