National Teacher Award 2026: धनबाद की शिक्षिका मुनमुन भट्टाचार्य को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार, राष्ट्रपति ने किया सम्मानित

National Teacher Award 2026शिक्षक दिवस के अवसर पर धनबाद की शिक्षिका मुनमुन भट्टाचार्य को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया। मुनमुन भट्टाचार्य मध्य विद्यालय बरमसिया की प्रभारी प्रधानाध्यापिका हैं। विद्यालय में शिक्षा के क्षेत्र में किए गए नवाचार, सीमित संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और सतत विकास लक्ष्यों को स्कूली शिक्षा से जोड़ने की पहल के लिए उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर यह सम्मान मिला है। राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के तहत उन्हें 50 हजार रुपये की पुरस्कार राशि, रजत पदक और प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया गया। सम्मान मिलने के बाद उन्होंने अपने शिक्षण अनुभव, विद्यालय में किए जा रहे प्रयोगों और बच्चों की शिक्षा को लेकर अपनी सोच साझा की।

पुरस्कार को बताया सामूहिक प्रयास का सम्मान

मुनमुन भट्टाचार्य ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार को अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि के बजाय सामूहिक प्रयास का सम्मान बताया। उनका कहना है कि विद्यालय में शिक्षक, विद्यार्थी और अभिभावक मिलकर जो प्रयास करते हैं, उसी का परिणाम यह सम्मान है। उन्होंने कहा कि धनबाद को राष्ट्रीय स्तर पर यह गौरव मिलना भी उनके लिए खुशी की बात है। उनके अनुसार, शिक्षा के क्षेत्र में किए जाने वाले प्रयास तभी प्रभावी होते हैं, जब सभी संबंधित लोग मिलकर काम करें।

बच्चों को सतत विकास लक्ष्यों से जोड़ने की पहल

मुनमुन भट्टाचार्य के अनुसार, विद्यालय में बच्चों को सतत विकास लक्ष्यों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए जल संरक्षण, ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता जैसे विषयों को बच्चों की शिक्षा का हिस्सा बनाया जा रहा है। उनका मानना है कि बच्चों की शिक्षा केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्हें अपने आसपास मौजूद समस्याओं को समझने और उनके समाधान के बारे में सोचने के लिए भी प्रेरित किया जाना चाहिए।

कबाड़ से तैयार की जाती है शिक्षण सामग्री

मुनमुन भट्टाचार्य ने बताया कि सीमित संसाधनों के बावजूद विद्यालय में बच्चों को बेहतर तरीके से पढ़ाने के लिए अलग-अलग प्रयोग किए जाते हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप कम लागत और बिना लागत वाली शिक्षण सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। बेकार पड़े सामान को उपयोगी शिक्षण सामग्री में बदलकर बच्चों को पढ़ाने का प्रयास किया जाता है। इससे बच्चों को अपने आसपास की वस्तुओं से सीखने का अवसर मिलता है। उनके अनुसार, शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है। बच्चों के आसपास का वातावरण और रोजमर्रा के अनुभव भी उनके सीखने का महत्वपूर्ण माध्यम हो सकते हैं। इसलिए शिक्षण को बच्चों के परिवेश से जोड़ने पर जोर दिया जाता है।

धनबाद में बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखना चुनौती

मुनमुन भट्टाचार्य ने कहा कि धनबाद खनन क्षेत्र है और यहां बच्चों की शिक्षा के सामने कई तरह की चुनौतियां हैं। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के अलावा बच्चों के पढ़ाई छोड़ने की समस्या भी सामने आती है। ऐसे में बच्चों को लगातार विद्यालय और शिक्षा से जोड़े रखना जरूरी है। इसके लिए उनकी पढ़ाई को स्थानीय परिवेश और जरूरतों से जोड़कर आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाता है।

छात्राओं की माध्यमिक स्तर तक पढ़ाई पर जोर

उन्होंने छात्राओं की शिक्षा को लेकर भी अपनी चिंता साझा की। उनके अनुसार, प्राथमिक स्तर पर छात्राओं का नामांकन अपेक्षाकृत बेहतर रहता है, लेकिन माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर पहुंचने के साथ इसमें गिरावट देखने को मिलती है। मुनमुन भट्टाचार्य का कहना है कि केवल प्राथमिक स्तर पर छात्राओं का नामांकन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। उन्हें माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर तक लगातार शिक्षा से जोड़ना भी जरूरी है।

शिक्षक और अभिभावक की साझेदारी जरूरी

मुनमुन भट्टाचार्य के अनुसार, बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए शिक्षक और अभिभावक दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। विद्यालय में अच्छा शैक्षणिक वातावरण तैयार करने के साथ बच्चों के सामाजिक और पारिवारिक परिवेश को समझना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि संसाधन सीमित होने के बावजूद सकारात्मक सोच और सामूहिक प्रयास के माध्यम से बच्चों को बेहतर दिशा दी जा सकती है। उनके लिए राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार इसी सामूहिक प्रयास और शिक्षा के प्रति निरंतर काम का सम्मान है।

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