नीति और कानून तभी प्रभावी होंगे, जब लोग जागरूक होंगे : जस्टिस साहू

Patna: नीति और कानून तभी प्रभावी तरीके से लागू होते हैं, जब लोगों में इसके प्रति जागरूक होगी। ये बातें पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू ने कही। वे बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार की तरफ से तेजाब पीड़ितों को जागरूक करने को लेकर आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। इसमें नालसा (नेशनल लीगल सर्विस ऑथिरिटी) स्कीम, 2016 के स्तर से एसिड अकैट के शिकार लोगों को न्यायिक सेवाएं मुहैया कराने से संबंधित नियमों की विस्तृत जानकारी दी गई।

मुख्य न्यायाधीश ने अपने संबोधन में क्या कहा

मुख्य न्यायाधीश ने अपने संबोधन की शुरुआत एसिड अटैक की पीड़िताओं को समर्पित एक कविता की पंक्तियां सुनाते हुए की, कहा कि ‘शरीर झुलसा है, रूह में जान अभी बाकी है, हिम्मत से लड़ूंगी जिंदगी की लड़ाई, आत्मसम्मान मेरा अब भी बाकी है।‘

उन्होंने कहा कि यह मानवता पर किया गया अपराध है। इस तरह के अपराध को समाप्त करने के लिए ठोस सामाजिक कदम उठाने होंगे। बिना पहचान-पत्र के किसी को तेजाब नहीं देना चाहिए।

इन मामलों में तुरंत और कठोर न्याय व्यवस्था लागू करने की आवश्यकता है। किसी मामले में अस्वीकृति या विवाद को हिंसा का कारण नहीं हो सकता है। पीड़िता मानसिक, शारीरिक और आर्थिक तीनों तरह की पीड़ा झेलती है। एसिड अटैक के मुख्य कारणों में अस्वीकृत प्रेम, घरेलू हिंसा, दहेज हिंसा, संपत्ति विवाद, प्रतिशोध की भावना शामिल हैं। यह बेहद संवेदनशील विषय है। इसके पीड़ितों को समाज में सम्मान के साथ स्वीकार करना आवश्यक है। इन्हें समुचित शिक्षा, रोजगार के अवसर प्रदान कराना, कानूनी मदद और उन्हें अकेला नहीं समझते हुए सम्मान से जीवन जीने के सभी जरूरी अवसर मुहैया कराने की आवश्यकता है।

सरकारी और निजी अस्पताल मुफ्त और तुरंत पीड़ित की बिना किसी औपचारिकता के उपचार करें

जस्टिस साहू ने कहा कि इसे लेकर देश में स्पष्ट और कठोर कानून बने हुए हैं, जिनका सही तरीके से अनुपालन कराने की जरूरत है। सरकारी और निजी अस्पताल मुफ्त और तुरंत पीड़ित की बिना किसी औपचारिकता के उपचार करें। अगर कोई अस्पताल इलाज करने से इंकार करते हैं, तो यह दंडनीय अपराध है और उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 200 में एक वर्ष का कारावास और आर्थिक दंड दोनों का प्रावधान है। पीड़ितों के पुनर्वास के लिए भी सरकार के स्तर से कई सहायता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसके अलावा नालसा की तरफ से मुफ्त कानूनी सहायता यानी वकील से लेकर कानूनी सलाह या मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाता है। इस तरह की घटनाओं में आवेदन मिलने के साथ ही 5 से 10 हजार रुपये मुआवजा देने का नियम है। 15 दिनों के अंदर 1 लाख रुपये मुआवजा और शेष 2 लाख रुपये के मुआवजे का भुगतान अधिकतम दो महीने में किया जाना चाहिए।

न्यायमूर्ति ने कहा कि अगर महिला यौन उत्पीड़न और एसिड अटैक दोनों की शिकार है, तो वह संयुक्त मुआवजा की हकदार है। पीएम राहत कोष से भी तेजाब पीड़ितों को 1 लाख रुपये की सहायता मिलती है। आयुष्मान कार्ड योजना के अंतर्गत एसिड अटैक की पीड़ितों को इलाज के लिए राशि और प्लास्टिक सर्जरी के लिए अलग से 50 हजार रुपये देने की योजना है। सरकारी नौकरी में आरक्षण, विकलांगों के समान आरक्षण समेत अन्य प्रावधान भी शामिल हैं। इनकी समुचित जानकारी पीड़ितों को मुहैया करानी चाहिए।

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