झारखंड सरकार ने समूह घ कर्मचारियों के लिए समूह ग में प्रोन्नति का रास्ता खोला। 15% पद सीमित प्रतियोगिता परीक्षा से भरे जाएंगे।
Jharkhand Promotion Policy 2026 रांची: झारखंड सरकार ने राज्य के चतुर्थ वर्गीय (समूह घ) कर्मियों को बड़ी राहत देते हुए उन्हें समूह ग (लिपिकीय संवर्ग) में प्रोन्नति का अवसर प्रदान किया है। कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग ने इसके लिए “सीमित ऑनलाइन प्रतियोगिता परीक्षा नियमावली, 2026” की अधिसूचना जारी कर दी है। इस फैसले से हजारों कर्मचारियों के करियर में उन्नति का रास्ता खुल गया है।
Jharkhand Promotion Policy 2026:15% पद अब प्रतियोगिता परीक्षा से भरे जाएंगे
नई नियमावली के तहत निम्नवर्गीय लिपिक और कनीय सचिवालय सहायक के कुल 15 प्रतिशत पद सीमित प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से भरे जाएंगे। इसके लिए सचिवालय, संलग्न कार्यालयों, क्षेत्रीय कार्यालयों और समाहरणालयों में रिक्त पदों का रोस्टर क्लीयरेंस कर आरक्षण के अनुसार सूची तैयार की जाएगी। इसके बाद संबंधित विभाग कार्मिक विभाग के जरिए जेएसएससी को अधियाचना भेजेंगे, जिसके आधार पर परीक्षा आयोजित होगी।
Key Highlights
समूह घ कर्मियों को समूह ग में प्रोन्नति का अवसर
“सीमित ऑनलाइन प्रतियोगिता परीक्षा नियमावली 2026” लागू
15% पद प्रतियोगिता परीक्षा से भरे जाएंगे
चयन प्रक्रिया दो चरणों में होगी
न्यूनतम 10 वर्ष की सेवा अनिवार्य
Jharkhand Promotion Policy 2026:दो चरणों में होगी चयन प्रक्रिया
चयन प्रक्रिया को दो चरणों में बांटा गया है। पहले चरण में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा ऑनलाइन सीबीटी (कंप्यूटर आधारित टेस्ट) आयोजित किया जाएगा। इसमें 100 वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाएंगे, जिनमें सामान्य अध्ययन, विज्ञान, गणित, झारखंड से संबंधित सामान्य ज्ञान, हिंदी भाषा एवं व्याकरण, कार्यालय संचालन और कंप्यूटर का बुनियादी ज्ञान शामिल होगा।
दूसरे चरण में लिखित परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों की हिंदी टंकण (टाइपिंग) परीक्षा ली जाएगी, जो केवल क्वालीफाइंग होगी।
Jharkhand Promotion Policy 2026:पात्रता और अनुभव की शर्तें तय
इस परीक्षा में शामिल होने के लिए अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 10 वर्ष की निरंतर सेवा अनिवार्य की गई है। कनीय सचिवालय सहायक पद के लिए स्नातक होना जरूरी होगा, जबकि क्षेत्रीय कार्यालयों में लिपिक पद के लिए इंटरमीडिएट (10+2) उत्तीर्ण होना अनिवार्य है।
इसके अलावा अभ्यर्थी की सेवा संपुष्टि होनी चाहिए और उस पर किसी भी प्रकार की विभागीय या आपराधिक कार्रवाई लंबित नहीं होनी चाहिए।
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