Sand Crisis in Jharkhand: बालू घाट बंद, Illegal Mining से सरकार को रोज 6 करोड़ का नुकसान

 झारखंड में 229 बालू घाटों का टेंडर पूरा होने के बावजूद वैध उठाव शुरू नहीं हुआ। अवैध बालू कारोबार से सरकार को प्रतिदिन 6 करोड़ रुपये की रॉयल्टी का नुकसान।


Sand Crisis in Jharkhand रांची: झारखंड में बालू घाटों की बंदोबस्ती प्रक्रिया छह माह पहले पूरी हो चुकी है, लेकिन अब तक राज्य में बालू का वैध उठाव शुरू नहीं हो सका है। इसका सीधा फायदा बालू माफिया उठा रहे हैं, जो रात के अंधेरे में नदियों से बालू निकालकर खुले बाजार में बेच रहे हैं। इससे आम लोगों को महंगे दाम पर बालू खरीदना पड़ रहा है, जबकि सरकार को प्रतिदिन करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।

राज्य में 10 जून से 15 अक्टूबर तक मॉनसून के दौरान राष्ट्रीय हरित अधिकरण की रोक के कारण बालू घाटों से निकासी बंद रहती है। ऐसे में यदि जल्द वैध उठाव शुरू नहीं हुआ, तो अगले पांच महीनों तक फिर बालू की भारी किल्लत बनी रहेगी।


Key Highlights:

• 16 जिलों के 229 बालू घाटों का टेंडर छह माह पहले पूरा

• लीज डीड नहीं होने से अब तक शुरू नहीं हो सका वैध उठाव

• अवैध बालू कारोबार से सरकार को रोज 6 करोड़ का नुकसान

• 10 जून से 15 अक्टूबर तक NGT की रोक फिर लगेगी

• बाजार में बालू की कीमत दोगुनी से अधिक पहुंची


Sand Crisis in Jharkhand: दोगुनी कीमत पर बिक रहा बालू

बालू घाट चालू नहीं होने से बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं। पहले जो एक ट्रैक्टर बालू 2000 से 2500 रुपये में मिल जाता था, अब उसकी कीमत 6000 से 7000 रुपये तक पहुंच गई है।

इसी तरह एक हाइवा बालू की कीमत 25 हजार से 35 हजार रुपये तक हो गई है। निर्माण कार्यों से जुड़े लोगों और आम उपभोक्ताओं पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। अवैध कारोबार के कारण कीमतों पर किसी तरह का नियंत्रण नहीं रह गया है।

Sand Crisis in Jharkhand: लीज डीड नहीं बनने से अटका मामला

बालू घाटों के चालू नहीं होने की सबसे बड़ी वजह लीज डीड का लंबित होना है। स्थानीय जिला प्रशासन को लीज डीड करनी होती है, लेकिन यह प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी है।

लीज डीड नहीं होने से घाट संचालक सीटीओ के लिए आवेदन नहीं दे पा रहे हैं। बिना इन जरूरी दस्तावेजों के घाटों का संचालन शुरू नहीं किया जा सकता। अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा कानून के तहत ग्राम सभा की सहमति लेना अनिवार्य है, जिससे प्रक्रिया और लंबी हो रही है।

साथ ही टेंडर के बाद एसीमेंट और माइनिंग प्लान की मंजूरी में विभागीय सुस्ती भी बड़ी बाधा बनी हुई है।

Sand Crisis in Jharkhand: 229 घाटों से सरकार को मिल सकता है बड़ा राजस्व

राज्य भर में अब तक 16 जिलों के 229 बालू घाटों का टेंडर पूरा हो चुका है। केवल ग्राम सभा और लीज डीड की प्रक्रिया बाकी है। इसे एकरारनामा भी कहा जाता है।

एकरारनामा होने पर सरकार को फाइनल बिड की आधी राशि हस्ताक्षर के समय ही मिल जाएगी। 229 घाटों से सरकार को तत्काल 473 करोड़ रुपये से अधिक प्राप्त हो सकते हैं। इसके अलावा राज्य सरकार ने प्रति वर्ष चालू घाटों से 2000 करोड़ रुपये रॉयल्टी मिलने का अनुमान लगाया है।

वर्तमान में वैध कारोबार शुरू नहीं होने से सरकार को प्रतिदिन करीब 6 करोड़ रुपये की रॉयल्टी का नुकसान हो रहा है।

Sand Crisis in Jharkhand: अधिकारियों ने जल्द प्रक्रिया पूरी करने की बात कही

खान निदेशक राहुल कुमार सिन्हा ने कहा कि तकनीकी प्रक्रिया को जल्द पूरा करने का निर्देश दिया गया है। जिन घाटों की ईसी लंबित है, उन पर राज्य स्तरीय विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति काम कर रही है।

उन्होंने बताया कि जिलों को जल्द लीज प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बालू घाटों का संचालन शुरू हो सके और सरकार को रॉयल्टी प्राप्त हो।

वहीं रांची डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने कहा कि सभी मामलों की समीक्षा की जा रही है और यह जानकारी मांगी गई है कि किन-किन घाटों में प्रक्रिया अटकी हुई है। प्रशासन का प्रयास है कि बालू घाट जल्द से जल्द चालू हों।

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