झारखंड में 10 जून से एनजीटी की रोक के बीच केवल 14 बालू घाटों से वैध निकासी शुरू हो सकी है। मॉनसून के दौरान बालू संकट और कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका।
Jharkhand Sand Crisis रांची: झारखंड में मॉनसून सीजन शुरू होने से पहले ही बालू संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है। 10 जून से राज्य के सभी बालू घाटों से बालू निकासी पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की वार्षिक रोक लागू हो जाएगी। ऐसे में निर्माण कार्यों पर असर पड़ सकता है, क्योंकि राज्य के 444 बालू घाटों में से केवल 14 घाटों से ही वैध रूप से बालू का उठाव शुरू हो पाया है।
खान विभाग की कोशिश थी कि मॉनसून से पहले अधिक से अधिक बालू का भंडारण कर लिया जाए, लेकिन विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से अधिकांश घाटों से अभी तक संचालन शुरू नहीं हो सका है।
Jharkhand Sand Crisis:444 घाटों में से सिर्फ 14 पर शुरू हो सका संचालन
जानकारी के अनुसार राज्य में कुल 444 बालू घाट हैं, जिनमें से 290 घाटों की नीलामी पूरी हो चुकी है। इनमें 35 ऐसे घाट हैं जिनकी ग्रामसभा और अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं लगभग पूरी हो चुकी हैं तथा उन्हें पर्यावरणीय स्वीकृति भी मिल चुकी है।
इन 35 घाटों में से 17 घाटों की लीज डीड की प्रक्रिया पूरी हो गई है, लेकिन केवल 14 घाटों से ही वैध बालू निकासी शुरू हो पाई है। वर्तमान में दुमका के तीन, जमशेदपुर के दो, गोड्डा के तीन, हजारीबाग के दो, रामगढ़ के एक तथा अन्य जिलों के कुछ घाटों से बालू का उठाव किया जा रहा है।
Key Highlights
10 जून से 15 अक्टूबर तक बालू उठाव पर एनजीटी की रोक लागू।
राज्य के 444 बालू घाटों में केवल 14 घाटों से शुरू हुई वैध निकासी।
रांची के दो घाटों की लीज डीड पूरी, फिर भी तकनीकी कारणों से उठाव शुरू नहीं।
मॉनसून के दौरान राज्य को 4 से 5 करोड़ सीएफटी बालू की जरूरत।
अवैध बालू कारोबार जारी, कालाबाजारी में एक हाइवा बालू की कीमत 32 हजार रुपये तक पहुंची।
Jharkhand Sand Crisis:रांची के दो घाट तकनीकी कारणों से बंद
राजधानी रांची में श्यामनगर और चेकोसेरेग बालू घाटों की लीज डीड पूरी हो चुकी है। इसके बावजूद चालान संबंधी तकनीकी समस्याओं के कारण इन घाटों से अब तक बालू निकासी शुरू नहीं हो सकी है।
खान विभाग और संबंधित एजेंसियां इन तकनीकी बाधाओं को दूर करने में जुटी हैं, लेकिन एनजीटी की रोक लागू होने से पहले संचालन शुरू नहीं हो पाने की आशंका जताई जा रही है।
Jharkhand Sand Crisis:मॉनसून में बढ़ सकती है बालू की किल्लत
विशेषज्ञों के अनुसार मॉनसून के दौरान झारखंड में निर्माण कार्यों के लिए लगभग 4 से 5 करोड़ सीएफटी बालू की आवश्यकता होती है। यदि पर्याप्त मात्रा में भंडारण नहीं हुआ तो आने वाले महीनों में निर्माण परियोजनाओं, सरकारी योजनाओं और निजी भवन निर्माण कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
पिछले वर्ष भी बालू की कमी के कारण कई निर्माण कार्य प्रभावित हुए थे और कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला था।
Jharkhand Sand Crisis:अवैध कारोबार से बढ़ी चिंता
बालू कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि वैध घाट संचालकों को ट्रैक्टर उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि ट्रैक्टर संचालकों को अवैध रूप से निकाला गया बालू आसानी से मिल जा रहा है।
कारोबारियों के मुताबिक वैध भंडारण की व्यवस्था होने के बावजूद परिवहन की समस्या के कारण अपेक्षित मात्रा में स्टॉक नहीं किया जा पा रहा है। दूसरी ओर कई क्षेत्रों में अवैध बालू उठाव बेरोक-टोक जारी है, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान भी हो रहा है।
स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कालाबाजारी में 700 सीएफटी बालू से भरे एक हाइवा की कीमत 32 हजार रुपये तक पहुंच गई है।
Jharkhand Sand Crisis:अधिकारियों ने दिए अधिकतम भंडारण के निर्देश
खान विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिन 14 घाटों से वैध रूप से बालू उठाव शुरू हो चुका है, वहां के संचालकों को अधिकतम मात्रा में बालू का भंडारण करने का निर्देश दिया गया है। विभाग का उद्देश्य मॉनसून अवधि में निर्माण कार्यों के लिए बालू की उपलब्धता सुनिश्चित करना है, ताकि बाजार में कृत्रिम संकट और कीमतों में अनावश्यक बढ़ोतरी को रोका जा सके।
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