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Chaibasa Treasury Scam: पुलिस खातों से 45 लाख की Fraud निकासी, सिपाही समेत 4 हिरासत में

 चाईबासा ट्रेजरी से पुलिस विभाग के खातों से 45 लाख रुपये की फर्जी निकासी का मामला सामने आया। सिपाही देवनारायण मुर्मू समेत 4 लोगों से पूछताछ जारी।


Chaibasa Treasury Scam West Singhbhum: बोकारो, हजारीबाग और रांची के बाद अब चाईबासा ट्रेजरी से भी पुलिस विभाग के खातों से फर्जी तरीके से करीब 45 लाख रुपये की निकासी का मामला सामने आया है। इस मामले में पुलिस ने शनिवार को पूर्व में एसपी ऑफिस में पदस्थापित सिपाही देवनारायण मुर्मू, उसके दो रिश्तेदारों और एक दोस्त को हिरासत में लेकर पूछताछ की।

चारों से पूरे दिन एसपी ऑफिस में पूछताछ होती रही। मामले के सामने आने के बाद प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।

Chaibasa Treasury Scam:उच्चस्तरीय जांच टीम गठित

चाईबासा डीसी मनीष कुमार के निर्देश पर मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय टीम गठित की गई है। इस टीम में एडीसी प्रवीण कुमार, सदर एसडीओ संदीप अनुराग, दो डीएसपी और वित्त मामलों के विशेषज्ञ शामिल हैं।

टीम पिछले दस वर्षों के पेंशन, वेतन और अन्य निकासी से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है। सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक एसपी ऑफिस में फाइलों की गहन पड़ताल की गई।

वहीं एसपी अमित रेनू ने भी एसडीपीओ से फाइलें मंगाकर कई बैंकों में जांच कराई। इस दौरान वेतन से संबंधित डेटा और पेंशनभोगियों के खातों की जांच की गई।


Key Highlights:

• चाईबासा ट्रेजरी से 45 लाख रुपये की फर्जी निकासी का मामला

• सिपाही देवनारायण मुर्मू समेत 4 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ

• 2016 से 2022 के बीच वेतन और पेंशन मद में गड़बड़ी की आशंका

• डीसी के निर्देश पर उच्चस्तरीय जांच टीम गठित

• एसआईटी अब डिजिटल फुटप्रिंट और डेटा टैम्परिंग की जांच करेगी


Chaibasa Treasury Scam:रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर हुई राशि

प्रारंभिक जांच में 2016 से 2022 के बीच वेतन, पेंशन और अन्य मद में 30 से 45 लाख रुपये तक की फर्जी निकासी की आशंका जताई गई है।

वर्तमान में गोइलकेरा थाने में पदस्थापित सिपाही देवनारायण मुर्मू पहले चाईबासा एसपी ऑफिस के लेखा विभाग में कार्यरत था। आरोप है कि उसने लंबित पेंशन और अन्य मद की राशि अपने रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर कराई।

देवनारायण मुर्मू पूर्वी सिंहभूम जिले का रहने वाला है। पुलिस उसे शुक्रवार को गोइलकेरा थाना से चाईबासा एसपी ऑफिस लाई थी। उसके दो रिश्तेदारों और एक दोस्त से भी लगातार पूछताछ की जा रही है।

जांच में यह भी सामने आया है कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लंबित भुगतान वाले खातों का फायदा उठाया गया। कई मामलों में पेंशनभोगी नियमित फॉलो-अप नहीं करते थे, जिसका लाभ उठाकर राशि उनके खातों के बजाय रिश्तेदारों के खातों में भेजी गई।

Chaibasa Treasury Scam:SIT अब डिजिटल फुटप्रिंट की करेगी जांच

रांची ट्रेजरी घोटाले की जांच में सामने आए तथ्यों के बाद विशेष जांच दल (SIT) ने अब जांच का अगला चरण तय कर लिया है। आईजी पंकज कंबोज के नेतृत्व में एसआईटी अब डिजिटल फुटप्रिंट, डेटा टैम्परिंग और मनी ट्रेल की जांच करेगी।

हजारीबाग में 15.41 करोड़ से 28 करोड़ रुपये तक की वित्तीय गड़बड़ी और बोकारो में करोड़ों के अवैध ट्रांसफर के बाद जांच एजेंसी पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने की तैयारी में है।

प्रारंभिक जांच में कंप्यूटर डेटा से छेड़छाड़ को घोटाले का बड़ा जरिया माना गया है। यह पता लगाया जा रहा है कि ट्रेजरी सिस्टम में सेंध लगाकर फर्जी वाउचर कैसे तैयार किए गए और सरकारी राशि निजी खातों में कैसे ट्रांसफर की गई।

Chaibasa Treasury Scam:बैंक अधिकारी भी जांच के दायरे में

एसआईटी यह भी जांच करेगी कि जिन बैंक खातों के जरिए लेनदेन हुआ, उनमें केवाईसी नियमों का पालन हुआ या नहीं। करोड़ों के संदिग्ध ट्रांजेक्शन के बावजूद बैंकों ने सस्पिशियस ट्रांजेक्शन रिपोर्ट क्यों नहीं दी, इसकी भी पड़ताल होगी।

बैंक अधिकारियों के साथ-साथ डीडीओ और ट्रेजरी अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। जांच एजेंसियों का कहना है कि दोषियों की पहचान के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी और फर्जी ट्रांजेक्शन की रिकवरी भी की जाएगी।

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