झारखंड हाईकोर्ट ने जेएसएससी द्वारा महिला पर्यवेक्षिका परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी रद्द करने के आदेश को अवैध करार देते हुए नियुक्ति का निर्देश दिया।
JSSC Supervisor Recruitment रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा महिला पर्यवेक्षिका प्रतियोगिता परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी रद्द करने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने जेएसएससी के आदेश को अवैध, मनमाना और गैर-कानूनी करार देते हुए उसे रद्द कर दिया है।
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस दीपक रोशन की एकलपीठ ने आयोग को निर्देश दिया कि मेधा सूची में सफल याचिकाकर्ताओं की उम्मीदवारी स्वीकार की जाये और उन्हें सभी परिणामी लाभों के साथ महिला पर्यवेक्षिका पद पर 10 सप्ताह के भीतर नियुक्त किया जाये।
JSSC Supervisor Recruitment:दस्तावेज सत्यापन के आधार पर नहीं कर सकते बाहर
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि मेरिट के आधार पर परीक्षा में सफल घोषित हो चुके अभ्यर्थियों को केवल इस आधार पर दस्तावेज सत्यापन चरण में बाहर नहीं किया जा सकता कि उन्होंने स्नातक स्तर पर संबंधित विषय पूरे तीन वर्षों तक नहीं पढ़ा था।
अदालत ने कहा कि दस्तावेज सत्यापन का मुख्य उद्देश्य पहले से जमा प्रमाणपत्रों और अभ्यर्थियों के क्रेडेंशियल्स की प्रामाणिकता की जांच करना होता है। इस प्रक्रिया के दौरान आयोग कोई नया मानदंड या अतिरिक्त योग्यता लागू नहीं कर सकता।
Key Highlights
हाईकोर्ट ने जेएसएससी का उम्मीदवारी रद्द करने का आदेश खारिज किया
अदालत ने कार्रवाई को मनमाना और गैर-कानूनी बताया
सफल अभ्यर्थियों को 10 सप्ताह में नियुक्ति देने का निर्देश
दस्तावेज सत्यापन में नया मानदंड जोड़ने पर कोर्ट की आपत्ति
महिला पर्यवेक्षिका भर्ती विवाद में अभ्यर्थियों को बड़ी राहत
JSSC Supervisor Recruitment:भर्ती नियमावली से बाहर नहीं हो सकता आयोग
कोर्ट ने यह भी कहा कि जेएसएससी भर्ती प्रक्रिया के दौरान ऐसा कोई नया नियम लागू नहीं कर सकता, जो मूल विज्ञापन या भर्ती नियमावली का हिस्सा नहीं रहा हो। यदि किसी योग्यता का उल्लेख विज्ञापन में नहीं था, तो बाद में उसी आधार पर उम्मीदवारों की उम्मीदवारी रद्द करना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।
अदालत के इस फैसले को महिला पर्यवेक्षिका भर्ती परीक्षा के सफल अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
JSSC Supervisor Recruitment:10 सप्ताह में नियुक्ति का निर्देश
हाईकोर्ट ने जेएसएससी को निर्देश दिया है कि सभी योग्य याचिकाकर्ताओं को 10 सप्ताह के भीतर नियुक्ति दी जाये। साथ ही उन्हें नियुक्ति से जुड़े सभी परिणामी लाभ भी उपलब्ध कराये जाएं।
इस फैसले के बाद आयोग की भर्ती प्रक्रिया और दस्तावेज सत्यापन प्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
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