World Snake Day 2026: झारखंड में सांपों की 27 प्रजातियां, बारिश में Snake Bite से बचने के लिए जानें सही जानकारी

विश्व सर्प दिवस पर जानिए झारखंड में पाई जाने वाली सांपों की प्रजातियां, कौन से सांप विषैले हैं, कौन से नहीं और सर्पदंश से जुड़ी भ्रांतियों के पीछे की सच्चाई।


World Snake Day 2026 रांची:विश्व सर्प दिवस के अवसर पर विशेषज्ञों ने लोगों से सांपों को लेकर फैली भ्रांतियों से बचने और सही जानकारी अपनाने की अपील की है। बारिश का मौसम शुरू होते ही झारखंड में सांपों के निकलने और सर्पदंश के मामलों में बढ़ोतरी देखी जाती है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश सांप इंसानों के लिए हानिकारक नहीं होते और वे पर्यावरण के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

World Snake Day 2026: झारखंड में 27 प्रजातियों के सांप, केवल छह हैं विषैले

लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार झारखंड में सांपों की 27 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें केवल छह विषैली हैं। वहीं दुनिया भर में करीब 3,500 से अधिक प्रजातियों के सांप पाए जाते हैं, जिनमें लगभग 95 प्रतिशत विषहीन हैं। ये सांप जमीन, पेड़ों, पानी और बिलों में रहते हैं। इस वर्ष रांची के विभिन्न इलाकों से बसुंधरी (कॉपर हेडेड ट्रिंकेट), बैंडेड करैत, तक्षक नाग और बेबी अल्बिनो रैट स्नेक जैसी दुर्लभ प्रजातियों का सफल रेस्क्यू भी किया गया है।

रांची जिले में पाए जाने वाले प्रमुख विषैले सांपों में भारतीय नाग, कॉमन करैत, बैंडेड करैत, रसेल वाइपर (सियार चंदा) और बम्बू पिट वाइपर शामिल हैं। वहीं धामण, चेकर्ड कीलबैक (ढोड), कुकरी स्नेक, वुल्फ स्नेक, लैंड बोआ, ब्रॉन्जबैक ट्री स्नेक, होरहोरा और अजगर जैसे सांप विषहीन हैं। कैट स्नेक और ब्राउन वाइन स्नेक जैसे कुछ सांप हल्के विष वाले होते हैं, जिनका विष सामान्यतः मनुष्यों के लिए जानलेवा नहीं माना जाता।


Key Highlights:

  • झारखंड में सांपों की 27 प्रजातियां पाई जाती हैं, इनमें छह विषैली हैं।

  • दुनिया के लगभग 95 प्रतिशत सांप विषहीन होते हैं।

  • बारिश के मौसम में घरों और खेतों में सांप निकलने की घटनाएं बढ़ जाती हैं।

  • सांपों को लेकर प्रचलित कई मान्यताएं वैज्ञानिक रूप से गलत हैं।

  • विशेषज्ञों ने सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक की बजाय तत्काल अस्पताल जाने की सलाह दी।


World Snake Day 2026: सांपों से जुड़ी भ्रांतियों पर विशेषज्ञों की सलाह

विशेषज्ञों का कहना है कि सांपों को लेकर समाज में कई गलत धारणाएं प्रचलित हैं। जैसे नागमणि का होना, सांप का दूध पीना, बदला लेना, किसी व्यक्ति की पहचान कर लेना, छूने से जहर फैल जाना या झाड़-फूंक से सर्पदंश का इलाज हो जाना जैसी बातें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं हैं। इसी तरह सर्पदंश के बाद रस्सी बांधना, जहर चूसने की कोशिश करना या चीरा लगाना भी गलत और खतरनाक तरीका है। ऐसी स्थिति में पीड़ित को शांत रखते हुए तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाना चाहिए, जहां एंटी स्नेक वेनम से उपचार संभव है।

World Snake Day 2026: चार हजार से अधिक सांपों का रेस्क्यू, संरक्षण पर भी जोर

सर्प रेस्क्यू विशेषज्ञ उमाशंकर सिंह और शुभम अब तक चार हजार से अधिक सांपों का सफल रेस्क्यू कर चुके हैं। उनका कहना है कि बारिश के दौरान बिलों में पानी भर जाने के कारण सांप सुरक्षित स्थान की तलाश में घरों और रिहायशी इलाकों में पहुंच जाते हैं। ऐसे समय लोगों को घबराने के बजाय वन विभाग या प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को सूचना देनी चाहिए।

पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) राजीव रंजन के अनुसार सांप जैव विविधता और खाद्य सुरक्षा प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वे चूहों और अन्य जीवों की संख्या नियंत्रित कर पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखते हैं। यही कारण है कि कई प्रजातियों को वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत संरक्षित श्रेणी में रखा गया है।


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