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अपराध पर प्रहार, सुरक्षा का विस्तार- ‘नया सवेरा 3.0’ से बदलता बिहार

पटना : मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार को अपराध मुक्त एवं सभी वर्गों की सुरक्षा करने का जो संकल्प लिया था, उसी के तहत बिहार पुलिस और प्रशासन ने ‘नया सवेरा अभियान’ की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य बाल श्रम, मानव तस्करी, बाल विवाह और नशाखोरी जैसी सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध व्यापक जागरूकता व बचाव कार्य होना है।

बिहार पुलिस व प्रशासन ने एक जुलाई से 14 जुलाई 2026 तक विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों के सहयोग से ऑपरेशन ‘नया सवेरा 3.0’ संचालित किया

सरकार के नेतृत्व में राज्य स्तर पर मानव व्यापार व संबंधित अपराधों के विरुद्ध चलाये जा रहे समकालीन अभियानों की सफलता को ध्यान में रखते हुए बिहार पुलिस व प्रशासन ने एक जुलाई 2026 से 14 जुलाई 2026 तक विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) के सहयोग से ऑपरेशन ‘नया सवेरा 3.0’ संचालित किया। जिसमें पहले चरण में 15 दिन का ‘नया सवेरा’ एवं उसके बाद एक माह तक जारी ‘नया सवेरा 2.0’ के सफल परिणामों के बाद यह तीसरा विशेष अभियान चलाया गया है।

अभियान में बाल श्रम के मामलों पर विशेष ध्यान दिया गया और कुल 25 कांड दर्ज किये गए, जिनमें से 60 नाबालिग बच्चों को मुक्त कराया गया

अभियान में बाल श्रम के मामलों पर विशेष ध्यान दिया गया और कुल 25 कांड दर्ज किए गए, जिनमें से 60 नाबालिग बच्चों को मुक्त कराया गया। वहीं लैंगिक अपराध और ऑर्केस्ट्रा/डांस ग्रुप से संबंधित नौ कांडों में 25 नाबालिग बच्चियों को छुड़ाया गया व एक महिला सहित कुल पांच मानव तस्करों को गिरफ्तार किया गया। अनैतिक देह व्यापार (ITPA) के अंतर्गत कुल 12 कांड दर्ज किए गए, जिनमें 23 नाबालिग समेत कुल 53 पीड़ितों को मुक्त कराया गया और 52 महिलाओं समेत कुल 88 मानव तस्करों को पकड़ा गया। अन्य प्रकार के मानव व्यापार से जुड़े कुल छह कांडों में चार नाबालिग बच्चियों व 15 नाबालिग बच्चों (कुल 19 पीड़ित) को बचाया गया और चार महिलाओं समेत कुल 16 मानव तस्करों को हिरासत में लिया गया।

इस अभियान के तहत मुक्त कराई गई पीड़िताओं में पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और असम की पीड़िता शामिल हैं – बिहार पुलिस मुख्यालय

बिहार पुलिस मुख्यालय के मुताबिक, इस अभियान के तहत मुक्त कराई गई पीड़िताओं में पश्चिम बंगाल (13), उड़ीसा (15), छत्तीसगढ़ (3), उत्तर प्रदेश (1) और असम की एक पीड़िता शामिल हैं। साथ ही नेपाल की दो पीड़िताओं को भी अभियान में बचाया गया है। राज्य से बाहर पाई गई सभी पीड़िताओं को उनके गृह जिलों तक सुरक्षित भेजने के लिए संबंधित जिला स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की जा चुकी है। गौरतलब है कि अपराध पर अंकुश लगाने को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया है कि बिहार में अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं है। महिला अपराध के मामले में तत्काल केस दर्ज कर, तुरंत चार्जशीट दाखिल की जाए और कोर्ट के माध्यम से अपराधी को कड़ी से कड़ी सजा दिलवाई जाए।

अपराध और अपराधियों के खिलाफ बड़ा अभियान

आमजनों में कानूनी प्रावधानों के प्रचार-प्रसार हेतु NGOs के सहयोग से ‘नया सवेरा अभियान 3.0’ के तहत दिनांक 18 जुलाई 2026 से 25 जुलाई 2026 तक स्थानीय स्तर पर जन-जागरूकता अभियान चलाया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य बाल अपराधों, मानव तस्करी और बाल श्रम जैसी गंभीर सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ लोगों को शिक्षित करना है। विशेष अभियान में 10,589 गुमशुदा बच्चों की जानकारी Mission Vatsalya पोर्टल पर अपलोड करवाई गई है। जून 2026 में मिले 209 मामलों में से अब तक 32 बच्चों को बरामद किया गया है।

राज्य में हॉटस्पॉट चिन्हित कर थाना स्तर पर कुल 1005 पुलिस दीदी टीमें बनाई गई हैं

राज्य में हॉटस्पॉट चिन्हित कर थाना स्तर पर कुल 1005 पुलिस दीदी (अभया ब्रिगेड) टीमें बनाई गई हैं, इन टीमों ने 612 मनचलों के खिलाफ कार्रवाई कर 20 मामलों की रिपोर्ट दर्ज करवाई है। महिला छात्रावासों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 355 निजी महिला छात्रावास को चिन्हित कर संचालकों को तुरंत पंजीकरण कराने के निर्देश दिए गए हैं। जिन छात्रावासों में सुरक्षा उपाय नहीं हैं, वहां तुरंत CCTV, बायोमेट्रिक और आगंतुक रजिस्टर लगाने के आदेश दिए गए हैं। बिहार पुलिस ने आरोपपत्र मामलों की सूची TMS पोर्टल पर अपलोड कर अदालत की कार्रवाई की निगरानी शुरू की है, अब तक 668 कांड दर्ज किए गए हैं। जून 2026 में बलात्कार के 30 मामलों में 35 आरोपियों और POCSO के 27 मामलों में 30 आरोपियों को दोषी ठहराकर सजा दी गई। वहीं मई/जून महीने में विशेष अभियान चलाकर महिलाओं के विरूद्ध अपराध से संबंधित मामलों में कुल 67 अभियुक्तों की गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई।

अंतिम व्यक्ति की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध बिहार पुलिस

सुरक्षा केवल कानून लागू करने का नाम नहीं है, बल्कि समाज के सबसे कमजोर व्यक्ति तक न्याय, गरिमा और संरक्षण पहुंचाने का भी नाम है। इसी उद्देश्य से समाज के सबसे संवेदनशील और पिछड़े वर्गों के प्रति बिहार पुलिस की नई नीतियां और मुहिम तेजी से लागू की जा रही हैं, ताकि वे संरक्षण और सामाजिक न्याय से वंचित न रहें। मई जून महीने में विशेष अभियान में अनुसूचित जाति/जनजाति से जुड़े 74 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

एक अप्रैल से 15 जुलाई 2026 के बीच प्राथमिकी के आधार पर 2502 और आरोपपत्र के आधार पर 1580 लोगों को मुआवजा दिया गया – अनुसूचित जाति/जनजाति कल्याण विभाग

अनुसूचित जाति/जनजाति कल्याण विभाग के अनुसार, एक अप्रैल से 15 जुलाई 2026 के बीच प्राथमिकी के आधार पर 2502 और आरोपपत्र के आधार पर 1580 लोगों को मुआवजा दिया गया। पुलिस मुख्यालय में सभी जिलों के एसपी और अपराध प्रबोधकों की बैठक कर मामलों के त्वरित निपटारे और लंबित मामलों की संख्या घटाने के निर्देश दिए गए। मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 2017 की धारा-100 के तहत थाना स्तर पर भटकते हुए मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों को संरक्षण में लेकर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचाने का निर्देश सभी जिलों को दिया गया है। इस वर्ष ‘बिहार राज्य मानसिक स्वास्थ्य एवं सहबद्ध संस्थान’ कोईलवर आरा में उपचार के बाद 55 लोग ठीक होकर अपने परिवार या Halfway Home भेजे जा चुके हैं।

यह एक बहु-आयामी मॉडल के रूप में तैयार किया गया है – अपर पुलिस महानिदेशक के सुहिता अनुपम

अपराध अनुसंधान विभाग एवं कमजोर वर्ग प्रभाग के अपर पुलिस महानिदेशक के सुहिता अनुपम बताती है कि यह एक बहु-आयामी मॉडल के रूप में तैयार किया गया है जिसमें प्रवर्तन, सहयोग, पुनर्वास और जन जागरण के चार स्तंभ शामिल हैं। अभियान के तहत विशेष रूप से संवेदनशील जिलों में अभियान फील्ड टीमें, मोबाइल रैपिड रिस्पांस यूनिट और अलग-अलग विभागों के समन्वय से तेजी से कार्रवाई की जा रही है।

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