झारखंड हाईकोर्ट ने 2,800 अभ्यर्थियों की री-एग्जाम मामले में FIR और CID जांच का आदेश दिया। पहली परीक्षा के अंक प्रकाशित करने का भी निर्देश दिया।
Jharkhand Teacher Recruitment रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने माध्यमिक आचार्य शिक्षक नियुक्ति विज्ञापन संख्या 2/2025 से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने करीब 2,800 अभ्यर्थियों की दोबारा परीक्षा कराए जाने के मामले में आपराधिक जांच का निर्देश दिया है। जस्टिस दीपक रोशन की एकलपीठ ने राज्य के मुख्य सचिव को प्राथमिकी दर्ज कर पूरे मामले की सीआईडी से विस्तृत जांच कराने का आदेश दिया है।
Jharkhand Teacher Recruitment: 2,800 अभ्यर्थियों की दोबारा परीक्षा पर उठे सवाल
मामला राज्य के प्लस टू विद्यालयों में 23 विषयों के 1,373 पदों पर माध्यमिक आचार्य शिक्षकों की नियुक्ति से जुड़ा है। इस भर्ती परीक्षा में करीब 25 हजार अभ्यर्थी शामिल हुए थे। इनमें लगभग 2,800 अभ्यर्थियों के परीक्षा देने वाले कंप्यूटर सिस्टम में बाहरी प्रभाव या कथित छेड़छाड़ की जानकारी सामने आने के बाद उनकी उत्तर-पुस्तिकाओं को लॉक कर दिया गया था।
इसके बाद झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने संबंधित अभ्यर्थियों को नोटिस जारी कर पूछा था कि कंप्यूटर सिस्टम प्रभावित होने में उनकी कोई संलिप्तता थी या नहीं। अभ्यर्थियों से इस संबंध में शपथपत्र भी लिया गया था और बाद में उनकी दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया।
अभ्यर्थी अर्पणा कुमारी एवं अन्य ने आयोग के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। प्रार्थियों की ओर से दलील दी गई कि परीक्षा एक बार आयोजित होने के बाद केवल कुछ अभ्यर्थियों की दोबारा परीक्षा लेना उचित नहीं है। इससे सभी परीक्षार्थियों के साथ समान व्यवहार नहीं होगा।
Key Highlights
झारखंड हाईकोर्ट ने 2,800 अभ्यर्थियों की री-एग्जाम मामले में CID जांच का आदेश दिया।
मुख्य सचिव को प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया गया है।
पहली परीक्षा में मिले अंक भी प्रकाशित करने होंगे।
निर्दोष पाए जाने और मेरिट में आने पर अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर विचार होगा।
दोषी जेएसएससी कर्मचारी मिलने पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
Jharkhand Teacher Recruitment: पहली परीक्षा के अंक भी प्रकाशित करने का निर्देश
हाईकोर्ट ने जेएसएससी को निर्देश दिया है कि जिन करीब 2,800 अभ्यर्थियों की दोबारा परीक्षा ली गई है, उनके पहली बार आयोजित परीक्षा में प्राप्त अंक भी प्रकाशित किए जाएं। अदालत ने कहा कि यदि सीआईडी जांच में इन अभ्यर्थियों के खिलाफ कोई आपत्तिजनक तथ्य सामने नहीं आता है और वे निर्धारित मेरिट में आते हैं, तो उनकी नियुक्ति पर भी विचार किया जाए।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सीआईडी जांच के निष्कर्ष का नियुक्ति प्रक्रिया पर असर पड़ेगा। यदि जांच में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग का कोई कर्मचारी दोषी पाया जाता है, तो आयोग को संबंधित कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करनी होगी।
Jharkhand Teacher Recruitment: हाईकोर्ट ने पूछा, कंप्यूटर हैक था तो जांच क्यों नहीं हुई
सुनवाई के दौरान अदालत ने आयोग से पूछा कि यदि परीक्षा के दौरान कंप्यूटर सिस्टम में बाहरी हस्तक्षेप या हैकिंग हुई थी, तो इसकी उच्चस्तरीय जांच क्यों नहीं कराई गई। कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि केवल प्रभावित बताए गए अभ्यर्थियों की दोबारा परीक्षा कराने का आधार क्या था।
आयोग की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल और प्रिंस कुमार ने अदालत को बताया कि परीक्षा ऑनलाइन कंप्यूटर आधारित थी। बाहरी दखलंदाजी या सिस्टम से छेड़छाड़ का पता लगाने के लिए कंप्यूटर में विशेष चिप लगाई गई थी।
इस भर्ती परीक्षा में 1,373 पदों पर नियुक्ति होनी है। इनमें से 877 अभ्यर्थियों की नियुक्ति की अनुशंसा जेएसएससी पहले ही शिक्षा विभाग से कर चुका है, जबकि बाकी पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है।


















