Ranchi Leptospirosis Cases: बच्चों में बढ़ रहा लेप्टोस्पायरोसिस का खतरा, अगस्त में 129 से अधिक भर्ती

Ranchi Leptospirosis Cases: झारखंड में बारिश के मौसम के बीच लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमण को लेकर चिंता बढ़ी है। आम बोलचाल में इसे ‘रैट फीवर’ भी कहा जाता है। रांची के रानी चिल्ड्रेंस हॉस्पिटल में अगस्त महीने में इस संक्रमण से पीड़ित 129 से अधिक बच्चों के भर्ती होने की जानकारी सामने आयी है। डॉक्टरों के अनुसार, 8 महीने से लेकर 16 वर्ष तक की उम्र के बच्चे इससे प्रभावित हो रहे हैं। रानी चिल्ड्रेंस हॉस्पिटल के डॉ. राजेश के अनुसार, कुछ बच्चों में संक्रमण फेफड़ों और दिमाग तक पहुंचने के कारण उनकी हालत गंभीर हुई और उन्हें आईसीयू में उपचार की जरूरत पड़ी।

संक्रमित चूहों के पेशाब से फैलता है बैक्टीरियल संक्रमण

लेप्टोस्पायरोसिस लेप्टोस्पाइरा नामक बैक्टीरिया से होने वाला संक्रमण है। यह बैक्टीरिया संक्रमित चूहों और कुछ अन्य जानवरों के पेशाब में पाया जाता है। बारिश के दौरान जब चूहों के बिलों में पानी भरता है, तो वे बाहर निकलते हैं और मिट्टी, पानी या सार्वजनिक स्थानों को दूषित कर सकते हैं। दूषित पानी या मिट्टी के संपर्क में आने से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। खासकर बच्चों के नंगे पैर कीचड़ या ठहरे हुए पानी में खेलने पर जोखिम बढ़ता है। हाथ-पैर में मौजूद छोटे घाव या कट के अलावा आंख, नाक और मुंह के रास्ते भी बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश कर सकता है।

तेज बुखार से लेकर गंभीर जटिलताओं तक दिख सकते हैं लक्षण

रांची जिला सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. विमलेश कुमार ने बीमारी के लक्षणों और जांच के संबंध में जानकारी दी। उनके अनुसार, शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार, बदन दर्द, सिरदर्द और आंखों का लाल होना शामिल हो सकता है। गंभीर स्थिति में मरीज को पीलिया, किडनी फेलियर, ब्लीडिंग और मेनिनजाइटिस जैसी जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है। शुरुआती लक्षण कई बार डेंगू, टाइफाइड या सामान्य वायरल बुखार जैसे दिखाई दे सकते हैं। इससे बीमारी की पहचान में देरी होने की संभावना रहती है।

IgM और PCR जांच से होती है बीमारी की पुष्टि

डॉ. विमलेश कुमार के अनुसार, लेप्टोस्पायरोसिस की पुष्टि के लिए खून की IgM एंटीबॉडी जांच या PCR टेस्ट कराया जाता है। इन जांचों के माध्यम से संक्रमण की पहचान की जा सकती है। उन्होंने कहा कि बीमारी को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह इलाज योग्य बैक्टीरियल संक्रमण है। सदर अस्पताल में इसके इलाज की व्यवस्था उपलब्ध होने की जानकारी दी गयी है। उन्होंने बताया कि उपचार में इस्तेमाल होने वाली एंटीबायोटिक दवाएं, जैसे डॉक्सीसाइक्लिन, सेफ्ट्रियाक्सोन और पेनिसिलिन जी, अस्पताल में मुफ्त उपलब्ध हैं।

बच्चों को ठहरे पानी और कीचड़ से रखें दूर

डॉक्टरों ने अभिभावकों से बच्चों को गंदे और ठहरे हुए पानी में खेलने से रोकने की अपील की है। बारिश के दौरान पानी और कीचड़ के संपर्क को कम करना संक्रमण से बचाव के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया गया है। लक्षण दिखाई देने पर खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से परामर्श लेने की सलाह दी गयी है। खासकर तेज बुखार, बदन दर्द, सिरदर्द या आंखों में लालिमा जैसे लक्षण बने रहने पर समय पर चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है। फिलहाल रांची में सामने आये मामलों के बीच डॉक्टरों ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। बीमारी के लक्षणों को सामान्य बुखार समझकर नजरअंदाज करने के बजाय समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने पर जोर दिया गया है।

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