Bihar Green Hydrogen Policy 2026: बिहार में ग्रीन हाइड्रोजन पॉलिसी-2026 का ड्राफ्ट तैयार, 16 हजार करोड़ निवेश और 12 हजार रोजगार का अनुमान

Bihar Green Hydrogen Policy 2026, पटना: बिहार सरकार ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में कदम बढ़ाने की तैयारी कर रही है। राज्य में इस नई ऊर्जा तकनीक के उत्पादन, इस्तेमाल और इससे जुड़ी औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए बिहार ग्रीन हाइड्रोजन पॉलिसी-2026 का ड्राफ्ट तैयार किया गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस प्रस्तावित नीति को लेकर अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की।

बैठक में बिहार में ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट स्थापित करने, संबंधित उद्योगों को आकर्षित करने और इसके लिए जरूरी बुनियादी ढांचा विकसित करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। सरकार का अनुमान है कि इस नीति के माध्यम से राज्य में लगभग 16 हजार करोड़ रुपये का संभावित निवेश आ सकता है। इसके साथ ही करीब 12 हजार रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना जताई गई है।

Bihar Green Hydrogen Policy 2026: बरौनी में ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट की संभावना

प्रस्तावित नीति में बरौनी को महत्वपूर्ण स्थान मिल सकता है। सरकार ने बरौनी रिफाइनरी और हिंदुस्तान उर्वरक रसायन लिमिटेड यानी HURL के अधिकारियों के साथ मिलकर ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़ी संभावनाओं का अध्ययन करने को कहा है। बरौनी पहले से ही बिहार के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल है। ऐसे में यहां मौजूद औद्योगिक आधार और संस्थानों को ध्यान में रखते हुए ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन और इस्तेमाल की संभावनाएं तलाशने की तैयारी है।

हालांकि, योजना केवल बरौनी तक सीमित नहीं है। अधिकारियों को बिहार के अन्य क्षेत्रों में भी हाइड्रोजन प्लांट स्थापित करने की संभावनाओं का आकलन करने का निर्देश दिया गया है। इससे भविष्य में राज्य के अलग-अलग हिस्सों में इस क्षेत्र से जुड़े उद्योग विकसित करने का रास्ता खुल सकता है।

12 हजार रोजगार का अनुमान, अभी नहीं है भर्ती की घोषणा

प्रस्तावित ग्रीन हाइड्रोजन पॉलिसी के तहत करीब 12 हजार रोजगार के अवसर पैदा होने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि ये फिलहाल किसी सरकारी या निजी भर्ती की घोषित रिक्तियां नहीं हैं। यह अनुमान संभावित निवेश और ग्रीन हाइड्रोजन सेक्टर के विस्तार के आधार पर लगाया गया है। यदि निवेश आता है और प्लांट तथा उससे जुड़ी गतिविधियां शुरू होती हैं, तो इंजीनियरिंग, तकनीकी सेवाओं, प्लांट संचालन, रखरखाव और अन्य सहायक क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बन सकते हैं। इसलिए 12 हजार रोजगार को फिलहाल संभावित रोजगार क्षमता के रूप में देखा जाना चाहिए।

16 हजार करोड़ रुपये का निवेश कैसे आएगा?

सरकार का लक्ष्य ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़े उद्योगों और कंपनियों को बिहार में निवेश के लिए आकर्षित करना है। इसके लिए उत्पादन, उपयोग, तकनीकी सुविधाओं और जरूरी बुनियादी ढांचे पर काम करने की योजना बनाई जा रही है। प्रस्तावित नीति के जरिए निवेशकों को राज्य में ग्रीन हाइड्रोजन से संबंधित परियोजनाएं स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास होगा। फिलहाल सरकार संबंधित औद्योगिक संस्थानों और विशेषज्ञों के साथ आगे की कार्ययोजना तैयार करेगी। ऐसे में 16 हजार करोड़ रुपये का आंकड़ा अभी संभावित निवेश है। इसे राज्य में आ चुका वास्तविक निवेश नहीं माना जा सकता।

ग्रीन हाइड्रोजन क्या है और क्यों है महत्वपूर्ण?

ग्रीन हाइड्रोजन ऐसी हाइड्रोजन है, जिसे स्वच्छ ऊर्जा की मदद से तैयार किया जाता है। आमतौर पर इसके उत्पादन में नवीकरणीय ऊर्जा से प्राप्त बिजली का इस्तेमाल पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित करने के लिए किया जाता है। ऊर्जा और उद्योग के क्षेत्र में ग्रीन हाइड्रोजन को भविष्य के महत्वपूर्ण विकल्पों में गिना जा रहा है।

इसका इस्तेमाल औद्योगिक प्रक्रियाओं, ऊर्जा भंडारण और परिवहन जैसे क्षेत्रों में संभावित रूप से किया जा सकता है। केंद्र सरकार के राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन का लक्ष्य भी 2030 तक देश में हर साल कम से कम 50 लाख मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन की क्षमता विकसित करना है। बिहार की प्रस्तावित नीति इसी व्यापक राष्ट्रीय दिशा के साथ राज्य को जोड़ने का प्रयास मानी जा रही है।

बिहार के औद्योगिक विकास को मिल सकता है नया आधार

यदि प्रस्तावित नीति के अनुसार निवेश और परियोजनाएं धरातल पर आती हैं, तो बिहार में एक नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित हो सकता है। बरौनी जैसे औद्योगिक केंद्रों में ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़े उत्पादन और उपयोग की शुरुआत होने की संभावना है। इसके अलावा राज्य के दूसरे जिलों में भी प्लांट, तकनीकी सेवाओं और सहायक उद्योगों के विकास के अवसर तलाशे जा रहे हैं। इससे औद्योगिक निवेश बढ़ाने के साथ-साथ तकनीकी कौशल और रोजगार के नए अवसर तैयार हो सकते हैं। फिलहाल ग्रीन हाइड्रोजन पॉलिसी-2026 ड्राफ्ट स्तर पर है। आगे की प्रक्रिया, निवेश प्रस्तावों और परियोजनाओं के विकास के बाद ही इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा।

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