India International Water Week 2026: स्टार्टअप्स ने उठाए सवाल, कहा—सिर्फ स्टॉल नहीं, वास्तविक अवसर चाहिए

 इंडिया इंटरनेशनल वाटर वीक 2026 को लेकर इंडियन स्टार्टअप एसोसिएशन ने स्टार्टअप्स के लिए वास्तविक कारोबारी और सरकारी अवसर सुनिश्चित करने की मांग की।


India International Water Week 2026 नई दिल्ली: भारत मंडपम, नई दिल्ली में 22 से 26 सितंबर तक आयोजित इंडिया इंटरनेशनल वाटर वीक 2026 को लेकर स्टार्टअप समुदाय ने आयोजन में भागीदारी के परिणामों पर सवाल उठाए हैं। इंडियन स्टार्टअप एसोसिएशन ने कहा कि जल क्षेत्र में काम कर रहे स्टार्टअप्स के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की सफलता केवल प्रदर्शनी, मंच और आगंतुकों की संख्या से नहीं आंकी जानी चाहिए। इसके बजाय यह देखा जाना चाहिए कि आयोजन से कितने वास्तविक कारोबारी, सरकारी और कार्यान्वयन संबंधी अवसर पैदा हुए।

India International Water Week 2026:स्टार्टअप्स के लिए महंगी होती है बड़े आयोजनों में भागीदारी

इंडियन स्टार्टअप एसोसिएशन के अनुसार शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स के लिए बड़े राष्ट्रीय आयोजनों में भाग लेना काफी खर्चीला होता है। स्टॉल शुल्क के अलावा यात्रा, आवास, परिवहन, लॉजिस्टिक्स, कर्मचारियों की तैनाती और कई दिनों का कार्य समय भी इसमें शामिल होता है।

एसोसिएशन का कहना है कि इस निवेश के बदले स्टार्टअप्स को सरकारी विभागों, नीति निर्माताओं, कार्यान्वयन एजेंसियों, उद्योग जगत, सीएसआर संस्थाओं, निवेशकों और संभावित ग्राहकों तक वास्तविक पहुंच मिलनी चाहिए।

जल, भूजल, जलवायु परिवर्तन, कृषि और पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाले कई भारतीय स्टार्टअप सीमित संसाधनों के बावजूद तकनीकी समाधान विकसित कर रहे हैं। एसोसिएशन के मुताबिक इन कंपनियों को केवल प्रदर्शनी स्थल उपलब्ध कराने के बजाय उनके समाधानों को प्रायोगिक परियोजनाओं, सरकारी खरीद और बड़े पैमाने पर कार्यान्वयन से जोड़ने की जरूरत है।

Key Highlights

  • इंडिया इंटरनेशनल वाटर वीक 2026 का आयोजन 22 से 26 सितंबर तक नई दिल्ली में हुआ।
  • इंडियन स्टार्टअप एसोसिएशन ने स्टार्टअप भागीदारी के परिणामों पर सवाल उठाए।
  • एसोसिएशन ने कहा कि केवल स्टॉल और प्रदर्शनी से स्टार्टअप्स को पर्याप्त लाभ नहीं मिलता।
  • सरकारी परियोजनाओं, प्रायोगिक प्रोजेक्ट और खरीद से जोड़ने की मांग की गई।
  • एसोसिएशन ने जल नवाचार के लिए परिणाम आधारित स्टार्टअप सहभागिता मॉडल का सुझाव दिया।

India International Water Week 2026:परिणाम आधारित मॉडल की मांग, आयोजन के बाद भी हो फॉलोअप

इंडियन स्टार्टअप एसोसिएशन ने भविष्य में ऐसे आयोजनों के लिए परिणाम आधारित स्टार्टअप सहभागिता मॉडल विकसित करने का सुझाव दिया है। इसके तहत आयोजन से पहले ही स्टार्टअप्स की संबंधित सरकारी विभागों और संभावित खरीदारों के साथ बैठकें तय करने की व्यवस्था की जा सकती है।

एसोसिएशन के अनुसार आयोजन के बाद भी स्टार्टअप्स को मिले संपर्कों, प्रायोगिक परियोजनाओं, समझौता ज्ञापनों, सरकारी खरीद और परियोजनाओं की प्रगति का नियमित फॉलोअप होना चाहिए।

एसोसिएशन ने सवाल उठाया कि ऐसे आयोजनों के बाद कितने स्टार्टअप्स को वास्तविक सरकारी परियोजनाएं मिलीं, कितने प्रायोगिक प्रोजेक्ट शुरू हुए, कितनी व्यावसायिक साझेदारियां बनीं और कितने समाधान सरकारी या संस्थागत स्तर पर अपनाए गए।

एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी संस्था या व्यक्ति की आलोचना करना नहीं है। उसका कहना है कि सरकारी और सार्वजनिक संसाधनों से आयोजित मंचों का इस्तेमाल देश के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए होना चाहिए।

India International Water Week 2026:जल नवाचार में भारत को मजबूत करने पर जोर

भारत में जल संकट, भूजल स्तर में गिरावट, जलवायु परिवर्तन, सिंचाई और ग्रामीण जल सुरक्षा जैसी चुनौतियां लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई हैं। ऐसे में जल क्षेत्र में तकनीकी समाधान विकसित करने वाले स्टार्टअप्स की भूमिका भी बढ़ रही है।

इंडियन स्टार्टअप एसोसिएशन के अनुसार यदि भारत को जल नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत भूमिका बनानी है, तो नवाचार से लेकर वास्तविक उपयोग तक की पूरी श्रृंखला को मजबूत करना होगा। इसमें नवाचार, प्रदर्शन, प्रायोगिक परियोजना, सरकारी खरीद और बड़े पैमाने पर विस्तार जैसे चरण शामिल हैं।

एसोसिएशन का कहना है कि किसी भी जल प्रदर्शनी की सफलता का अंतिम पैमाना यह होना चाहिए कि वहां प्रदर्शित तकनीक और नवाचार कितनी तेजी से वास्तविक परियोजनाओं तक पहुंचते हैं और कितने लोगों तथा संस्थानों को उसका लाभ मिलता है।

एसोसिएशन ने अपने संदेश में कहा कि स्टार्टअप्स को केवल स्टॉल नहीं, बल्कि अवसर चाहिए और केवल प्रदर्शन नहीं, बल्कि वास्तविक कार्यान्वयन चाहिए।

भविष्य के आयोजनों में स्टार्टअप्स की भागीदारी को अधिक परिणाम केंद्रित बनाने और जल क्षेत्र में विकसित भारतीय नवाचारों को सरकारी तथा संस्थागत स्तर पर अपनाने के लिए ठोस व्यवस्था तैयार करने की उम्मीद जताई गई है।

 

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