Gayaji Pitru Paksha Mela 2026: पितरों के तर्पण और पिंडदान के लिए देश-विदेश से गया आने वाले श्रद्धालुओं को इस बार परंपरा के साथ आधुनिक तकनीक का भी सहारा मिलेगा। पितृपक्ष मेला 2026 में श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा और भीड़ प्रबंधन के लिए कई तकनीकी व्यवस्थाएं की गई हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर गयाजी में प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। इस बार बच्चों और बुजुर्गों के परिजनों से बिछड़ने की स्थिति से निपटने के लिए QR Code वाले Wrist Band की व्यवस्था की गई है। वहीं, भाषा की समस्या दूर करने के लिए हेल्प डेस्क पर ट्रांसलेशन सिस्टम और कानून-व्यवस्था के लिए AI आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
QR Wrist Band से बिछड़े श्रद्धालुओं को खोजने में मिलेगी मदद
मेले में आने वाले बच्चों और बुजुर्गों के लिए QR Code युक्त Wrist Band की व्यवस्था की गई है। इस बैंड में परिजनों का मोबाइल नंबर और जरूरी विवरण दर्ज रहेगा। यदि कोई श्रद्धालु अपने परिवार से बिछड़ जाता है तो उसके परिजनों के मोबाइल पर Alert Message पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। QR Code Scan के जरिए श्रद्धालु की पहचान कर उसे उसके परिवार तक पहुंचाने में मदद की जाएगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य मेले में बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के बीच बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को मजबूत करना है।
भाषा की बाधा भी होगी दूर, AI से भीड़ पर नजर
देश और विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए हेल्प डेस्क पर Google Translator System की सुविधा उपलब्ध कराने की तैयारी है। इससे अलग-अलग भाषाएं बोलने वाले श्रद्धालुओं को जानकारी लेने में आसानी होगी। श्रद्धालु अपनी भाषा में दिए गए जवाब को सुन सकेंगे। इसके जरिए भाषा की वजह से होने वाली परेशानी को कम करने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं, मेले में कानून-व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन के लिए AI तकनीक और कैमरों का इस्तेमाल किया जाएगा। किसी स्थान पर भीड़ बढ़ने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों को लोकेशन के साथ अलर्ट मिलने की व्यवस्था होगी। गुमशुदा लोगों की पहचान में भी AI और कैमरों की मदद ली जाएगी। उपलब्ध जानकारी के आधार पर कैमरे में व्यक्ति का चेहरा डालकर उसकी संभावित लोकेशन का पता लगाने की व्यवस्था की जा रही है।
गयाजी के कायाकल्प में बच्चों की भी भागीदारी
पितृपक्ष मेले के दौरान गया शहर में ‘कायाकल्प’ अभियान भी चलाया जा रहा है। इस अभियान में गयाजी के बच्चों ने भी अपनी भूमिका निभाई है। शहर की दीवारों पर बच्चों द्वारा भगवान विष्णु से जुड़ी कलाकृतियां बनाई जा रही हैं। इससे मेला क्षेत्र को धार्मिक और सांस्कृतिक रंग देने के साथ शहर के सौंदर्यीकरण पर भी जोर दिया जा रहा है। श्रद्धालुओं के आवासन की भी बड़ी व्यवस्था की गई है। मेला क्षेत्र में प्रतिदिन 75,348 लोगों के नि:शुल्क आवासन की व्यवस्था है। इसके अलावा 943 शौचालय, 134 स्नानागार और 74 चेंजिंग रूम तैयार किए गए हैं।
पानी, स्वास्थ्य और परिवहन की भी व्यापक व्यवस्था
श्रद्धालुओं के लिए मेला क्षेत्र में 280 चापाकल और 890 नल लगाए गए हैं। पेयजल की गुणवत्ता की रोजाना PHED की लैब में जांच की जा रही है। स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए मेला क्षेत्र में कुल 70 स्वास्थ्य शिविर संचालित किए जाएंगे। इन शिविरों में 125 डॉक्टर और 178 पैरामेडिकल कर्मी तैनात रहेंगे। IMA की ओर से श्रद्धालुओं के लिए नि:शुल्क प्राथमिक उपचार की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। श्रद्धालुओं के आवागमन को आसान बनाने के लिए 150 नि:शुल्क ई-रिक्शा चलाए जाएंगे। इसके अलावा मेला क्षेत्र में विशेष परिवहन व्यवस्था भी की गई है।
30 रुपये में सात्विक भोजन, जीविका दीदियों की रसोई
मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भोजन की व्यवस्था में भी विशेष ध्यान दिया गया है। जीविका दीदियों की रसोई के माध्यम से श्रद्धालुओं को मात्र 30 रुपये में उच्च गुणवत्ता वाला सात्विक भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। कुल मिलाकर पितृपक्ष मेला 2026 में प्रशासन का फोकस धार्मिक परंपराओं के साथ श्रद्धालुओं की सुरक्षा, स्वच्छता, स्वास्थ्य, आवासन, परिवहन और तकनीकी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर है। QR Wrist Band से लेकर AI आधारित निगरानी तक की व्यवस्थाओं के जरिए मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के अनुभव को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने का प्रयास किया जा रहा है।


















